बहुत दिन बाद मिला आंटी को एक लण्ड 1

हेल्लो मित्रो आज मै फिर से एक नई कहानी लेकर आया हु ये कहानी चाची भतीजे पर आधारित है मस्त चुदाई की कहानी है दोस्तों आराम से धीरे धीरे पढना साथ में लंड जिसके पास है वो अपने लंड पकड़ ले या जो चूत वालिया है वो अपनी चूत में अंगुली या खीरा डाल कर इस कहानी का मज़ा ले …. 
तो दोस्तों कहानी सुरु होती है … “उफफफ्फ़, ओफ… चेतन ज़रा फन तो ऑन करना, बाप रे बाप” कहती हुई मेघाली अपनी भारी भरकम शरीर सोफे के गद्दे पर बिता लेती हैं, उसकी नज़र नीचे अपनीए पसीने से लथपथ सारी और ब्लाउज पर जाती हैं के तभी हॉल में दौड़ था हुआ चेतन आता हैं “अरे आंटी , तुम.. वो अटुअल्ली लाइट गया हुआ हैं” कहता हुआ अपने इपॉड ऑफ करके सोफे के आजू बाजू रखा हुआ ग्रोक्सेरी का समान लेकर सीधे किचन में रख देता हैं.

किचन से बहार निकलते ही चेतन का नज़र अपने आंटी के भीगे हुए सारी और ब्लाउज पर आने लगता हैं और बस उसकी आंटी थे की पसीने का अंदाज़ा लगते ही उसके मन में हलचले होने लगा |
मेघाली : आए राम, यह लाइट को भी अभी जाना था…. उफफफ्फ़ कितनी गर्मी हैं | उसकी कीमती सारी का वो हाल हो गयी थी के अगर निचोरा जाई तो पसीने का समंदर बह पड़े और ब्लाउज के अगल बगल भी भीगी हुई थी,

बाज़ार से इतनी थकी हुई थी की अपनी चौड़ी शरीर को सोफे पर ही रगड़ती गयी और रुआंटील से आंटी के पसीने को पोछने लगी “चेतन, जूस तो कम से कम ला देते”. चेतन दौड़ता हुआ झट से फ्रेश लाइम जूस लेकर आता हैं “वैसे आंटी, इतनी थकी क्यों हो?
मेघाली : (जूस लेती हुई) हम, एक मिनट, पीने तो दे पहले.. हम वो चेतन, बहार गर्मी हो इतनी हैं, और (तेज आवाज़ में) वॉचमन को बताया क्यों नहीं जेनरेटर ऑन करने के लिए???
चेतन : वो… आंटी….कुछ प्राब्लम हो गया था आज
मेघाली : (चेतन को गिलास देती हुई) मैं तो पागल हो जाऊंगी, सच में.. यह मनहूस जेनरेटर और खैर.. मुझे लाता हैं (अपनी गालों के पसीने को छुट्टी हुई) के थोड़ी नहा लेना चाहिए, वो भाई आए तो केहदेना के पहले बर्तन कर ले |
मेघाली अपनी चौड़ी जिस्म को सोफे पर से उठती हुई सीधे अपनी कमरे में जाती हैं और चेतन अपने उमर के बाकी लड़कों के तरह ही अपने आंटी के भादी भादी मटकती हुई कमर और खास करके कमर के नीचे गुब्बारो के सारी में मटकने को देखता गया,

उसके हाथ कुछ ही देर के लिए बेचैन हो गया था के सीधे अपने डंडे को पकड़ ले, उसे यह एहसास ही नहीं था के सिर्फ़ पसीने से ही उसके आंटी जैसी कोई भादी भड़कं औरत नमकीन लग सकती हैं, पर फिर ‘आंटी’ शब्द का ख्याल आया और वो शर्आंटी गया |
वहां दूसरे और अपने कमरे में मेघाली पागलों की तरह अपनी सारी, ब्लाउज, इत्यादि से मुक्त होकर सीधे शवर में घुस पड़ी और फुल बढ़ता में शवर का मजा लेती रही.

शवर के दौरान बार बार उसने आँखें बंद की और उसके दिआंटीग़ में एक ही दृश्या थी, आंटी मार्किट में की गयी एक जवान लड़के का हरकत अपनी गले और कंधों पर हाथ रगड़ती हुई वो उस घारी को याद करने लगी के कैसे उसके चेतन के उमर का एक स्टूडेंट बस में खुले आम अपने आप को उसकी पीठ पर रगड़ने लगा था और कैसे बार बार उसके हाथ उसकी मुलायम कंधे और कमर को छूटा रहा. 
फिर मेघाली ने गले से नीचे हाथों को लेकर सीधे अपने चौड़े चौड़े मोटे स्तनों को पानी के पौच्ार में रगड़ने लगी और वो सारे बदतमीज़ी याद करती हुई अचानक हाथों को अपनी बुर् के आसपास सरकने लगी और जांघों को रागाड़ने लगी. “उसे लड़के का यह हिम्मत…. उसके आंटी तो मेरे ही उमर का होगा…. कम्बख़्त्ट्त्त पर.. जो भी हो” कहकर अपनी बुर् के झाँटो पर हाथ फिरने लगी “अच्छी लगी उम्म्म्मम” अब मेघाली अपनी पूरे बदन पर हाथों को फिरने लगी और खास करके अपनी मोटी गान्ड के गालों पर. उसे यह अच्छी तरह आंटीलूम थी के लोंडो के लिए सबसे आकर्षित चीज़ वो थी उसकी और वो स्टूडेंट भी तो एक जवान लौंडा ही तो था.

शवर का मजा लेती लेती वो उस पल को याद करती रही |
कुछ देर बार अपनी जिस्म पर एक टावल लपेट्टी हुई मेघाली बहार आई और जब उसने अपनी अलआंटीरी खोली तो घुस्स्सा और हैरानी, दोनों होने लगी. हमेशा की तरह उसकी कोई एक पैंटी गायब थी |
मेघाली ने यह सब पहले भी होते देखी थी और उसे आंटीलूम थी के यह हरकत या तो उसके पति का है या तो फिर उसकी….

वीयशाली और उसकी पटा के बीच सेक्स और प्यार, दोनों का रिश्ता बहुत ही मज़बूत थी तो यह लाज़मी थी के यह हरकत चेतन का ही था. यह सोचते ही विशाली की जिस्म काँप उठी “आए भगवान… इसका मतलब्बब…”

और फिर उसके गौर की के जो पैंटी गायब थी वो एक काले रंग की सिल्क वाली थी और शायद उस सिल्क की नरम एहसास से उसका चेतन… “नहीं नहीं… यह नहीं हो सकता…. आख़िर्र्र ऐसा क्की.. नहीं शायद लॉंड्र में दी हैं मैंने, हाँ ऐसा भी तो हो सकता हैं” सोचती हुई वीयशाली फॅट से एक साधारण सारी और ब्लाउज पहनी और जैसे ही सिंदूर लगाने लगी तो आने में चेतन नज़र आया और वो चौुक्ति हुई हाथ में से सिंदूर की डिब्बा गिरा देती हैं,

और घुस्से में पीछे मुड़ती हैं “टत्तततुउुउउ यहां… क्या कर रहा है????”. चेतन के हाथ में मेथ्स का किताब था “वह सॉरी.. वॉ तो मैं बॅस एक सुम्म था, सॉरी आंटी”.
मेघाली : (घुस्से में) तो मेरे पूजा होने तक नहीं रुक सकता क्या??? अगली बार मैं दरवाजा बंद करूँगी, ईडियट!
मेघाली झट से कमरे में से निकल पड़ती हैं और पूजा का सआंटीन हाथ में लिए सोचने लगी ” चेतन वहां कब से खड़ा था?? क्या उसने मुझे… उफ़फ्फ़ मेरा दिआंटीग़ खराब हो चुका हैं और बस में उस लड़के को जी भर के कोसती गयी और पूजा घर में घुस पड़ी. सच तो यह था के चेतन ने चुप के से अपने आंटी को ब्लाउज पहनते हुई भी देख चुका था और इस एहसास को दिआंटीग़ में रखता हुआ वो अपने कमरे में जाता हुआ अपने बिस्तर के ताकते ने नीचे से वही सिल्क की काली पैंटी निकल के, बतूम घुस पड़ा. 
हर रोज़ की तरह वो पैंटी के नर्आंटीहट उसके लंड के कोमल त्वचा पर पड़ते ही, जोरदार तेज खून दौड़ पड़ा और लंड के सुपाडे में से गड़ गड़ नमकीन पानी बहार आने लगा. मेघाली के स्तन कुछ 40 सी के आसपास थी और वो दृश्या याद करता हुआ चेतन पैंटी का आनंद लेता गया.
पूजा में भी कुछ खास मन नहीं लगा पा रही थी मेघाली. बस में की गयी हरकत और चेतन के घूरने से वो काफी परेशान थी. उसे एहसास हो गयी थी के चेतन अब बड़ा, जवान लौंडा हो चुका था. भले ही 19 साल, लेकिन फिर भी एक मर्द एक आस पास. उसे और गुस्सा तब आई जब वही पूजा खरते वक्त भी उसकी सारी और पेटीकोट के अंदर फँसी बुर् में छोटी छोटी खुजली होने लगी और उसके पास कोई चारा नहीं थी इस लिए बस मंत्र पड़ते पड़ते हल्के से अपनी जांघों को आपस में घिस्स लेती थी. जैसे ही पूजा खत्म हुई, उसकी दिआंटीग़ में एक ही बात थी “आज चेतन से कुछ जरूरी बातें करनी हैं मुझे”.
“चेतन!!! चेतन!! यहां आऊ, जल्दी!” मेघाली ने एक आदर्श आंटी का रूप धारण कर ली थी, आँखोन्म ए मोटे चश्मे और चेहरे पर एक सख्त भाव और हाथ में मेथ्स के मनुअल, पर इन सब के अगर कुछ अलग थी वो था उसकी सारी जो उसने अपनी पेट से थोड़ी नीचे पहनी हुई थी जिससे उसकी सुडौल कमर और पेट पर नाभी साफ नज़र आ रही थी. मेघाली ने पहले मनुअल के पन्ने देखे, फिर नजरें नीचे करके अपनी गहरी नाभी देखी और मन ही मन थोड़ी शर्आंटी गयी, पर यह करना जरूरी थी. आख़िर चेतन से बात जो करनी थी उसे.
चेतन अपने मेथ्स के किताब और नोटबुक लेकर भीगी बिल्ली की तरह आने लगा अपने आंटी के पास और सामने खड़ा होते ही उसकी नज़र नीचे की तरफ अपने आंटी के गहरी नाभी पर गयी. नाभी के दरार में से कुछ बूँदें झलक रही थी और चेतन के लंड में हलचल होने लगी, शुक्र था के कक्चा काफी मज़बूत था शॉर्ट्स के अंदर.

मेघाली भी एक पोज़ देकर खड़ी थी, जैसे आंटी कोई सख्त टीचर हो, पर उसकी इस पोज़ में उसकी नाभी और उभर के दिख रही थी और चेतन नजरें हटा नहीं पा रहा था के तभी “बर्कुधर, ज़रा ऊपर भी तो देखिए” और चेतन चौुक्ता हुआ आंटी के चेहरे को देखने लगा “ओह सोर सोर्रर्र सोररय्ी आंटी”.
मेघाली सोफे पर अपनी चौड़ी गान्ड बिता लेती हैं और चश्मे को एडजस्ट करती हैं और चेतन के हाथों में से नोटबुक लेती हैं “हम, एम्म्म.. नहीं नहीं… गलत है चेतन, तुम कब सुधरोगे!!!!” कहती हुई चेतन को देखती रहती है जो खड़ा का खड़ा ही था. चेतन टेन्स होकर अपने बालों को खुजाने लगता हैं और बार बार चुपके से नाभी को देखने लगा जो बैठने के कारण और आंटीज़ में दब चुकी थी और फिर मेघाली ने चुटकी बजाई “अब बताओगे भी, कौन सा सवाल???”.

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चेतन ने किताब दी और वीयशाली किताब हाथ में लेती हुई सवाल को देखने लगी और एक उबासी लेती हुई किताब को अपनी गोद में रख दी “बैठ जाओ, कुछ बातें करनी थी तुमसे”. चेतन सर को झुकाया हुआ फॅट से अपने आंटी के विपरीत सोफे पर बैठ जाता हैं और आंटी चेतन एक दूसरे के रूबरू होते हैं. मेघाली अपनी मोटी जाँघ पर एक जाँघ रखकर बैठ पड़ती हैं जिससे सारी थोड़ी पैरों से ऊपर होती हैं, पर उसने परवाह नहीं की और चेतन को देखने लगी. 
सवाल जवाब तो बाद में, उसे तो पहले यह देखी थी के चेतन वाकई में कितना गबरू मर्द बन गया था और सच तो यह था के वो तो अपने पितः का ही रूप लेकर आया था, इन सब बातों से और क्रोधित होती गयी मेघाली और वापस चश्मे को एडजस्ट करती हुई अपनी हाथों को आपस में मलने लगी “देखो चेतन, मैं आंटी हूँ तुम्हारी, कुछ बातें बहुत जरूरी हैं”.
चेतन : आंटी, वो सवाल दरअसल… मैंने बहुत कोषिश्ह.. पर वॉ..
मेघाली : खैर सवाल चोदा…. मुझे एक और विषय को लेकर चिंतित हूँ.
चेतन हैरानी से आंटी को देखने लगा…. और चेहरे पर पसीना जआंटी होने लगा. मेघाली अनजाने में बार बार अपनी मुलायम हाथों के नाखूनओ को अपनी पेट के आंटीज़ पर फिरने लगी “देखो चेतन, मुझसे कुछ मत छुपाना, प्लीज़” और सोफे में से उठती हुई चेतन के करीब खड़ी हो गयी, कुछ ऐसा के उसकी नाभी सीधे चेतन के आँखों के सामने आ गये.
मेघाली कुछ ऐसे खड़ी हो गयी के उसकी नाभी बिलकुल चेतन के नजरों के सामने थी और चेतन के धड़कन तेज होने लगा, उसके जी में आया के झट से अपने आंटी के मोटे कमर को अपने हाथों के जलद में लेले, पर उसे यह भी समझ में नहीं आ रहा था के आख़िर क्यों उसके आंटी ने सारी इतनी नीचे पहनी हुई थी. 
मेघाली कुछ देर बस शांत रहके अपने चेतन के आँखों को घूरती गयी और बड़ी रुबब के साथ अपनी नाभी प्रशरहित करती गयी, उसके मन में अब हर वो पल घूमने लगी जब उसके पति उसके नाभी पर जीभ फिरता था और फिर नाभी के नीचे एक लंबी सान लेती हुई मेघाली अब यहां से वहां घूमने लगी और फिर से चेतन के पास आकर रुक गयी

“देखो चेतन, तुम अब बारे हो रहे हो और यह बातें बहुत जरूरी हैं, तुम… तुम समझ रहे हो ना????”. मेघाली चिंतित थी पर अंदर खुजली भी बहुत थी और वो अपनी चेतन के बालों पर उंगलियाँ फिरने लगी “तुम्हारे सूंस सही नहीं हो रहे है चेतन,

कॉलेज से भी कमज़ोर रिपोर्ट आ रही हैं, आख़िर प्राब्लम क्या है??” बालों पर हाथ फिरनी हुई मेघाली अब सीधे चेतन के गर्दन के पीछे हाथों को लाने लगी, आंटी जैसे अपनी नाभी पर उसके मुंह को धकेल ना चाहती हो.
चेतन कुछ बोलना चाहा पर उसके होठों से निकला हर साँस सीधे उसके आंटी के खुले नाभी पर आने लगा और मेघाली की धड़कन तेज होने लगी. चेतन फिर कुछ धीमे धीमे शब्द बाहार लाअनए लगा और फिर नाभी पर गरम साँसों का असर हुआ और इस बार विशाली थोड़ी सी दूर खड़ी हो जाती हैं तो चेतन के आंटीसवाल चेहरा दिख गयी उसको.
चेतन : VVओह्ह आंटी….. दरअसलल्ल्ल…. आंटी… मुझे पढ़ाई में मन…. मन नहीं लगताअ हाीइ..
मेघाली : क्यों चेतन???
चेतन बार बार अपने आँखें बंद करता तो उसके आंटी के पैंटी, आंटी के ब्रा और ब्लाउज बदलने का दृश्या बार बार आने लगा और उसके लंड पर सुरसुरी होना शुरू हो गया “वॉ आंटी…” फिर से नज़र नाभी पर. “हाँ चेतन, वो क्या????” मेघाली को उसके चेतन से सुन्नी थी, उसे यह जानी थी के आख़िर चेतन के मन में क्या चल रहा था. चेतन भी काफी शैतान था, उसने बात को घूमने के लिए कुछ अलग ही कहानी बनाई “आंटी… वो डर्सल कॉलेज में.. वॉ आक्च्युयली…मंदिरा आंटीम्म…”
“मंदिरा आंटीअंम???? उसके केमिस्ट्री टीचर??” सोचने लगी मेघाली और फिर चेतन के तरफ देखने लगी “क्या हुआ…???? कुछ कहा क्या उसने तुझे???? बताओ मुझे चेतन!!. मेघाली अपनी पल्लू के आखिरी हिस्से को जकड़ती हुई थी और खेल रही थी कपड़े के साथ और चेहरे में तेज भाव थी.
चेतन में थोड़ा नमक मिर्च लगा ने का सोचा “वो आंटी…. आज क्लास के,…… आज क्लास के बाद मंदिरा आंटीँ ने मुझे उनके क्वार्टर में बुलाई थी और…..” फिर सर नीचे कर लेता हैं. मेघाली क्रोधित होने लगी, उसके दिआंटीक़ में बहुत कुछ चल रही थी, मंदिरा उसकी एक अच्छी दोस्त भी थी और काफी शरीफ औरत थी. “और फिर क्या हुआ???? अरे खुल के क्यों नहीं बताता????
चेतन के लंड ऊपर होने लगा था और “वो आंटीँ…. आंटी, वो बहुत गंदी औरत है…….. वो तो मेरे साथ फ़्लर्ट करने लगी!!!” कहता हुआ चुपके से अपने आंटी को देखने लगा और कुछ ही पलों में मेघाली पसीने से नहाने लगी. 
पावर फैल्िुरे और सिचुयेशन दोनों के दबाव से मेघाली फिर से पसीने में लथपथ होने लगी और उसे फिर बस में की गयी हरकत याद आने लगी. “हें राम… क्या यह वैसा भी हो सकता है…. लगता है हम दोनों इस आंटीमल्ले में बराबर शिकार हुए हैं” सोचती हुई चेतन के तरफ देखने लगी और एक हाथ को उसके गाल पर फिरने लगी “कककक क्क्या कह रहा है तू चेतन?? मुझे तो समझ में ही नहीं आ रही हैं, मंदिरा आंटीँ ने क्या कहा तुझसे??
चेतन बनावटी चिंतित स्वर में बोल पड़ा “आंटी, वो तो मुझसे अश्लील हरकतें करने को कह रही थी….आंटी… मैं तो शर्मा गया गया”| मेघाली बहुत क्रोधित थी “अकक्षा कहीं की, इतनी भोली सूरत लेकर घूमती है और स्टाफ रूम में यह सब्बब… ओह गोद”. मेघाली ने कुछ और सोची और फिर चेतन के बालों को चोर दी “चेतन, क्या . की क्या तूने कुछ किया???? 
पूछते ही उसकी साँसें तेज हो गयी और चेतन ने नजरें नीचे की तो देखी के नाभी में कुछ पसीना जम चुकी थी और सुडौल पेट चमक ने लगी थी. भारी दोपहर में गर्मी भी ड़ थी गयी और सारी पतली होने के बावजूट भी मेघाली गर्मी के आंटीरे पागल हो रही थी, दुआ कर रही थी के पावर जल्दी आ जाए और तभी चेतन झट से अपने आंटी के कमर के चारों और हाथ फैलता हुआ उसके भीगे पेट पर अपना भीगा हुआ चेहरा दबा लेता हैं 
“आंटी…. मुझे… मुझे तो इन टीचर्स से ही डर… डर लगता हाईईईई”. मेघाली आंटी और वासना के बीच तैयार रही थी, एक तो दोनों आंटी चेतन पसीने में लथपथ और फिर इस तरह चेतन का चेहरा उसके पेट के ऊपर दब जाना, अनजाने में उसकी हाथ अपने चेतन के सर को और अंदर दबा देती हैं “श चेतन…. हे राम तेरे कॉलेज में यह सब होता हैं…. “
एक तो चेतन का चेहरा अपने आंटी के मुलायम आंटी पेट के पसीने भरे आंटीज़ में दब चुका था और मेघाली भी चेतन के चेहरे को दबाई रखी “पर चेतन…. ज़्ज़ा.. ज़रा खुल के बोल, उन्होंने क्या किया तेरे साथ???”. चेतन अब चेहरे को थोड़ा आंटीज़ में से मुक्त करता हुआ बोल पड़ा ” आंटी, वो औरत इतनी गंदी हाीइ…. वो तो रिपोर्ट देखने के बहाने… मेरे शरीर पर हाथ लगाने लगी!!!!!”. 
मेघाली के पसीने तरफ गयी और जिस्म लाल होने लगी और आँखें बंद की तो उसके चेतन और उसके टीचर के दृश्या आंखों में आने लगी और उसीकि पहले से ही फू;ई हुई बुर् में से ताप ताप रस बहने लगी. फिर उसने स्कोा के नइकज़िल के साथ कुछ वैसा ही हुआ जैसे उसके साथ बस में हुई थी.

पर ताज्जुब की बात यह थी के जब उसने मंदिरा के बारे में सोची तो उसे जलन से होने लगी “ब्बीता, शरीर के क्कों से हिस्से पर्र्र्ररर???, तू खुल के क्यों नहीं बताता ???”. मेघाली की साँस बहुत तेज हो चुकी थी और बार बार आंटी में से पसीना आती रही.
चेतन भी पसीने में पटपट होने लगा “वो आंटी….. उन्होंने… मेरे म्म्म्मे रे जाँघ पर हाथ रख दी त्ीईिइ”. यह सुनते ही मेघाली की बुर् में से एक गहरा बंद निकल पड़ी और बुर् के अंदर ही अंदर खुजली होना शुरू हो चुकी थी, कुछ वैसा जैसे उसके पति के और उसके दरमियान होती थी, पर यह सिचुयेशन तो अलग थी और फिर भी उसे ऐसा क्यों महसूस हो रही थी. मेघाली बहुत बहुत घुस्से में थी “जाअँघह पार?????? मतल्लब्ब्ब्बब??..

मैं अभी प्रिन्सिपल को रिपोर्ट करती हूँ!!! आए बहगवान, और तुऊउ, फिर तूने क्क्या किया????” मेघाली को और जानी थी, उसे सब कुछ सुन्नी थी चेतन के मुंह से, क्योंकि उसने भी वैसा ही महसूस की थी जब उस कॉलेज के छोकरे ने उसकी गान्ड पर अपने आप को घिसा था बस के बीड़ में, और सच तो यह थी के उसे बहुत अच्छी लगी थी,

तो जाहिर थी के मंदिरा को भी अच्छी लगी थी यह सब. उसने अपनी चेतन के सर को पकड़ के रखी और इस बार चेतन अपने आंटी के कमर को हाथों के दबोचने लगा जिससे मेघाली थोड़ी सिसक उठी और और भी सीधी खड़ी हो गयी “बब्बेतता…. यईः सब्बब बातें नॉर्मल हाईईइ.. यह” उसके मन में उस लोंडे का मोटापे का एहसास घूमने लगी “यह नॉर्मल बातें हैं पर चेतन, पदाइइ मैं मन लगाओ!!!”.
चेतन और काश के अब आंटी के कमर को जकड़ लेता हैं “आंटी, यह टीचर्स बहुत गंदे हैं!!!!! आप ही मुझे आज से पदाओ!!!!” कहकर कमर के आंटीज़ को हल्के से मसल लेता हैं तो मेघाली अपने आप ही थोड़ी आगे सरक जाती है जिससे चेतन का चेहरा और नाभी में दब जाता हैं.

मेघाली : अफ चेतन….. अब चोदा भी यह सब,,, देखो… जो हुआ सो हुआ पर अब तो मुझे जाने दूओ वरना….
चेतन नाभी में से चेहरा ऊपर कर लेता हैं “वरना क्या आंटी???? आंटी मुझे आपके जरूरत है, स्टाफ रूम में मैं खुद को बड़ी मुश्किल से कबुउउउ रखा था..
मेघाली अब घुस्से में अपने चेतन के गाल पर एक खींच के चमत आंटीदता हैं “बदतमीेज़्ज़… इसका मतलब भी क्या हुआ??????, मुझे तो लगता है के इसमें तुम्हारे ही कुछ शरारत है, चेतन! वो औरत तुम्हारी आंटी का उमर की है!! च्ीईीईई, तुम ऐसे कैसे” उसकी होठों से मुश्किल से शब्द निकल रही थी क्योंकि उसकी बुर् काफी गीली हो चुकी थी,

सच तो यह भी थी के वो बस का लौंडा भी तो चेतन के उमर का ही था और फिर भी पूरे हिम्मत के साथ भादी बस में ही उसकी रस निकल दिया था और अब तो उसे मंदिरा से जलन भी होने लगी पर खुद में काबू रखती हुई अपनी चेतन से दूर हाथ गयी और यहां से वहां चलने लगी.
चेतन का लौंडा टन चुका था शॉर्ट के अंदर और उसके जीभ में पानी आ चुका था, बस एक बार उसके जीभ को उस नाभी का स्पर्श मिले तो बॅस…..

चेतन सीधे सोफे में से उठ के अपने आंटी के पीछे खड़ा हो गया और पीछे से झप्पी देने लगा “आंटी, तुम इसे नॉर्मल कैसे कह सकती हो??? मुझे बहुत शर्म आया था उस वक्त…” कहता हुआ अपने उभरे लंड को सारी में भारी गान्ड पर घिसने लगा. यह एहसास मेघाली को वापस उस बस के घटना में लेकर गयी जब वो लौंडा बिलकुल ऐसा ही कुछ कर रहा था उसके साथ.

अनजाने में वो थोड़ी पीछे सरकने लगी जिससे गान्ड चेतन के पाँत पर और दब गयी और दोनों आंटी चेतन खामोश. दोनों के आँखों में वासना और मेघाली की पैंटी तो पहले से ही गीली हो चुकी थी “ब्चेतन.. यह नॉर्आंटील्ल है… कक्यूंकीईइ….
चेतन : क्योंकि क्या आंटी?? (और आगे दबाता हुआ)
मेघाली अब पीछे मूंड़ गयी और चेतन के आमना सामना हो गयी “क्योंकि चेतन, मैंने भी ऐसा कुछ अनुभव किया आज”. मेघाली को बहुत शर्म आने लगी पर चेतन में उसने एक मर्द का अनुभव की आज.
“क्या मलब आंटी?” चेतन कुछ आश्चर्य में था और आंटी के आँखों में आँखें डाल के उसे देख था गया. मेघाली मन ही मन कहने लगी “चेतन, तुझे कैसे बताऊं के आज आंटीर्केट से आते वक्त बस में मेरे साथ क्या हुआ….” और फिर आँखों में आँखें डाले बस इतना ही बोल पड़ी “एमेम-म्मेरा मतलब यह था के ऐसा थोड़े बहुत चीज़ें नॉर्मल हैं स्कूल्स में,

पर चेतन तू इन सब से दूर रहा कर और पढ़ाई में ध्यान दे”. वैसा;ई की पूरी बदन अब पसीने में इतनी लथपथ हो चुकी थी के आंटी पावर फेल्यूर को मन ही मन कोस रही हो और अब उस सारी से कुछ पतली पहनना उसके लिए मुश्किल थी.
नजरें थोड़ी नीचे की तो उसकी चेतन भी काफी पसीने में लथपथ था और उसका टी-शर्ट तो आंटी पूरा भीग ही गया हो. “खैर…. चेतन, मैं मनुअल से एक सवाल देता हूँ… तुम.. तुम वो कर लेना अभी” बोलती हुई भी नजरें उसके भीगे टी-शर्ट पर चिपकी हुई थी और किताब में से एक सवाल चेतन को देती हुई अचानक खुद से बोल पड़ी “उःम्म पर फिलहाल इस शर्ट से मुक्त हो जा, देख कितना भीग चुका है पसीने से, अभी दे दे मुझे”. चेतन आश्चर्य और उत्तेजना में अपना शर्ट उतार दिया और ऊपर से पूरा का पूरा नंगा होकर आंटी को देखनके लगा और फिर उसका गठीला छाती मेघाली के आँखों के सामने.
मेघाली की साँसें कम होने के बदले और ज्यादा तेज हो गयी, एक तो उसकी चेतन का नंगा छाती और ऊपर से उसके शरीर में से ताजा ताजा पसीने का गंध उसके नाक ठाक आने लगी और वो धीरे धीरे पागल होने लगी, अपनी कांपती हुई हाथ आगे की तो चेतन उसके हाथ में अपना गंदा टी-शर्ट देने लगा और आंटी को ही देखता गया.
मेघाली टी-शर्ट को लेती हुई सीधे वॉशर में फेंक दी और वापस चेतन के आमने सामने आ खड़ी हो गयी, पर इससे क्या होने वाली थी, पसीने में तो वो भी लथपथ थी पर अपनी चेतन की तरफ वो अपनी वस्त्रो से आज़ाद थोड़ी ना हो सकती थी, इस सोच से उसे अचानक बहुत उत्तेजना होने लगी, उसकी तो मन ही के सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में ही अपने चेतन को वो सवाल कराए, पर ऐसे में थोड़ी ना वो आंटी दिखती…. वो तो कुछ और ही दिखती. 
मेघाली सोच में थी के चेतन ने उसके कंधे पर एक हाथ रख दी और वो चौक पड़ी “आस श उःम्म तू बैठ और वो सवाल कर, पढ़ाई में ध्यान दे चेतन” कहकर चेतन को फिर देखने लगी. पूरे यौवन से भरा यह लड़का आज बिलकुल उसके पिता के तरह दिख रहा था. मेघाली का दिल सफेद पर गया, वो उसकी आंटी थी…. हाँ आंटी!.
चेतन एक मॉडल के पोज़ देता हुआ हाथ में बुक लेता हुआ वही खड़ा खड़ा सवाल को देखता गया और उसे खड़े देखकर मेघाली कमज़ोर हो रही थी और फिर उसे अपनी नाभी पर उसके चेहरा का दबाव याद आई. बस के हरकत से पहले से ही गरम हुई यह आंटी और भी गरम होना चाहती थी, नहीं…. बहुत ज्यादा गरम होना चाहती थी…… “तू बैठ क्यों नहीं जाता, ऐसे थोड़ी ना पढ़ाई होगी! जा बैठ और नॉर्मल तरीके से सॉल्व कर!”.

आंटी के सख्त आदेश से चेतन फिर सोफे पर पेट गया और फिर से पसीने भरे सारी ब्लाउज में लथपथ मेघाली अपनी चेतन के चेहरे के सामने वही गहरी भीगी नाभी लेकर आई. उसके दिल और धड़कान से एक ही शब्द आई के बस एक बार उस मेथ्स के प्राब्लम को चोर के उसका चेतन अपना चेहरा ऊपर करके बस एक बार के लिए वो गहरी नाभी पर अपना नाक घुसेड़ दे तो कैसा होगा.

मेघाली यह सब सोचकर ही पागल हो रही थी और वो चेतन के सामने खड़ी खड़ी अपनी पैंटी थोड़ी और भिगो ने लगी.
सवाल बहुत हार्ड था और चेतन पूछने के लिए जैसे ही चेहरा ऊपर उठाया बस वैसे ही नाभी दर्शन फिर से हो पड़ी और खुद तो नंगा बदन था ही… ऐसे गर्मी में उसे सवाल के अलावा सब कुछ सूझ रहा था. सामने खड़ी थी उसके आंटी… और उसकी शरीर के पसीने का गंध उसके गंध के साथ मिलने लगा था. 
हॉल में गर्मी बार चुकी थी और आंटी चेतन मुश्किल से साँस ले रहे थे, चेतन इतना पसीने से लथपथ था के उसने अपने आप ही आंटी के पल्लू उठाए अपना आंटीता पोछने लगा और मेघाली उसे देखती गयी. अब कुछ दर्ध बाद मेघाली थोड़ी यहां वहां छलके वापस चेतन के सामने खड़ी हो गयी और इस बार उसने अपना चेहरा सवाल से ऊपर किया तो सामने थी पूरे भीगी हुई चमकती हुई गोल सुडौल पेट और नाभी में से भी आंटी बंद टपक रही हो.
चेतन का मन किया के वो नाभी से एक एक पसीना चाट जाए के तभी उसकी बालों पर आंटी के हाथ आ गये “देखो चेतन, यह सवाल अगर तुमने सही सॉल्व किया तो शायद कुछ मीठा मिले तुम्हें वरना आंटीर भी पर सकता हैं” कहकर बालों पर हाथ फिरने लगी. “मीठा” तो बस उसके लिए एक ही चीज़ हो सकता था और वो था उसके आँखों के सामने का चीज़… और आंटी के बातों से उसके लंड पर इतना असर क्यों होने लगा भला..

और तो और मीठे से क्या मतलब था, यह सोच सोच के ही उसके खुजली इतनी तरफ गयी के उसने अब पहली बार एक सवाल को बहुत जी खोल के सॉल्व करने में जुट गया और मेघाली फिर यहां वहां मंडराने लगी. वो एक आदर्श आंटी थी,

उसने तैयार किया के अगर सवाल सही हुआ तो वो कैसे भी हो आज अपने चेतन को कुछ मीठा देकर ही रहेगी और फिर “आंटी…. हो गया!”.
मेघाली ने काँपते हुए हाथ से कॉपी उसके हाथ से लिया और जैसे ही सवाल को देखा तो हैरान रही गयी, सवाल बिलकुल सही था. मेघाली की बुर् में से आँसू बहने लगे, खुशी के. “गुड, शाबाश चेतन…. यह हुई ना बात, पर देख… यह सवाल तूने खुद से ठीक किया, वेरी गुड!” कहती हुई अब वापस चेतन के गर्दन को पीछे से जकड़ ली और चेतन के लिए पूरा पिक्चर क्लीयर था.

बिना कुछ और बोले, वो फिर से आंटी के कमर को जकड़ता हुआ उसके नाभी में अपना चेहरा घुसेड़ देता हैं और मेघाली उसके सर को और नज़दीक धकेता हुआ आँखें बंद कर लेता हैं “उःम्म्म्मममम उहह ब्चेतन, तू इतना समझदार है तो पहले सूंस सही क्यों नहीं किए उःम्म्म्म”.
चेतन : (पेट में चेहरा घुसा हुआ, थोड़ा साँस के लिए बहार निकलता हैं) एमेम वो आंटी… तुम ने आज मीठे के बात की तूहह
मेघाली ने चेतन के सर को और काश के जकड़ लिया “आस मेरा चेतन, चेतन… मैं आंटी हूँ, मीठा तुझे खिलाऊंगी चेतन…. पर पहले चेतन….तू वादा कर तू… तू हर कोई सवाल ऐसे ही सॉल्व करेगा, अंकल के तरह बनना है ना चेतन???” उसके नाभी के गोल पर कोई जीभ की सख्त सख्त जरूरत थी और उसके मन में से एक चीख आने लगी “क्कक्या कर रहा है चेतन….. अब तो जीभ घुसेड़ दे!!!!”.
यूँ तो मेघाली ने मन ही मन कही थी पर उसकी मन की सारे शब्द आंटी चेतन के धड़कन ने सुन ली हो और वो पूरे हिम्मत के साथ जीभ थोड़ा निकलता हुआ हकले से पेट के एक हिस्से के पसीने को छूने लगा और सिर्फ़ इस थोड़ी सी स्पर्श से मेघाली चौक उठी और आँखें बंद कर ली, अनजाने में वो तो अपनी जांघों को भी घीस ने लगी थी,

कमबख्त उन मोटे मोटे आंटीज़ में पसीना और रस दोनों छिपकने जो लगी थी. चेतन अब थोड़ा और हिम्मत करता हुआ पेट के आजू बाजू चाट ने लगा. “चाट रहा है!!! मेरा चेतन मेरा गोल घूमत पेट चाट रहा है,
रर्र्फफफफफफफफफ्फ़….. मैं क्या बोलू उसे…… आस उफ़फ्फ़ क्या एहसाआस्स है” मन ही मन मेघाली खुशी से पागल होने लगी, आंटी कोई पसीने को पेट में से साफ कर रहा हो. चेतन हवस में पागल हो चुका था, उसने चाटना बंद नहीं किया और पीछे उसके हाथ अब कमर को ऐसे काश के पकड़ा हो जैसे आंटी कोई तकिया हो.
कुछ डेढ़ बाद चाटने के बाद चेतन ने काफी हद तक पेट को पसीने से सा कर लिया था और फिर ऊपर आंटी के तरफ देखने लगा. मेघाली ने उसे सोफे में से उठाए अपने सीने में भर दिया “मेरा चेतन…… मेरा लाडला!!!!

बोल चेतन…. मीठा कैसा लगा???” और उसके आँखों में आँखें डालने लगी. चेतन ने अपने आंटी को काश के पकड़ लिया हो, आंटी जैसे उसका आशिक हो, चेतन नहीं.

उसके इस पकड़ से मेघाली हैरान रही गयी और उसकी बुर् में से गड़ गड़ रस और ज्यादा बहने लगी. चेतन ने एक मर्द के हैसियत से उसे देखने लगा और फिर बोल पड़ा और फिर बोल पड़ा “आंटी, मुझे और सवाल दो आंटी….. पर वादा करो के मुझे और ज्यादा मीठा डोगी!!!! दो आंटी, मुझे सवाल दो…. मुझे ट्रोफी या कोई और इनाम नहीं चाहिए, बस मीठा चाहिए, तुमसे आंटी!”.
मेघाली ममता और वासना, दोनों महसूस करने लगी थी. यह एक चेतन के आवाज़ थी या कोई मर्द का उपदेश, उसे समझ में नहीं आ रही थी पर उसे अपने चेतन से अवाल पोइसीटिओन हासिल करवानी थी और इस के लिए उसे थोड़ा काबू में करना जरूरी थी. उसने अपने चेतन के बालों पर हाथ फिरती हुई बोल पड़ी

“हाँ चेतन….. जरूर दूँगी, ऐसे ही सॉल्व करना हर सवाल को….. और ज्यादा प्यार दूँगी”. दोनों आंटी चेतन के साँस तेज हो गये के चेतन के छाती और मेघाली के मोटे मोटे स्तन एक ही सुर में ऊपर नीचे हो रहे थे. “चेतन.. मैं… मैं जाओ… वो किचन में क्कुच्छ सीसी काम” मेघाली बोल नहीं पा रही थी,

उसके कंधों को काश के जकड़ा हुआ था उसके चेतन के हाथ और उसके आँखों में था भूख. “आंटी, इस मीठे के बदले, मैं भी कुछ दूँगा तुम्हें” कहकर चेतन अपने पसीने में भीगे होठों से आंटी के एक गाल को बहुत लंबे अर्से तक चूमने लगा और फिर वैसे ही दूसरे गाल को भी. 
छुंभन सिर्फ़ गाल में पड़ी थी पर मेघाली की होंठ भी काँप रहे थे… “त्तहांककस्स बबबीत्टता… आब्ब्ब जाओ…”. चेतन अपने किताबें लेकर अपने कमरे के और चल पड़ा और मेघाली अपनी मोटी गान्ड मटकाई हुई किचन जाने लगी, बार्टन धोती हुई उसे याद आई के बातों बातों में उसने तो अपनी पैंटी के बारे में पूछ ना ही भूल गयी थी.
अपने बिस्तर में गिरते ही चेतन अपने फोन में एक शकीला का वीडियो प्ले करने लगा जहां हीरो उसकी मोटी नाभी को चूमता हुआ उसको बिस्तर पर ले जाकर उसको प्यार जताता रहा. क्योंकि उसका आंटी का जिस्म हीरोइन से काफी मिलती जुलती थी… उस वीडियो में आंटी जैसे वो अपने आंटी को ही देख रहा हो. 
वो सीधे अपने शॉर्ट्स के अंदर पसीने में भीगे लंड के सुपाडे को मसलने लगा और उसके नरम चमरी को ऊपर नीचे करता गया. उसे जब एहसास हुआ के उसके आंटी ने उससे क्या करवाया तो वो पागल होने लगा और उसके जी में तो आया के ऐसे ही पढ़ाई में और ज्यादा मन दे. जिंदगी में पहले बार रिवॉर्ड मिलने के खुशी प्राप्त हुआ था उसे |
कहानी जारी है … दोस्तों अगले भाग में |

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