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चूत और लण्ड का क्लास

पड़ोस की लड़की को चूत और लण्ड का टॉपिक समझाया। मेरे सामने के घर पर एक लड़की रहती है। जो 18 की है और बारहवीं में पढ़ती है। जब भी कभी उसे पढ़ाई में कुछ भी समझ में नहीं आता था तब वो मुझसे पूछने चली आती है। मैं साइन्स बहुत अच्छे से पढ़ाता हूँ। मैं पिछले महीने अपने घर पर बैठा हुआ टीवी देख रहा था। उस वक्त घर पर कोई नहीं था.. बस मैं घर पर अकेला था.. तब वो आई। उसने आज लाल टी-शर्ट और नीचे कैपरी पहन रखी थी। उसे साइन्स में एक टॉपिक समझ में नहीं आ रहा था.. तो वो पूछने आई थी। टॉपिक था कि बच्चा कैसे होता है.. और नर या मादा कैसे बनता है।

मैं उस दिन घर पर अकेला ही था.. तो मैंने सिर्फ़ पजामा पहन रखा था उसके अन्दर कुछ भी नहीं पहना था। मैं सोफे पर बैठा था और वो आकर मेरे बाजू में बैठ गई वो मेरे एकदम करीब आकर बैठी थी। उसके पैर मेरे पैरों से टच हो रहे थे और मेरी कोहनी उसके नाज़ुक छोटे-छोटे समोसों जैसे मम्मों को छू रहे थे। हम दोनों बैठे हुए थे.. मैं उसे टॉपिक समझाने लगा। उसमें एक वर्ड ‘लिंग’ आया.. यह उसे समझ में नहीं आया। उसने पूछा- यह ‘लिंग’ क्या होता है.. मुझे समझ नहीं आया। मैंने उसे बताया कि उसका मतलब नर और मादा का गुप्त अंग.. या पेशाब करने की जगह.. पुरुष का एक लिंग का एक भाग होता है शिश्न.. और स्त्री के 2 गुप भाग होते हैं.. एक योनि और दूसरा स्तन.. उसे ‘स्तन’ वर्ड समझ में नहीं आया, उसने फिर पूछा- ये ‘स्तन’ कौन सा अंग होता है? अब मैं भी कन्फ्यूज़ हो गया.. मैं सोचने लगा कि क्या सचमुच इसे नहीं पता है.. या ऐसे ही ये मुझसे खेल रही है.. मैं सोचने लगा कि अब कैसे समझाऊँ?

फिर मैंने उसे समझाया- जहाँ से बच्चे अपनी माँ का दूध पीते हैं.. उसे स्तन कहते हैं। फिर उसने मुझसे शिश्न के बारे में पूछा, मैंने उसे वो भी समझाया.. और शिश्न से क्या होता है.. वो भी समझाया। जब मैं उसे ये सब समझा रहा था.. तब मैंने अपने पैर में कुछ महसूस किया, वो अपने अंगूठे को मेरे पैर पर घुमा रही थी। चूंकि वो मेरे काफ़ी करीब बैठी थी.. मेरी कोहनी उसके मम्मों के बिल्कुल पास थी। वो थोड़ी-थोड़ी देर में जानबूझ कर मेरी कोहनी से अपने मम्मों को सहलवा रही थी। मेरा भी लंड धीरे-धीरे टाइट हो रहा था मैंने सिर्फ़ पजामा पहन रखा था.. तो उसकी वजह से मेरा लंड का उठा हुआ उभार पजामे के अन्दर से साफ़ दिखाई दे रहा था। उसकी निगाह अब मेरे टाइट लंड पर टिक गई.. वो बार-बार उसे छूने की कोशिश कर रही थी। उसने अपना एक हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया.. फिर धीरे-धीरे वो अपना हाथ मेरे लंड की ओर बढ़ाने लगी। मैं और उत्तेजित होने लगा..

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अब मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था.. उसकी नजरें उसी के ऊपर थीं। आख़िर उससे नहीं रहा गया और लौड़े की तरफ इशारा करके मुझसे पूछने लगी- सर ये आपको क्या हुआ है.. कुछ तकलीफ़ है? मैंने कहा- नहीं.. जब एक नर उत्तेजित होता है तो उसका शिश्न ऐसे टाइट हो जाता है.. और योनि में जाने के लायक हो जाता है। उसने मुझसे पूछा- सर ये टाइट कैसे होता है.. इतनी छोटी चीज़ बड़ी कैसे हो जाती है? तो मैंने कहा- हमारे शिश्न की चमड़ी और नसें फूलने लगती हैं और डंडे की तरह तन जाती हैं। ‘सर मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है.. प्लीज़ आप मुझे एक बार इसे दिखाइए ना.. तभी मुझे समझ आएगा.. मैं इसके बारे में किसी को नहीं बताऊँगी।’ मैंने मना कर दिया और कहा- नहीं.. यह मैं नहीं कर सकता.. तो उसने मेरा लंड एकदम सख्ती से पकड़ लिया और कहा- प्लीज़ सर.. मैं किसी को नहीं कहूँगी.. प्लीज़। उसके लौड़ा पकड़ते ही जैसे मेरे लंड को 440 बोल्ट का झटका लग गया हो..। मैं भी अब आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। मैंने कहा- ठीक है.. पर किसी को बताना मत! तो उसने कहा- ठीक है.. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना पजामा उतार दिया और मेरा तना हुआ लंड उसकी आँखों के सामने था, वो शॉक्ड होकर मेरे लंड को देख रही थी और अपने होंठों को दाँतों से दबा रही थी। फिर थोड़ी देर बाद वो मुझसे बोली- सर क्या मैं इसे छू सकती हूँ?

मैं भी मन में यही चाहता था… मैंने कहा- ठीक है.. उसने मेरे नंगे लंड को अपने नाज़ुक हाथों में ले लिया और आगे-पीछे करने लगी। मेरा भी मन कर रहा था कि उसके मम्मों को दबाऊँ। फिर मैं भी धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी जाँघों पर फेरने लगा.. मेरे ऐसा करते ही वो उत्तेजित होने लगी और जोर से मेरे लंड को दबाने लगी। फिर क्या था.. मैंने भी अपना हाथ उसके मम्मों पर रख दिया और उसके नाज़ुक और छोटे-छोटे मम्मों को मसलने लगा। अब मैंने उससे अपना टी-शर्ट ऊपर करने को कहा.. तो उसने तो अपनी टी-शर्ट ही उतार दिया और अन्दर की ब्रा भी उतार दी। हय.. क्या गोरे-गोरे छोटे-छोटे मम्मे थे.. उसके छोटे-छोटे निप्पल देख कर मेरे तो मुँह में तुरंत ही पानी आ गया। मैं तुरंत ही उसको अपनी और खींच कर उसके निप्पलों को चूसने लगा। मैंने ज्यों ही ज़ोर-ज़ोर से उसके निप्पलों को चूसने लगा.. तो वो मेरे लंड को ज़ोर से पकड़ कर दबाने लगी। करीब आधे घंटे तक मैं उसके मम्मों का रस चूसता रहा। उसके बाद मैंने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया। अब वो मेरा लंड मदहोश होकर चूसने लगी। जैसे चोकोबार आइसक्रीम खा रही हो। मैं भी पागल हो रहा था.. काफ़ी तक वो लौड़े को चूसती रही, मैंने उसे फिर पूरी नंगी कर दिया और उसकी चूत में उंगली घुसेड़ कर उसे चोदने के लिए तैयार करने लगा। िउसकी चूत में से पानी लगातार टपक रहा था।

फिर थोड़ी देर बाद मैं उठ कर कन्डोम ले आया और अपने लंड पर चढ़ा कर उसको चोदने की तैयारी करने लगा। वो अपनी टाँगें फैला कर लेट गई और मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत पर टिका दिया। मैं धीरे-धीरे धक्का देने लगा.. वो दर्द से चिल्लाने लगी.. तो मैंने उसका मुँह बंद कर दिया.. और एक ज़ोर से धक्का उसकी चूत में लगा दिया। इस जबरदस्त झटके से मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया, उसका मुँह खुला का खुला रह गया.. दर्द की वजह से अब खून भी निकलने लगा। वो डर गई.. तो मैंने कहा- ये कोई बड़ी बात नहीं है.. पहली बार ऐसा होता है। उसके बाद मैं उसे चोदने लगा.. अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था.. वो भी उछल-उछल कर चुदवा रही थी। करीब दस मिनट तक मैंने उसकी चुदाई की उसके बाद में झड़ने वाला था.. तो मैंने कन्डोम निकाल दिया और अपना लंड उसके मुँह में लगा दिया। वो भी लपलपा कर लौड़े को चचोरने लगी कुछ ही पलों में मेरा पूरा पानी उसके मुँह में छूट गया। आआअहह… उसकी जवान चूत को चोद कर बहुत मज़ा आया था..। फिर एक हफ्ते तक मैं उसे रोज चोदता रहा.. और एक हफ्ते में ही उसके मम्मे बड़े-बड़े से दिखने लगे। अब वो पूरी औरत बन गई थी। तो इस तरह एक स्टूडेंट की सेक्स की क्लास खत्म हुई.. और उसको ये टॉपिक पूरी तरह से समझ आ चुका था।

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