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कुड़ी दिल ले गयी

मुझे जिंदगी में सम्हल कर रहना बेहद अच्छा लगता था और इसी लिए मैंने कभी भी कोई ऐसा काम नहीं किया था जिसके जरिये मुझे बाद में शर्मिंदा होना पड़े। मेरे कई ऐसे दोस्त भी थे जो की कई कुंवारी लड़कियों के पीछे भागा करते थे पर मैंने खुद को बहुत दूर रखा था। ऐसा नहीं है की मेरा मन नहीं करता था किसी लड़की के साथ अपनी नई जवानी का मजा लेने का पर मैं खुद को सम्हाल करके रखा हुवा था अपने किसी खास के लिए जिसके लिए मैं बना था।

वैसे तो मेरे कॉलेज की लडकिया बेहद खूबसूरत थी पर मैंने अपने आप को हमेशा बचा कर रखा रहा। मैं दिखने में शायद अच्छा था जिसके कारण मुझे एक-दो लड़कियों ने दोस्ती करने के लिए कहा भी था पर मैंने उन्हें कभी पूरी तरह से मना भी नहीं किया था। प्रियंका और रिशा मेरे काफी करीब थी और वो दिखने में भी बहुत सुन्दर थी। मेरी ही तरह वो लडको से काम घुल मिला करती थी।

मुझे वो दोनों ही बेहद खूबसूरत लगाती थी पर मैं ही शायद उनके लायक नहीं था। मैं कॉलेज के पास एक रूम लेकर अपने एक दोस्त के साथ रहता था। उसका नाम रवि था। उसे लड़कियों में बेहद दिलचस्पी थी। हर दूसरे दिन वो नयी लड़की के साथ रहता था। मुझे कई बार उसके इस कार्य ने भी आकर्षित किया पर मैं कभी भी अपना संतुलन नहीं खोया।

कई बार मुझे उसके उसकी गर्लफ्रेंड के साथ कमरे पर अकेला छोड़ कर ही बहार जाना पड़ता था। बहार जा कर मैं कई बार ये सोचता था की कमरे के अंदर क्या-क्या हो रहा होगा। मेरा मन धीरे-धीरे आकर्षित होने लगा था। फिर कही मुझे अहसास हुवा की सम्भोग भी एक जीवन की हकीकत है और इसे हम गन्दा समझ कर हकीकत से मुह मोड़ लेते थे।

मेरा बदलाव

मैंने फिर काफी दिनों तक इसके ऊपर रिसर्च किया और पाया की मुझे खुद को रोकना एक तरह से प्राकृतिक चीज को रोकना होगा। इतनी सी बात ने मुझे काफी प्रेरित कर दिया और मैं एक नए अंदाज़ में दिखने लगा।

थोड़े ही दिनों में मैं भी रवि की तरह लड़कियों के साथ रहने लगा था और इस बदलाव को देख कर मेरे करीब के सारे दोस्त बहुत खुश थे।

अब मैंने ये भी पाया की मुझे देख कर कुंवारी लड़कियां भी अपने अंदाज़ को बदलने लगी। प्रियंका मेरे काफी करीब आने लगी पर रिशा अभी तक जैसे अपने आप को और शुरक्षा देना चाहती थी। खैर मेरी नज़र प्रियंका पर ही ज्यादि ख़राब थी सो मुझे अब प्रियंका में ज्यादा दिलचस्पी थी।

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जब प्रियंका ने मुझसे मेरे अंदर आये बदलाव के बारे में पूछा तो मैंने उसे वही समझाया जो समझ कर मैंने अपने आप को बदला। जब प्रियंका ने यह बात सुनी तो वो मेरी बात से अलग विचार नहीं रख सकी क्यूंकि वो भी इसे सही मन रही थी। अब हम दोनों काफी ज्यादा खुल चुके थे और आपस में हमने काफी सारी चीजो पर बात की।

इसी दरम्यान हम दोनों को पता चला कि हम दोनों ही पूरी तरह से कुंवारे है। ये जानकार बड़ी ख़ुशी सी हमारे अंदर महसूस हुवी। शायद हम दोनों एक दूसरे के बारे में एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे थे। एक साम प्रियंका मेरे साथ घूम रही थी और अचानक बाते करते-करते मेरा हाथ उसके स्तन पर पद गया।

मैं सहम सा गया था पर प्रियंका ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। अब ऐसा माहौल होगया था की हम दोनों जब भी मिलते तो ज्यादातर सेक्स के ऊपर ही बाते करते थे। वो खुल कर के मुझे अपने बारे में हर चीज बताती थी और उसके जवाब में मैं भी कुछ वैसा ही करता था। मुझे अब रातों को प्रियंका ही नज़र आने लगी थी।

नया अनुभव

मैं अपने रातों के ख्वाबों में प्रियंका को ही देखने लगा था। कई बार तो मैं ऐसा भी देखता था की मैं उसके साह अवनि का मजा बिना कादो के ले रहा हु। कई दिनों तक मैंने ये अपने विचारो को प्रियंका से छुपा कर रखा पर एक दिन प्रियंका ने खुद कुछ ऐसे ही विचार मुझे लेकर अपने बारे में बताये जो उसे भी रातों को तंग करते थे।

इस बात को लेकर मैं अपने कमरे में अकेले में कई ऐसे पोर्न वीडियो देखा करता था जिसमे कुंवारे लोग पहली बार सेक्स का अनुभव लिया करते थे। काफी दिनों की रिसर्च के बाद मैंने ये मन की शायद मेरे रात्रिकाल के विचारो को प्रियंका के साथ साझा करना चाहिए। मैंने ठीक अगले ही दिन हिम्मत करके जब ये बात बोली तो मैंने पाया की वो भी कुछ वैसा ही सोचती थी।

इसके बाद हम दोनों मेरे कमरे पर गए और वह जा कर मैंने पहली बार जिंदगी में किसी कुंवारी कन्या को नंग अवस्था में देखा। ये बेहद मजेदार अनुभव था क्यूंकि उसके कुंवारे बदन को निहारने के बाद हमने एक दूसरे को काफी सारा प्रेम दिया और यहाँ से हमारी नयी कहानी शुरू हुई। अब हमारे बीच जैसे कुछ बचा ही नहीं था।

जब मेरे और प्रियंका के रिश्ते के बारे में रवि को पता चला तो उसने एक प्लान सुझाया। उसका ये विमर्श था की मैं अपने कमरे पर प्रियंका के साथ रहू और वो प्रियंका के कमरे पर रिशा के साथ रहेगा। जैसे ही मैंने ऐसा सुना तो मैं दांग रह गया। फिर मैंने ये बात प्रियंका से पुछि तो उसने बताया के मेरे बदलाव के विचारो से उसमे भी परिवर्तन आया और उसने भी अपना कुंवारा पन खो दिया।

ये वाकई अद्भुत था पर मेरा मन तो जैसे विचलित ही हो चूका था। मैं हर रोज प्रियंका के साथ मजे करता था पर मेरे मन में ये बात भी थी की किसी तरह से रिशा को भी नंग बदन देखू। मैंने इस पर अपने दोस्त रवि से बात की और उसने तो ऐसा मौका बैठाया जहा पर हम चारो आपस में एक दूसरे को खुश कर रहे थे। पर अब ऐसा लगता है की मेरे दोस्त रवि में ही कुछ ऐसा था जो की उसने लगभग हर खूबसूरत कुंवारी लड़की के साथ रिश्ता बनाने में कामयाबी पायी थी।

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