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अजनबी औरत के साथ वो पल

मेरी जिंदगी में कुछ अच्छा नहीं चल रहा था। मैंने पढाई बड़े ही मन लगा कर अच्छे से की थी। मेरे कई काबिल दोस्त मुझे हमेशा अपने आप से आगे ही रखते थे। शायद उन्हें इस बात का यकीन था की मैं जिंदगी में बहुत बड़ी चीज करूँगा पर पढाई पूरी अरने के बाद शुरुआत में काफी कुछ अच्छा चला और इसी बात को देखकर मेरे घर वालों ने मेरी शादी एक बचपन की सहेली से करदी।

थोड़े ही दिनों में बाजार में गिरावट आई और उस गिरावट में कई लोग बेरोजगार हो गए जिनमे मैं भी शामिल था। मैंने पर हिम्मत नहीं हारी और हर संभव प्रयाश करने लगा। इन्ही प्रयासों के दौरान मेरी जिम्मेदारियां और बढ़ गई। मुझे एक बेटी हुई और मैंने खुलकर उसका स्वागत किया।

पर थोड़े दिनों बाद मुझे जिम्मेदारियों के बढ़ने का एह्शस होने लगा। मेरी बीवी मुझे समझाना भी शुरू करदी की अब घर खर्च के लिए पैसे भी काम होने लगे है और जल्द ही हमें कुछ करना पड़ेगा। मैंने प्रयासों को तेज कर दिया और अब मैं अपने शहर को छोड़ कर भी नौकरी तलाशने लगा पर इनमे भी पैसे ज्यादे खर्च होने लगे थे और मेरी मुशिबते बढ़ती जा रही थी।

अब लगभग मुझे बेरोजगार हुवे एक साल हो गया था और मैं किसी तरह से दोस्तों की मदद लेकर अपना घर चला रहा था। पर मुझे मालूम था की इस तरह से मेरा घर नहीं चल सकता था। इसी बीच एक इंटरव्यू के दौरान मुझे इंटरव्यू लेनेवाली मैडम ने मेरे बारे में जब जाना तो वो मुझे पूरा हिसाब किताब देने लगी और बोली की अगर मैं वो नौकरी कर भी लेता हु तो भी मैं अपनी घर की जरुरतो को पूरा नहीं कर पाउँगा।

सही बात

मुझे उनकी बात सही लगी पर मुझे तो किसी तरह से नौकरी चाहिए थी। उन्होंने मुझे सही पाने के बावजूद नौकरी देने से मन कर दिया बल्कि मुझे अपना फ़ोन नंबर दे कर बोली की घर पहुंच कर मैं उन्हें कॉल करू। मुझे बेहद दुःख हुवा की आखिर अब कैसे मैं नौकरी पा सकूंगा। घर पहुँचते ही मैंने सबसे पहले उन्हें कॉल किया और फिर उन्होंने मुझसे कहा की मैं जितने में उनके यहाँ महीने भर में कमाने वाला था अब मैं उससे ज्यादा कम सकूंगा। ये सुनकर मुझे बेहद ख़ुशी हुई और फिर उन्होंने मुझसे अगले दिन की साम को मिलाने को बुलाया। मैं एक बार फिर से बुरे कॉन्फिडेंस के साथ उनसे मिलाने उनके बताये हुवे स्थान पर पंहुचा। वहा पहुंचकर मुझे थोड़ी देर इंतज़ार करने को कहा गया। लगभग आधे घंटे के इंतज़ार के बाद मुझे मैडम कीर्ति ने अंदर बुलाया और इस बार जब मैंने उन्हें देखा तो मेरी नज़र उनके चेहरे के बजाय मेरी नजर उनकी अध खुली छाती पर पड़ने लगी। मैंने अपने ध्यान को उनके चेहरे की ओर ही रखना चाहा पर ऐसा होता मुश्किल लग रहा था। उनकी खुबसुरुआत छाती के दिखाते हुवे हिस्से ने मुझे तो जैसे पागल ही बना दिया था। मैं कुछ बोलता उससे पहले मैडम कीर्ति ने ही बोला की मुझे कोई जरुरत नहीं है उनकी छाती से नजर हटाने की क्यूंकि वो जानबूझकर मुझे दिखाना चाहती थी। मैंने जब जानना चाहा की आखिर वो ऐसा क्यों चाहती थी तो उन्होंने कहा की अगर मैं ऐसी ही छातियों को निहारते रहूँगा तो मुझे बहुत ज्यादे पैसे मिलेंगे जो की मेरी जरुरत थी।

उन्होंने फिर मुझे मेरे नए जॉब के बारे में बताना शुरू किया की मुझे कई ऐसी ही असंतुष्ट औरतों को संतुष्ट करना पड़ेगा और उसके लिए मुझे बहुत सारे पैसे मिलेंगे। काम तो मजेदार था पर मेरी इज़्ज़त का भी सवाल था और जब मैंने इस पर पूछा तो उन्होंने कहा की मुझे कोई जरुरत नहीं है इज़्ज़त परवाह करने की क्यूंकि मैं जिन्हे संतुष्ट करने वाला था उनकी भी बहुत इज़्ज़त थी।

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शायद मैं इस चीज को पसंद करने लगा था और नौकरी को मैंने उसी समय हां करदी। उन्होंने मुझे फिर सात दिन का वक़्त दिया और मुझे घर पर बैठे इस जॉब से जुड़े ज्ञान को प्राप्त करने को कहा क्यूंकि कई बार मुझे एक या उससे कही ज्यादा औरतों को संतुष्ट भी करना पड़ सकता था। मैं इन दिनों काफी सोंच में रहा की जो मैं करने जा रहा हु क्या वो सही है।

पर जब मैं अपने घर के हालत को देखता था तब यह बहुत उचित कार्य लगता था क्यूंकि मुझे जो रकम बताई गई थी वो शायद मैं कुछ ही दिनों में अच्छा खासा कमलेता। सात दिन के बाद जब मैं काम पर गया तो वह मेरा स्वागत कीर्ति मैडम ने ही किया। मुझे उनका फिर से इन्तेजार करना पड़ा क्यूंकि वो कही बहार से आरही थी।

समय राते के लगभग दस बज रहे थे और उन्होंने मुझसे आज सिर्फ रियाज के लिया बुलाया था। जब उनकी कार आई तो मैंने उन्हें उस कार मेसे उतारते हुवे देखा और देखा कर एक बार और घायल हो गया। इस बार मैंने अपने मन की बात को मन में नहीं रहने दी और बोल ही दिया की ‘आपको देख कर मेरे तन बदन में आग सी लग जाती है ‘ वो है पड़ी और बोली मुझे बस इसी तरह से सोंचना है।

खुला पन

मैं फिर उनसे और खुल गया और उनके तंग कपड़ो के लिए मैंने उनसे कहा ‘आपके कपडे जैसे खुद ही आपका साथ छोड़ना चाहते है… फिर देर क्यों कर रही है ‘ इस बार वो हसी नहीं बल्कि आगे बढ़ी और अपने तंग गुलाबी कपड़ो को उत्तार दिया। उनका अब नंगा बदन मेरी आँखों के सामने था।

वो बेहद जवान और कसिलए बदन वाली खूबसूरत लड़की थी। मैं उनके करीब गया और जैसे ही उन्हें चूमने की कोसिस की तभी मुझे मेरी बीवी की याद आई और जब उन्होंने मुझसे पूछा तो वो खुद बोली की वो भी अपने पति से अलग होकर मुझे ट्रेनिंग दे रही है।

फिर मैंने खुदको सम्हाला और उनकी जवानी के रास को बेहतरीन तरीके से पिने लगा। ये रियाज़ बेहद सफल रहा और अगले ही दिन से मुझे मैडम कीर्ति ने अलग अलग औरतो के पास भेजना शुरू कर दिया था। किसी दिन तो मुझे तीन औरतो को निपटना पढता था और किसी दिन सिर्फ एक से ही पर पगार जो मिलती थी वो वाकई काफी ज्यादा थी।

मैं अपनी कमाई से बीस टका मैडम कीर्ति को देता था और उसके बावजूद मैंने एक महीने में इतना ज्यादा कम लिया की मेरे सारे कर्ज ही माफ़ होने लगे। ये बेहद मजेदार काम रहा क्यूंकि मैंने लगभग एक साल काम करके मुंबई जैसे शहर में तीन फ्लैट लेलिये थे और इतने ज्यादे पैसे होने के बाद बस मैं आराम किया करता था। अब मैं सिर्फ कुछ चुनिंदा औरतो के लिए ही काम करता था जिससे मुझे काफी ज्यादा रकम मिलती थी।

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