बहुत दिन बाद मिला आंटी को एक लण्ड 2

अगर किसी ने कहानी का पहला भाग नही पढ़ा तो ओढ़ ले।
दूसरे और मेघाली एक के बाद एक बरटान को धोती गयी और चेतन के साथ बिताए हर एक लम्हा उसे याद आने लगी, अब तो कोई शक की गुंजाइश ही नहीं थी के उसकी पैंटी उसके पास ही थी और फिर उसने हल्के से एक हाथ को अपनी एक स्तन पर रखकर दबन लग गयी और आँखें बंद की तो अपनी दाँतों ताले होठों को भी दबाने लग गयी. उसने पहली बार अपनी चेतन को इतने रूचि के साथ एक सवाल को सॉल्व करते देखी थी और हाँ नतीजा भी तो मीठा ही मिला उसे. 
मेघाली अब सोचती गयी के ऐसे ही मीठे मीठे तॉहफो से वो चेतन का भविष्य उजवाल करेगी, पर सवाल यह था के कब तक? उफ्फ़ यह गर्मी जैसे ही शाम का वक्त हो गया, चेतन खेलने के लिए बहार चला जाता हैं और इस दौरान मेघाली को मौके की इंतजार नहीं करनी पड़ी. वो सीधी चेतन के कमरे में घुस पड़ती हैं और अलआंटीरीः में से कुछ गंदी किताबें और दी अभी दी के सांखा देखकर वो हैरान नहीं थी, आख़िर यह सब तो नॉर्मल बातें थी,

वो बार बार घुस्से को काबू में करके खुद को बोलती रही और फिर उसकी नज़र बिस्तर पर पड़ी और गद्दी को ऊपर नीचे करने लगी और फिर जब गद्दे को ही सरकने लगी तो उसकी आँखें लाल होचुकी थी. 
वही गद्दे में दबी हुई थी उसकी वही खोई हुई काली सिल्क की पैंटी और पैंटी के एक हिस्से पर उसकी हाथ लगते ही उसे कुछ चिपचिपाहट महसूस हुई. उसे कुछ और नहीं सूझी और पैंटी के उस हिस्से को नाक तक लाई. गंध जानी पहचानी थी और उसने बिना कुछ सोचे अपनी नाक के आस पास पैंटी को घूमने लगी.
हाँ तो पैंटी चोर पकड़ा गया था और वो कोई और नहीं, चेतन ही था! उसका अपना चेतन, लेकिन मेघाली की आँखों में चमक थी और अपनी होंठ को डाट में दबाती हुई वो सोचने लगी के कैसे और भी कठिन से कठिन सवाल उससे करवाया जाए क्योंकि फल और भी मीठे होने के बहुत चान्सस थे. उसने पैंटी को वैसे ही गद्दे के नीचे रख दी और कमरे में मटकती हुई निकल पड़ी और सीधे अपनी कमरे में अपनी आने के सामने जाकर खड़ी हो गयी. 
आने में थी एक बहुत कसी हुई चौड़ी शरीर की एक 50 उआंटीर की एक औरत. यूँ तो सारी और ब्लाउज में लिपटी हुई थी पर बदन आंटी किसी स्पर्श के लिए तड़प रही हो. शादी के 23 साल में आज पहली बार पति के होने के बावजुट भी उसे कुछ अंजान मर्द के स्पर्श के जरूरत परने लगी और इस एहसास का कसूरवार था वो एक अंजान कॉलेज का लड़का. 
मेघाली खुद को उस भीड़ बस में चरने के लिए कोसती रही पर फिर उस लड़के का लंड का स्पर्श अपनी गान्ड पर और तो और चेतन के जीभ का स्पर्श अपनी पेट पर. आने में खुद को देखती हुई मेघाली ने झट से अपनी पल्लू सरका दी और अपनी ब्लाउज में फँसी स्तनों को घूरती गयी.
मेघाली अपनी दोनों हाथों से अपनी स्तनों का मोटापे का जाँच करती रही और ‘उःम्म्म्म उर्फफ्फ़’ की सिसकी निकलती हुई खुद को आने में देखती गयी. उसकी बदन के भारी भड़कं क्वालिटी देखकर उसे यह एहसास हुई के इस बदन के स्पर्श के लिए कोई मर्दानी सांड़ का ही जरूरत था और चेतन के गतिलापन कोई सांड़ से कम नहीं था,

यह सोचते ही उसकी बुर् काँप उठी और उसने अपनी सारी के ऊपर से ही बुर् को दबोच ली. हाँ… यह वो बुर् थी जिसने चेतन के पितः के लंड को खाया था और जहां से उसका चेतन चेतन निकला था जो आज एक तडगा मर्द के आस पास बन चुका था,

फिर अपनी गान्ड तक हाथ ले जाते हुई अपनी पति के शूकारगुज़ार होने लगी के कैसे सुहागरात के समय से ही उसकी गान्ड आंटीरने से उसकी गान्ड धीरे धीरे बड़ी होती गयी और अब इस 50 साल के उमर में उसकी गान्ड सिर्फ़ बड़ी नहीं थी, विशाल थी!.
पर यह क्या, वो तो एक आंटी थी, उसके चेतन के एग्ज़ॅम्स जल्द आ रहे थे और उसे तो एग्ज़ॅम्स में ध्यान देना चाहिए. नहीं नहीं… सिर्फ़ एग्ज़ॅम्स नहीं, क्योंकि घर में उसकी वासना मंल भादी आंटी भी तो थी जिसे उस गतीले बदन का स्पर्श चाहिए थी.

हाँ चाहिए थी! मेघाली निश्चित थी के उसके 53 साल के पति के बुरहे शरीर के अलावा अगर कोई और गठीला बदन था तो वो था उसके 19 साल का चेतन!. वो बार बार अपनी पेट और स्तनों को दबा दबा के दोपहर के दास्तान याद करती गयी पर उसकी मूल लक्ष्य एक ही था. चेतन से अच्छे अंक लाना.
कुछ घंटों बाद चेतन घर आ पड़ा और आते ही सोफे पर बैठा और टीवी ऑन कर लिया के तभी उसके आंटी के आहट उसे महसूस हुआ और पीछे मुदके देखा तो मेघाली हाथ में एक मोटी सी मनुअल लेकर आ रही थी, इस बार नाभी ढकी हुई थी.

चेतन निराश हो गया और टीवी देखने लगा के तभी मेघाली उसके पास बैठ गयी “चेतन, एग्ज़ॅम्स अब कुछ ही दूरी में हैं, फिर छुट्टियों में जी भरके टीवी देखना”. चेतन को दोपहर के घटने के बाद से ही आंटी के आवाज़ बहुत सुरीली लगने लगी और उसने खुद से टीवी ऑफ कर दिया और आंटी के तरफ देखता हुआ बैठा रहा. 
मेघाली ने मोटी मनुअल का एक पन्ना खोला और उसे कुछ टिक आंटीर्क किए गये सूंस दिखाए “चेतन, उम्मीद करता हूँ तुम्हें हेल्प की जरूरत नहीं होगी अब” कहकर सोफे में से उठ पड़ा और जांबूच के थोड़ी मोटी गान्ड मटकती हुई किचन के तरफ जाने लगी और चेतन ने गौर किया के उसके आंटी तो गिलास में दूध डाल रही थी और फिर वापस मटकती हुई हाथ में दूध की गिलास लेकर चेतन के पास आकर रुक गयी “यह ले चेतन, आराम से सॉल्व करना और हाँ 10 सवाल हैं,

जैसे ही एक हो जाए, मुझे प्लीज़ दिखना” कहती हुई वापस घुमके किचन में चल देती हैं. मोटी गोल गान्ड सारी में भी कैसे मटक रही थी…. यह सोचकर चेतन संकट में था के पहले हाथ में पेन पकड़े या फिर अपने लंड को दबोचे.
चेतन ने अब सूंस सॉल्व करने शुरू किए और मेघाली गुनगुनाती हुई किचन में काम करने लगी. पूरे घर में खामोशी चाय हुई थी.
कुछ लम्हो के बाद मेघाली ने किचन में आहट महसूस की और मुदके देखी के सामने चेतन हाथ में कॉपी लिए मुस्कुराता हुआ खड़ा हुआ था “आंटी, वो वॉ सवाल… ज़रा देखिए ना”. मेघाली भी कांपती हुई अवस्था में मुस्कराने लगी और हाथ में कॉपी लिए सवाल को देखी तो सवाल बिलकुल सही थी.

वो खुश हो गयी और सामने जाकर चेतन के एक गाल पर एक बहुत गीली लंबी छुंभन देने लगी, आंटी जैसे होठों के रस की निशानी गाल पर चोरना चाहती हो. इस एहसास को मन में कैद कर लिया था चेतन ने और उसने आँखें बंद कर लिया था. होठों का गाल से आज़ाद होते ही चेतन ने आँखें खोला तो मेघाली ने उसे प्यार से कहा “शाबाश चेतन,

पर यह तो बहुत छोटा सवाल था, और 9 हैं अभी भी, जाओ और हाँ दूध खत्म कर देना”. 
चेतन अपने उभरे लंड पेंट में लिए वापस कॉपी लेकर बैठ पड़ा और इस बार और सोच विचार से सवाल सॉल्व करने लगा और फिर कुछ करीब 14 मिनट के बाद वापस आंटी को दिखाया तो मेघाली और खुश होने लगी और इस बार दूसरे गाल पर वैसे ही एक लंबी छुंभन देने लगी. चेतन के अब दोनों गाल पर रसीले होठों का चाप लग चुका था और वो 8वे सवाल को सॉल्व करने लिए फिर वापस जाने लगा.
मेघाली की धड़कन से लेकर उसकी बुर्, सब काँप रहे थे और बुर् तो पहले से ही आँसू दे चुकी थी पर पता नहीं और कितना रोना बाकी थी, वो बार बार खाना बनाने के बीच ओ बीच चेतन को घूरती गयी और देखी के कितने रूचि और लगान के साथ चेतन अपने कॉपी में व्यस्त था. फिर करीब 20 मिनट गुजर गये पर चेतन वही सवाल को लेकर व्यस्त था,

मेघाली की दिल की धड़कन बहुत तेज होने लगी के अब के बार उसे क्या तोहफा दिया जाए. उसकी होठों में और रस आ चुकी थी और इस बार उसे अपनी होठों पर गाल नहीं बल्कि कुछ और नरम चीज़ की एहसास चाहिए थी… और वो थी…. “आंटीआ! डन!!” कहता हुआ चेतन दौड़ के आ गया और कॉपी आंटी को देने लगा. 
कॉपी को देखकर फिर मेघाली नीचे से रो पड़ी और खुशी खुशी चेतन के तरफ देखने लगी “वाउ चेतन, वाहह… यह तो सच में सही हुआ हैं!”. चेतन का लौंडा अब मैटेरियल फेरने के फिराक में था और वो और नज़दीक खड़ा हो गया अपने आंटी का मेघाली और उसकी चेतन, दोनों के होंठ अब रस में भीगे हुए थे और इस बार मेघाली ने अपनी होठों को आपस में थोड़ी सी रगड़ने लगी और धीरे से अपनी चेहरे को अपनी चेतन के चेहरे के पास लेकर आई और हल्के से सिर्फ़ लिप्सिंग देने लगी “भी आ हे यू त .. आ सी सी हे ए भी ए त ए” और होठों को हल्के से चेतन के होठों के ऊपर रख दिया और बिना चुंबन दिए ही सरका लिया जिससे चेतन मन ही मन बेचैन हो पड़ा. 
चेतन के नरम होंठ का सिर्फ़ एक सेकेंड के स्पर्श से ही मेघाली की जिस्म किसी 20 की लड़की की तरह उछाल ने लगी. उसने मुस्कुराती हुई अपनी होठों को आपस में रदी और कहने लगी “बर्खूदर यह मत समझना के अब इसके बाद के सवाल आसान होंगे, महनात तो तुम्हें करनी ही पड़ेगा चेतन!”
चेतन भी पूरे कॉन्फिडेन्स में था “कोई बात नहीं आंटी, मैं करूँगा…. सिर्फ़ तुम्हारे लिए!” कहकर अपने होठों को भी आपस में रगड़ लिया और आंटी के हाथ से कॉपी लिए वापस जाने लगा. मेघाली ने अपने पति के कहीं अंग चूमे थे पर सिर्फ़ चेतन के होठों का स्पर्श से उसकी पैर ताले ज़मीन खिसकने ने की नौबड़ आ चुकी थी,

वो वापस मुड़ी और काम में लग गयी, इस खेल में एक अजीब नशा आ चुकी थी उसे और उसे और भी आगे खेलने थी पर… एक आंटी के दायरे में रहके. वहां सोफे में बैठा चेतन सातवें सवाल देखकर हैरान रही गया. सवाल काफी कहतीं था और चेतन इर्रीरते होने लगा, गिलास में दूध भी खत्म हो चुका था और उसे वो सवाल किसी भी हालत में सॉल्व करना ही था.
करीब आधा घंटा बीत चुका था और चेतन से वो सवाल सॉल्व ही नहीं हो पा रहा था, मदद तो वो ले नहीं सकता था क्योंकि उसने दावा किया हुआ था और फिर दोपहर में आंटी के पसीने भादी पेट और अब आंटी के होठों के स्पर्श याद करता हुआ उसे खुजली होने लगा के वो कैसे भी हो सॉल्व करे. 
वहां किचन में चेतन को दुविधा में देखकर मेघाली मन ही मन हंस पड़ा और फिर काम में जुट गयी पर फिर मन में सोचने लगी के अब के बार इस सवाल के सॉल्व होने पर उसे क्या दिया जाए और उसकी बुर् में फिर से खुजली शुरू होने लगी. वही खड़ी खड़ी अपनी जांघों को आपस में रगड़ रगड़ के काम करने लगी और बार बार होठों पर जीभ फिरने लगी यह सोचकर के आगे और क्या क्या वो अपने चेतन को दे सकती थी, पर ममता के दायरे में रहके.
वहां सोफे पर चेतन नज़दीक आ चुका था पर बहुत परेशान भी होने लगा था, उसने घड़ी देखा तो 8:30 बज चुके थे और आधे घंटे में उसके पितः दफ्तर से भी आने वाले थे. आंटी के होठों का स्पर्श उसके लिए काफी था हर कठिन से कठिन सवाल सॉल्व करने के लिए और वो अपने उभरे लंड को पेंट के ऊपर से ही खुज़ला खुज़ला कर सॉल्व करने की कोशिश करता गया और हैरानी से 5 मिनट के अंदर ही अंदर उसने एक नतीजा निकाला और सीधे आंटी के पास दौड़ पड़ा. 
इस बार चेतन के चेहरे को देखकर मेघाली निश्चित थी और उसने जवाब देखी और उसकी मुंह से “वाआह चेतन!!!! शाबशह!!!! यह तो काफी हार्ड था!” निकल पड़ी और फिर कॉपी को साइड में रखती हुई वो चेतन के आँखों में आँखें डालने लगी “तो… मेरे लाल को अब क्या चाहिए?”.
चेतन अपने आंटी के बिलकुल पास खड़ा हो गया और बहुत धीमे आवाज़ में “आंटी…. इस जवाब के लिए… अगर तू….. अगर तुम अपनी …. अपनी”. मेघाली बेचन हो गयी “बोल चेतन…. जल्दी बोल,

तेरे अंकल के आने का वक्त भी तो हो गया हैं, मैं अपनी क्या???” उसकी धड़कन तेज होने लगी और स्तन ऊपर नीचे होने लगी. चेतन नीचे देखकर बोल पड़ा “अगर आप अपने पल्लू को थोड़ा सरका के मुझे ड्ड… द्दिखहाअई टूऊओ”. मेघाली बहुत गुस्सा हो गयी और अपनी हाथ मुट्ठी में तब्दील की. जी में आया के चेतन का खूब पिटाई करे पर फिर बात को संभालती हुई बोल पड़ी “ह्म्म्म्म मम… लगता है मैं तेरे हिम्मत को काफी बड़वा दे रही हूँ”. 
चेतन शर्म के आंटीरे लाल लाल हो चुका था पर मेघाली ने उसके जबरे में हाथ रखकर उसे चेहरे को ऊपर किया “चेतन, एक आंटी से बर्कर.. मैं एक औरत हूँ और औरत का दिल जितना आसान नहीं,

शायद तुम्हें और तोड़ी महननत करनी पड़े, पर फिलहाल के लिए” कहती हुई अपनी चेहरे को आगे की और इस बार अपनी दोनों हाथों में अपने चेतन के मुंह को जकड़ती हुई होठों को सीधे चेतन के होठों पर रखकर चूसने लगी, कुछ ऐसे चूसने लगी के दोनों के जीभ भी एक दूसरे से टकराने लगे.
आंटी के ऐसे होंठ पर होंठ चूसने पर चेतन पागल होने लगा और उसने भी आंटी के पीठ को काश के पड़का और वापस उसकी होठों को चूसने लगा. आंटी चेतन करीब 10 मिनट तक एक दूसरे के होठों को चूसते रहे और एक दूसरे के लाली पीते गये. चुंबन इतनी गीली थी के आंटी दो प्रेमी एक दूसरे को चूस रहे हो और फिर 15 मिनट की लंबी चुंबन के बाद दोनों आज़ाद हो गये और दोनों के होठों से लाली नीचे टपक रहे थे. 
मेघाली ने इस बार बुरी तरह पैंटी गीली कर चुकी थी और चेतन के कच्चे का सामने का हिस्सा ही गीला हो चुका था. आंटी चेतन के एक ही दशा थी और दोनों जैसे ही एक दूसरे को देखते गये तभी अचानक से बेल रिंग बज उठा और दोनों के ध्यान एक दूसरे से टूट पड़ा. चेतन घबराता हुआ हाथ में कॉपी लिए किचन से भाग गया अपने कमरे में और मेघाली अपनी होठों को अपनी पल्लू से पोछती हुई मटकती हुई दरवाजे के पा जाकर उसे खोल दी “ओह आ गये आप!”.
मेघाली के दरवाजा खोलते ही अंदर आ पड़ते हैं उसके पति सचिन, 53 साल के होने के बावजुट एक हटता खट्टा हाटी जैसा इंसान और आज भी जो अपने बीवी को बिलकुल वैसे ही प्यार करता हैं जैसे पहले था. सचिन अंदर आकर अपने बीवी से गले मिला और उसके हाथ में ब्रीफकेस थआंटी दिया.
सचिन : तो डार्लिंग, कैसा गया दिन (काश के मेघाली की गान्ड के गालों को सारी के ऊपर ही दबोचने लगा)
मेघाली : उफफफ्फ़… आप तो बॅस…. चेतन घर में हे, कुछ तो… उफ़फ्फ़
सचिन मुस्कुराता हुआ अपने कमरे में चला गया और मेघाली खाना बनाने में जुट गयी.
रात को चेतन अपने बिस्तर में लेता लेता अपने आंटी के साथ बातें हुए सारे लम्हें को एक के बाद एक याद करने लगा और उसके हाथ अपने आप ही लंड पर आ गिरा और उसे मसलने में जुट गया,

अपने लंड को मसल मसल के उसने बार बार खुद को यकीन दिलाने के कोशिश किया के सच में उसके सूंस के सही जवाब पर उसके अपने ही आंटी ने उसे ऐसे ऐसे हसीना तोहफे दिए उसे और आगे के नतीजो के बारे में सोच सोच के उसके लंड में खून दो गुना ज्यादा दौड़ ने लगा और उसने ऊपर नीचे खीचना शुरू भी कर दिया था.
दूसरे और वहां मेघाली अपने पति के साथ सोई हुई थी. दोनों मीया बीवी अपने अपने दुनिया में मदमस्त थे, सचिन अपने फाइल्स में व्यस्त था और मेघाली नींद की दुनिया से बहुत, बहुत दूर थी,

वो तो बस अपने चेतन के साथ बीती हुई हर लम्हो को याद कर रही थी और जी में आया के वही सारी के अंदर अपनी कोहनी घुसाए बुर् की मरम्मत करे, ना जाने कब से आँसू बहा रही हैं. कुछ मिंटो बाद सचिन फाइल देखते ही देखते बोल पड़ा “तो बर्खूदर के पढ़ाई कैसे चल रहा हैं?”.
मेघाली : हम, अच्छा चल रहा हैं, देखना इस बार बढ़िया आंटीर्क्स लेकर आएगा वो
सचिन : हम, हाँ तुम जो हो उसके साथ, ज़रा डीटेल में पड़ना उसे और हाँ यह ज़िम्मदारी तुम्हारी
मेघाली अपनी जांघों को मसलने लगी “हम हाँ, आप बिलकुल .. बिलकुल टेन्शन मत लीज्ज…यू एम्म्म”. सिसकियों के आवाज़ से सचिन फाइल बाजू रखकर अपने बीवी को जांघें दबाए देखता रहा और उसके पाजामे के अंदर लौंडा बहुत मोटा होने लगा “हम लगता हैं के मेरे पढ़ाई का वक्त हो गया हैं”,

इतना कहकर वो अपने शर्ट के स्तनों खोलने लगा और बिना कुछ विचार किए ही पाजामे के नाडा लूस करके सीधा अपने बीवी के ऊपर. पति के वजन अपनी चौड़ी वजन पर पाके मेघाली की खुजली बाद गयी और दोनों पति पत्नी हिलने लगे एक साथ. सचिन अपने पाजामे के अंदर से उभरे लंड को बहार निकलता हुआ अपने पत्नी के सुडौल पेट पर घिसने लगा और मेघाली ने अपनी पल्लू सर्कदी और पति को सीने से लगा लिया “उःम्म्म्ममम आस लेल्लूओ मुझहीई!!!”.
हमेशा की तरह उनके कमरे के बहार चेतन चुप चुप के दरवाजे में कान लगता था और आंटी-बाप के वासना भरे आवाज़ सुन सुन के उसके पेंट के अंदर लौंडा बहार पूरा 90 डिग्री में खड़ा होने लगता था.

उसके आंटीन पसंद आवाजें अब शुरू हो चुका था और उसका हाथ अपने लौंडा पर अटल था.

“उूुुुुुुउउर्र्घह आअहह आंटीरो मुझे, आअहह!!!” मेघाली की मोटी वजन से बिस्तर तक हिलने लगा था और सचिन पूरा का पूरा नंगा ठुकाई करने लगा “यह ले…. रंडी कहीं किन….ली लीयी उघह उग्घह”.

सचिन का आदात था ठुकाई के वक्त गंदे से गंदे बातें करना और मेघाली को यह बहुत पसंद थी, इसमें उन दोनों के चुदाई में स्वावग सा मजा आने लगता था. सिसकियों के आवाज़ से चेतन का बहुत मन किया के दरवाजा एक दम से खोल के अपने आंटी-बाप को नंगा छोढ़ते हुए देखकर,

पर काबू में खुद को रखे उसने सिर्फ़ अपने शॉर्ट्स और कच्चे को घुटनों तक लाए सिर्फ़ लंड को पागलों की तरह मसलने लगा, खास करके जब उसने अपने अंकल के सिसकियाँ सुनी तो उसके लंड के सूपड़ा फूलने लगा और फिर आंटी के चीखो से तो सुपाडे ने गड़ गड़ पानी चोद लगा.
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद सचिन तक हुआ अपने बीवी पर ही लेट गया और मेघाली की पसीना उसके पति के पसीने भरे शरीर से मिल गयी. दोनों मीया बीवी फौरन चादर ओढ़ लेते हैं और मेघाली लाइट्स ऑफ कर लेती हैं, इतनी गहरी चुदाई के बाद भी उसकी मन कुछ खास नहीं भादी थी.

उसके दिआंटीग़ में एक ही नाम थी “चेतन”, जिसको लेकर वो हर हाल में परेशान थी. वो खुद को लेकर भी परेशान थी, फिर उसने सोचा के सारे के सारे 10 सवाल के जवाब देने पर वो अपने चेतन को क्या इनाम देगी और इनाम कितनी मीठी होगी… इस सोच में ही मेघाली फिर अपनी चुदी हुई बुर् को फिर खुजलने लगी और सोने की बहुत कोशिश की.

बहार खड़ा चेतन भी झंड़े हुए लंड से निकला रस को दरवाजे पर से साफ करने लगा और अपने कमरे में चला गया, दिल में एक ही जुनून लेकर के उसे हर हाल में सारे के सारे 10 सवाल सही करने थे.
अगले दिन “तो बर्खूदर, कैसा चल रहा हैं पढ़ाई?” पूछते हुए सचिन अपने जुतो के लेसस बाँध ने लगा और चेतन के तरफ देखने लगा.

चेतन : जी पापा, इसे.. अच्छा चल रहा हैं.
अंकल के रात के सिसकियों के आवाज़ के मुकाबले उनके आदेश देने वाले आवाज़ कितना अलग था, यह सोचने लगा चेतन और तभी वहां मेघाली आ गयी “यह लीजिए टिफिन” कहती हुई अपनी पति के पास जाने लगी. कुछ ही पल में सचिन निकल पड़ा और मेघाली ने दरवाजा देते हुए अपने चेतन के तरफ देखने लगी, चेहरे में ममता और कामुकता,

दोनों भरे हुए थे और मेघाली अपनी कमर पर हाथ रखे एक पोज़ देने लगी. पोज़ को देखते ही चेतन के डंडे में असर होने लगा. मेघाली अपनी चेतन के करीब जाने लगी और सामने खड़ी हो गयी.
मेघाली : देखो चेतन, तुम हर कोई सवाल को इतना आसान मत समझना और हाँ मैं थोड़ी बाज़ार जा रही हूँ, आते ही मुझे 6त सवाल का जवाब चाहिए, ओके?
मेघाली अपने चेतन के बालों को थोड़ा सहलके वहां से मटकती हुई चल पड़ी और चेतन दौड़ के अपना कॉपी और किताब लेकर हॉल के सोफे में बैठ पड़ा. कुछ डेढ़ में मेघाली कमरे से निकली, उसकी स्लीवलेस ब्लाउज और पतली सारी देखकर चेतन ने किताब को ही ज़ोर से दबाने लगा.

मेघाली ग्रोक्सेरी बैग और पर्स हाथ में लिए दरवाजे के पास गयी और बहार जाती हुई बोल पड़ी “याद रखना चेतन, जवाब सही हुई तो …. शायद मनचाही इनाम भी मिल सकती हैं” कहती हुई एक मुस्कुराहट देने लगी जो काफी कातिलाना थी और फिर निकल पड़ी.
चेतन के लंड में ऐसे ऐसे हलचल हुए के उसे पहले थोड़ा लंड को दबोचा फिर हाथ में पेन लिए.
मेघाली सबसे महले ड्रेस मेटीरियल्स के वहां गयी और कुछ अंडरगार्मेंट्स खरीदने के सोची. उसने दो या तीन बहुत पतली सी सरीिया, कुछ ट्रॅन्स्परेंट ब्ल्काउसस और डार्क रंग के ब्रास कराइडे, फिर थोड़ी सी और पैंटी सेक्षन के जाकर कुछ रंग बिरंगी सिल्क की पॅंटीस खरीदी, जिसमें में से एक पैंटी काफी छोटी थी, मेघाली ने उसे हाथ में ली और मन ही मन खुश हो पड़ी. फिर कुछ और शोप्पिंग्स के बाद, वो वहां से निकल पड़ी और क्योंकि सामने का राता बंद पड़ा, उसने एक आदमी से पूछा.
मेघाली : अरे भाई साहब, यह क्या, सामने बंद क्यों है?
आदमी : अरे मैडम, क्या बातें… यह कमबख्त मरम्मत भी इन्हीं रास्तो का ही तो करते हैं, आप. उम्म्म आप जल्दी से ऑटो में चले जाए, अब तो इस रास्ते में बस भी शायद ना मिले आपको.
मेघाली थोड़ी घुस्से में थी, एक तो ऐसी तपती गर्मी और ऊपर से अब घर वापस जल्दी जाना भी तो जरूरी ही था, उसने पीछे मुड़ी तो देखी के एक पतली सी गुली थी जो शायद उसकी घर तक एक शॉर्टकट बन सकती थी, वो फौरन अपनी हाथ में ड्रेसस के बॅग्स लिए धीरे धीरे उस गली की तरफ जाने लगी.

गली में घुसते ही कुछ अजीब और गरीब आवाजें उसे आने लगी, कुछ कामन आवाजें, कुछ सीटियों की आवाज़ जो उन अवदा लोंडो से आ रहे थे, वो लोंडे वही गली के इर्द गिर्द मंडरा रहे थे और मेघाली ने गौर की के गली काफी खुल्लम खुला था और उन लोंडो को बोलने वाला कोई नहीं.
लोंडो में से एक लोंदा तो अनजाने में बोल भी पड़ा “अरे… ज़रा संभाल के तो चलिए मदमम्म अरे अरे .. कहीं गिर ना जाए मदमम्म” और उसकी बदतमीज़ी से मेघाली हैरान नहीं थी, उसे तो खुजली होने लगी थी. वो अपनी आधेर उमर की कसी हुई जवानी दिखना चाहती थी इन लोंडो को,

वो जान बुझ के मटक मटक के चलने लगती हैं और अपनी पल्लू से कभी आंटीता पोछती हुई यहां वहां उन लोंडो के तरफ देखने लगती हैं. 
मेघाली जा ही रही थी के अचानक उसे बहुत ज़ोर की पेशाब आने लगती हैं. गली खत्म भी नहीं हुई थी और उसका ऐसे बीच रास्ते में रुक जाना उसे बिलकुल अच्छी नहीं लगी, पर आंटीमला जरूरी थी, उसे तो कुछ करनी ही थी.
“अफ है राम, अब … अब मैं यहां कहाआ… क्या मुसीबत हाीइ” मेघाली सोच में पड़ गयी, एक तो ऐसा गंदा मोहल्ला और गली और ऊपर से अब करे भी तो कहा करे, मेघाली ने फिर थोड़ी सी एक कोने वाले साइड में चल देती हैं और वहां पे एक छोटी सी शोचलाए जैसी देखती हैं.

आस पास किसी को ना पाके… वो फिर से सोच ने लगती हैं पर अब खुद को ज्यादा रोक नहीं पति और वो छोटी सी गंदी दीवारी अड्डे में घुस पड़ती हैं और घुसते ही अपनी पल्लू से अपनी नाक तक ढक लेती हैं, उसे किसी भी हालत में मुक्त होने थी और तभी उसे हैरानी होती हैं. दीवार के इर्द गिर्द छोटे छोटे खड्डे थे और किसी भी झक ने के पूरे चान्सस थे.
मेघाली ने अब और परवाह नहीं की और सच पूछे तो उसे ऐसे एक जगह में खुद को मुक्ति देने का आइडिया ही बहुत गंदी लगी और उसकी जिस्म में बहुत गर्मी चढ़ गयी, उसने मुतना शुरू कर दी और आँखें बंद कर ली.

करीब 5 मिनट के बाद उसे सुकुउँ मिली और फिर जल्द जल्द से अपनी सारी ठीक ही कर रही थी के उसे एक खड्डे के उस पार कुछ निगाहों का अंदाज़ा लगाई और वो चौुक्ति हुई झट से सारी ठीक कर लेती हैं और वहां से जैसे बहार निकल पड़ी, उसने देखी के कुछ आवारा लड़के वहां से फौरन भागे जा रहे थे.
“बेशरम, हरामी कहीं के!” मन ही मन मेघाली सोचती रही और फिर हैरान थी के ऐसे में भी उसकी बुर् ने निचोरना भी शुरू कर दी थी. थोड़ी सी अपनी बुर् को सारी के ऊपर से घिस्सती हुई वो झट से आगे गुली में चल देती हैं और करीब 10 और मिंटो के बाद उसे अपनी मोहल्ले दिखी. दिल में सुकून लेकर वो फौरन अपनी घर के तरफ चल देती हैं. 
शोचले की घटना उस बस के घटने से कुछ ज्यादा कम नहीं थी और उसे पूरा यकीन थी के ऐसे भारी भड़कं औरत को देखकर उन लोंडो को जरूर मजा आया होगा. मन ही मन मुस्कुराती हुई वो मटकती हुई घर में चल देती हैं और बेल रिंग पर दरवाजा खोल लेता हैं चेतन “अरे.. आंटी आपप.. आग्गाए”.
चेतन का हालत कुछ बिगड़ा हुआ था, जाहिर था के सवाल काफी हार्ड था. मेघाली मुस्कुराती हुई अपनी बॅग्स समेट अंदर आ पड़ी “तो चेतन, सॉल्व कर रहे हो की नहीं?”. चेतन चौक पड़ा “मत्तलाब्ब? म्मै“इन तो सॉल्व ही कर रहा हूँ!”

उसके आवाज़ में तेज भाव था और मेघाली को यकीन आ गये “ओह ठीक हैं, खैर जवाब जरूर दिखना… मुझे तो लगा अब तक 6त सवाल हो गयी होगी, हम” वापस मटकती हुई अपनी बॅग्स लेकर अपनी कमरे में चली जाती हैं. चेतन वापस सोफे पर बैठा अपने कॉपी लेकर और वो अपने सवाल में व्यस्त ही था के कुछ डेढ़ में उसके आंटी के कमरे का दरवाजा खुला और उसे हील्स की आवाज़ सुनाई दिया. 
चेतन हैरानी से मुदके देखा तो उसके धड़कन बहुत तेज होने लगे. सामने आ रही थी मेघाली एक काले रंग की ट्रॅन्स्परेंट सिल्क सारी पहनी हुई, उसके ब्लाउज सफेद रंग की थी और इतनी ट्रॅन्स्परेंट थी के अंदर काले ब्रा का भी अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं था और…. और फिर उसके आँखें उसके आंटी के नीचे उसकी लाल रंग की लंबी सी हील्स पे गया.
मेघाली धीरे धीरे आगे भी देने लगी और उसकी हील्स की आवाज़ से चेतन का ध्यान लगाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था और उसके मुंह से निकल पड़ा “वो उूव आंटी… यह हील्स… यह वाउ”.

“कैसे लग रही हूँ चेतन?” कहकर मेघाली अपनी चेतन को एक पोज़ देने लगी और कमर में हाथ लगाए उससे कुछ ही दूरी में खड़ी रही. चेतन के पेंट के अंदर फिर से हुलचूलें होने लगा पर उसे अपने सवाल पे ध्यान देने थे. वो फौरन बैठ पड़ा और मेघाली हील्स पहनी यहां से वहां चलने लगी. चेतन नजरें चुराए बार बार आंटी की चल देखता गया,

कभी उसकी लंबे खुले बाल, कभी उसकी सारी ताले हील्स और कभी वो विशाल सी गान्ड का काले सारी में मटकना. चेतन पेन को लंड के तरह ही दबाने लगा और बहुत मुश्किल से मन लगाया अपने सवाल पे. सवाल हार्ड था पर उसे जवाब लाना ही था क्योंकि आगे के नतीजा तो उसे चाहिए था.

मेघाली अपनी चेतन के चेहरे के गंभीर भाव देखकर काफी खुश हुई मन ही मन और फिर उसके विपरीत बैठ गयी सोफे पे.
आख़िर कर और 10 मिंटो के बाद चेतन जवाब के करीब पहुंच गया और पहली बार जवाब देते हुए उसका दिल ही नहीं, उसका लौंडा भी खुश होने लगा.

फिर जवाब लिखते ही वो सोफे में से उछाल पड़ा और फौरन आंटी के पास जाकर खड़ा हो गया. मेघाली के आँखों में चमक थी, चेतन के चेहरे में एक मज़बूत मुस्कान था. चेतन के हाथों से कॉपी लेती हुई वो फौरन जवाब देखने लगी और फिर चेतन के तरफ देखकर उसकी मुंह में से “वह!!!! वेरी गुड चेतन!!!!!!!!” निकल पड़ी और उसने बिना और विचार किए ही झट से चेतन के गले लग गयी और काश के एक झप्पी देने लगी. 
उसके मज़बूत 40 सी अब चेतन के चौड़ी छाती पर रगड़ी हुई थी और झप्पी को लंबा करने के लिए चेतन ने उसकी पीठ को जकड़ के आगे ढकला तो मेघाली एक ‘यू’ देती हुई और चिपक गयी चेतन से.
चेतन के बाज़ुव का सकती देखकर मेघाली को ऐसे लगी जैसे कोई अंजान मर्द उसके बाँहों को थाम रहा हो, पर फौरन झप्पी से मुक्त हो गयी “अम…. खैर… आगे भी सॉल्व करने हैं तुम्हें, बताओ…. क्या चाहिए अब के लिए?”. उसकी होठों में हलचल थी, आँखों में भूख, उसे तो चेतन का जवाब नहीं, उसका आदेश चाहिए था. 
चेतन अपने आंटी को ऊपर से नीचे देखने लगा और उसके साँसें तेज हो गया “आंटी…. आंटी अगर उम्म्म अगर बस एक बार मैं आपको और काश के झप्पी…. झप्पी दे सकता तो?”. मेघाली हंस पड़ा “बस? बस इतनी सी बात?”. चेतन का हिम्मत बाद गया और फिर बोल पड़ा “आंटी ऐसे नहीं….एम्म.. मुज्झहही बिना शिरतत्त पहने आपसे झप्पी लेना हैं!”.
मेघाली की बुर् काँप उठी पर उसे तो चेतन का गठीला छाती फिर से देखनी थी, उसने एक लंबी साँस ली और साँसें थाम के रखी जब देखा की चेतन ने अपना टी-शर्ट उतरे सोफे पे रख दिया और धीरे से बहन फैलाए उनमें आंटी को धीरे से लेने लगा. मेघाली बहुत गर्मी में थी,

उसने आँखें बंद की और सचिन के जवानी के दिन याद करती हुई अपनी चेतन के गले लग गयी और चेतन ने अपने आंटी के मदमस्त भारी शरीर को अपने गिरफ्त में कर दिया. उसके हाथ उसकी पीठ के यहां वहां सहलाने लगा और मेघाली और काश के चेतन से चिपक गयी “उम्म्म उःमहममम”. चेतन बहुत ही धीमे धीमे अपना हाथ उसकी मुलायम चौड़ी पीठ पर फिरा रहा था और बार बार उसके हाथ पीठ को छोड के सीधे कमर पर जाकर,

वहां हल्के से आंटीज़ को जैसे ही दबाने लगता, मेघाली की मुंह से ‘उईईई’ निकल आती, जवाब में मेघाली और काश के चेतन को बाहों में लेती हैं.
करीब और 10 मिनट के बाद मेघाली होश में आती हुई चेतन को आगे धकेलती हैं “आस अफ… “. चेतन भी थोड़ा शर्म महसूस करने लगा “ओह सोरररयी आंटी..वह” पर मेघाली ने उसके गाल दबे “इट्स ओके चेतन, मुझे अच्छी… नहीं बहुत अच्छी लगी, पर ऐसे ही सूंस ठीक करते जाना ओके???…… उहम्म” अपनी हुलिया ठीक करती हुई वो सोफे पर बैठ जाती हैं और चेतन अब 5वे सवाल को लेकर व्यस्त हो जाता हैं. 
मेघाली कामुकता से चेतन को सॉल्व करता हुआ देखने लगता हैं और चेहरे के भाव ऐसे तेज थे जैसे आंटी सवाल सॉल्व नहीं… कुछ और ही कर रहा हो. मेघाली की दिल सफेद पर गयी और सोचने लगी के चेतन के सफलता के लिए वो और किस हद तक गिर सकती थी, ऐसी सोच ही रही थी के चेतन का ध्यान थोड़ा टूटने लगा,

मेघाली ने फौरन अपनी एक हील से ज़मीन पर ठुकाई की जिससे चेतन वापस अपने कॉपी में डूब पड़ा.

और फिर…

“आंटी… डन!”

कांपती हुई हाथ में कॉपी लिए जब जवाब देखी तो मेघाली की धड़कन बहुत तेज होने लगी, जवाब बिलकुल सही था और अब के बार चेतन के बॉडी लॅंग्वेज मैं भी काफी कॉन्फिडेन्स आ चुका था और वो भी एक स्आंटीर्ट पोज़ देता हुआ आंटी को देखता गया “एमेम..आंटीआ!”. आवाज़ आदेश जैसा लगा और मेघाली थोड़ी चौक पड़ी, कॉपी से नजरें हटा कर फौरन चेतन के तरफ कर दी “हह-हाँ चेतन बोल…”. 
चेतन के हिम्मत अब धीरे धीरे भी देने चला था और उसने अब अपने आंटी के कलाई को पकड़ा और धीरे धीरे उसके मुलायंता को सहलाने लगा. मेघाली इस हरकत से थोड़ी ठंडी हो गयी और साँसें बड़ा ये चेतन के तरफ देखने लगी. चेतन ने फिर बिना कुछ ज्यादा विचार किए अपने आंटी के कोहनी को अपने हाथ में लिए उसके हाथों के छुरियों के आसपास चूमने लगा और मेघाली सीधी के सीधी आँखें बंद किए खड़ी रही “आस तुम ब्बेतटटा”.

चेतन मुस्कुराता हुआ अपने आंटी के हाथ से कॉपी लेता हुआ वापस बैठ पड़ा और इस बार पूरे कॉन्फिडेन्स के साथ 4 नंबर के सवाल का सामना करने लगा, उसके मुट्ठी में पेन का जकड़ सख्त था और आँखोन्म में तेज भाव. मेघाली ने शायद पहली बार चेतन के जज़्बे को इतना मज़बूत होते देखी थी. वो मन ही मन बहुत खुश थी.
कुछ ही लम्हो में वापस चेतन से कॉपी अपनी हाथ में लिए मेघाली सवाल को देखने लगी और जैसा उसने सोची थी वैसे ही नतीजा निकली. जवाब सही ही नहीं बल्कि चेतन के हंदवृट्टिंग में एक बढ़ता के एहसास भी उसे मिली.

वो खुश ही हो रही थी के अचानक अपनी गर्दन पर अपने चेतन के उंगलियाँ महसूस की और उसकी हाथ में से उसके चेतन के दूसरे हाथ ने किताब ले ली. अपने आंटी के गर्दन जकड़े हुए चेतन उसे अपने और लाने लगा और आंटी चेतन सिर्फ़ एक दूसरे को देखते रहे, दोनों के आँखों में एक सआंटीन प्यास. 
चेतन ने अब और देर ना करते हुए अपने आंटी के गले पर चुंबन बरसाने लगा और मेघाली आँखें बंद की हुई उसके गीले होठों का एहसास अपनी गर्दन में लेती रही, पर अचानक से चेतन रुक पड़ा और इससे मेघाली ने आँखें खोली और चेतन के आँखों में देखने लगी. दोनों के होंठ खुले पर शब्द का कोई ठिकाना नहीं और तब चेतन बोल पड़ा “आंटी… एक अधूरा काम बाकी हैं” कहता हुआ नीचे झुक के बैठ पड़ा और मेघाली समझ गयी, उसने आँखें बंद की और चुप चाप खड़ी रही. 
खेल का मजा ही निराला होने चला था.

चेतन के आँखों में सामने अब वही फूली हुई पेट थी और इस बार उसने अपने ही हाथों से जैसे सारी के गाँठ को हाथ लगाया, मेघाली की जिस्म काँप उठी और फिर उसने सारी को पेट से थोड़ा नीचे के तरफ खींच ने लगा. यूँ तो यह हरकत बहुत शरामनयक थी पर मेघाली इसे एक मर्द का जकड़ समझ रही थी,

ना की एक चेतन के बदतमीज़ी. सारी की गाँठ को नीचे करते हुए उसकी नाभी फिर झट से फुल्ती हुई चेतन के आँखों के सामने आ पड़ी और चेतन ने अपने होठों को लाली से भीगोटा हुआ सीधे उन्हें पेट के कोमल आंटीज़ पर रख देता हैं. मेघाली के पैरों ताले ज़मीन खिसक गयी और उसने फॅट से चेतन के सर को जकड़ ली और आगे खींच ने लगी.
चेतन पेट के आस पास चूमती गयी और मेघाली तरसती रही अपनी नाभी पर प्यार पाने के लिए. चेतन जान बुझ के नाभी के आस पास चूम रहा था और उसके आंटी के बेचैनी भी ड़ थी ही गयी. 
चेतन के तड़पने को देखकर मेघाली से और रहा नहीं गयी और ‘बस कार्रररर चेतन!!!!” की सिसकी देती हुई सीधे चेतन के चेहरे को ऐसे दबोचा अपने पेट पर के उसके होंठ सीधे नाभी के गहराई में आ पड़ा और चेतन नाभी के छेद को अपने होठों ताले चूसने लगा. “श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स उउउहह निक्खिल्ल्ल्ल्ल्ल्ल!!!” मेघाली की आँखों में आँसू आने लगे और चेतन के बालों को खींच ने लगी थी. उसकी जांघें तो रिस चुकी थी रस में और फिर भी बुर् ने हार नहीं आंटीनी.
चेतन नाभी को बिलकुल कोई कॅंडी के तरह चूसता गया और कभी नाभी और कभी पेट पर अपने होठों के गीलापन देता रहा. मेघाली पागल होने चली थी और घुस्से में चेतन के आगे धकेल दी जिससे चेतन का बैलेन्स खो पड़ा और वो टाइल्स पर ज़ोर से गिर पड़ा. “बॅस चेतनअ!!! बस कर!” मेघाली ने अपनी हुलिया ठीक की और खुद को संभाली,

यूँ तो मजा तो भरपूर आ रही थी पर काबू रखना भी जरूरी थी. चेतन भी वासना में अँधा इतना हो चुका था के अब काफी अरसो बाद उसे ख्याल आया के आख़िर कर वो औरत तो उसके अपने ही आंटी हैं, उसने सर नीचे करके अपने फीके हुए शर्ट और कॉपी हाथ में लिए और उठ पड़ा “स्सोररी.. सॉरी आंटी”.
चेतन के आवाज़ में एक गहराइपन देखकर मेघाली रोने के अवस्था में आ गयी और चेतन के फॅट से गले लगा लिया “स्सोरररी चेतन…… सॉरी… मुउज़्झसीए रहा नहीं गयी…. तू क्यों इतना तड़पा रहा है मुज्झीई….. ततटेररीि म्म्लआंटी हूँ…. आंटी!!!” कहती हुई काश काश के झप्पी देने लगी और चेतन भी फिर से वासना में वापस झप्पी और ज्यादा काश के देने लगा अपने आंटी को “ओह आंटी…. आंटी तुम्हारे तरह और कोई नहियीई आंटीआआ!!!!”.
मेघाली झप्पी देते हुए अपने चेतन के कान में अपनी मुलायम होठों को लेकर गयी और हल्के से “ब्चेतन…. आखिरी के तीन सवाल हाईईइ….. इन्हें जल्दी सॉल्व करदे और्र्रर…..उःम्म्म्मम चेतन….श चेतन…. इन्हें जल्द से जल्द ठीक करडीई….. मुझे सॉल्व करडीई बेतताअ……. मुझीईई… स्सोररी मतलब सुम्म कूओ!!!” 
फुसफुसती हुई चेतन को और काश के झप्पी देने लगी और चेतन भी वासना में डूबा हुआ अपने आंटी के ब्लाउज ताकि काले ब्रा के स्ट्रॅप्स के साथ खेलने लगा अपने उंगलियों से. इस एहसास से मेघाली और पागल होने लगी पर फिर दोनों ने अपने आप पर काबू कर लिया. 
चेतन के लंड और दिल में इतने हिम्मत और सकती आ गया के उसने खुद आंटी से खुद को मुक्त करके अपना कॉपी लिए वापस सोफे में चल पड़ा और मेघाली साँसें थामे अपनी हुलिया ठीक करने लगी और शर्म के आंटीरे पहले ही लाल हो चुकी थी.

पर…. अब तो वापस लौटना मुश्किल नहीं, ना मुमकिन थी.
अगले सवाल के और ध्यान देते वक्त चेतन को यह एहास हुआ के सवाल काफी हार्ड था और वो अब काफी अरसो के बाद अपना दिआंटीग़ खुजाने लगा था एक सवाल पर. मेघाली अपनी सोफे पर बैठी बैठी अपनी चेतन को देखती गयी और उसकी नज़र बार बार चेतन के मस्त गतीले पेट और छाती पर टिकी रही. वो तो इस सोच में भी थी के जो कुछ भी वो अपने चेतन से करवा रही थी, उस के लिए तो उसे और कठिन से कठिन सूंस मिलने चाहिए थे,

पर सच तो यह भी थी के उसे अपने चेतन को एक आंटी से ज्यादा एक औरत का सुख देनी थी और खास करके अगर वो सुख के हासिल होने से उसके चेतन के आँख अच्छे आए एग्ज़ॅम्स में.

मेघाली आगे तो बड़ना चाहती थी पर मन ही मन ऐसे डर ने लगी के असर सीधे उसकी जांघों के बीच होने लगी थी.
चेतन जब थोड़ा बेचैन होने लगा तो मेघाली के मुंह से निकल पड़ी “चेतन, रहने दे अब… थोड़ा आराम करले”. चेतन भी बहुत बेचैन था “नहीं आंटी, मुझे जवाब आंटीलूम है… शीत!!!” कहता हुआ फिर किताब में डूब पड़ा. मेघाली को यह डर थी के अब की बार उसे कौन सा इनाम दिया जाए और अपनी जांघों को आपस में मसल मसल के बैठी हुई थी और फिर तभी उसकी फोन बज उठी. 
उसकी दिल काँप उठी और सेल ऑन करली तो उसमें उसकी बेटी नेहा का नंबर थी. नेहा उसकी बेटी और चेतन की बहन एक महननति लड़की थी और आज अपने हॉस्टल से छुट्टियों के लिए वापस घर आ रही थी.

मेघाली सोफे में से उठती हुई बरामदे पर चली गयी “हेलो चेतन, कैसी हो???”.

नेहा : ही आंटीआ!!!!! आंटी, शाम का ट्रेन हैं और प्लीज़ मुझे लेने मत आना क्योंकि भाई को सर्प्राइज़ भी देनी है

मेघाली : उःम्म्म हाँ.. शुरू, जल्दी आना चेतन

मेघाली कुछ दरह तक अपनी बेटी से बातें करती रहती हैं और चेतन कुछ दरह आराम करने लगता हैं, किताब को साइड में रखता हुआ और अपने आंटी से पसीना पूछता हुआ, वो बार बार घारी और बार बार अपने हालत को देखने लगता हैं के तभी मटकती हुई मेघाली आकर सीधे चेतन के पास रुक जाती हैं और उसके बालों में हाथ फिरती हुई, उसके पास बैठ पड़ती हैं.
मेघाली : देखो चेतन, जो कुछ भी चल रहा हैं, यह …. यह सब एक हद तक ठीक हैं पर अब इसके आगे हम नहीं जा सकते.

चेतन का मुंह थोड़ा उतार गया, आख़िर सूंस को सही करने का प्रेरणा उसे अपने आंटी से ही मिल रहा था “म्मरत्तलब्बब?”

मेघाली : तुम 19 के हो चेतन, मैं आंटी हूँ तुम्हारी….. ऐसे खेल खेलना… शायद्ड… नहीं शायद नहीं, यह गलत है तो है!

मेघाली की आँखों में आँखें डाल के चेतन उसे देखने लगा तो फिर से चेतन के कहा जाने वालो नज़रो को देखकर मेघाली सदपका गयी और मन ही मन में “क्या करूं चेतन, आंटी जो हूँ….

अगर कोई रंडी होती तो शायद अब तक…..”. झट से तभी चेतन का हाथ उसकी हाथ पर आ जाती हैं और मेघाली चौुक्ति हुई सीधी बैठ पड़ती हैं “बब्बेतटे.. टूट तुउंम समझहह रहे हो ना??”. 
चेतन हाथ को अपने हाथ में आंटील्टा हुआ बोल पड़ा “म्आंटी.. अगर तुम नहीं सिख़ावगी तो… और कौंन्ञन्??”. मेघाली ने पहली बार चेतन के आँखों में एक अजीब एहसास देखी, सीखने का जुनून, प्यार जताने का जुनून…. वो भी अपने आंटी को!

मेघाली : पर चेतन, यह (सूखे होठों को थोड़ी भीगोटी हुई) यह तो गलत है चेतन…. तूमम.. तुममहे कोई ना कोई कॉलेज में तो मिल ही जाएगा

चेतन : पर आंटी, वो लड़कियां तुम जैसी थोड़ी ना है
मेघाली : देखो अगर लड़किययांन नहीं तूओ शायाड्द्ड़…. (मन में मंदिरा को सोचती हुई) शायद कोई औरत्त….. अफ हो मैं भी क्या..

चेतन : (काश के आंटी के हाथों को जकड़ था हुआ) हाँ आंटी!! औरतें पसंद है मुझीए!!!!! पर मंदिरा आंटीँ नहीं….(सर नीचे करके) तुउंम्म जैसी!
मेघाली ने ‘तुम’ सुनते ही अपनी मोटी जांघें फिर से काश लेती हैं और चेतन के थामे हुए हाथ पर अपनी दूसरी हाथ रख लेती हैं “क्ककया…. स्साक्च… ट्टू यह क्या कह…”. “हाँ आंटी!!!” यह आवाज़ नहीं था, आदेश था वो भी एक मर्दानी ढंग का. मेघाली को ऐसी लग रही थी के जैसे वो किसी मर्द के कैद में आ रही थी धीरे धीरे और देखते ही देखते वो थोड़ी और आगे खिसक गयी,

चेतन के और करीब बैठी हुई. चेतन अनजाने में चेहरे को आगे लेकर आया “आंटी वादा करूं के तुम… मुझको… मीथहा औरर्र दूओ” कहते हुए होठों को ऐसे गोल किए के मेघाली से भी रहा नहीं गयी और उसने आँखें बंद कर ली.
चेतन अगले ही पल में अपने होठों को सीधे आंटी के होठों पर रख देता हैं और हल्के फुल्के गति से रस के पंक्रिओ को चूमने लग जाता हैं. मेघाली के सूखे हुए लंबो को इसी की जरूरत थी, उसने भी साथ देना शुरू की और आंटी चेतन चुंबन में खो गये.
कुछ और एहसास के बाद मेघाली को अपने बेटी का भी कहयल आने लगी और वो चुंबन से मुक्त होती हुई चेतन को पीछे धकेल दी “न्न्ण लग नाहियिइ…. ट्टू.. तू अभी जा अपने कमरेम में!!! जा!!! अभीइ!” कहती हुई खुद सोफे में से उठ गयी और किचन की और जाने लगी, चेतन सोफे के गद्दी पर एक मुट्ठी आंटीरता हुआ उठ पड़ा और अपने कमरे में जाने लगा,

जाने से पहले कॉपी और सवाल के किताब को टाइल्स पर फाटक से फेंक दिया. पूरे घर में अब सिर्फ़ और सिर्फ़ खामोशी चाय हुई थी.

शाम का समय…
“टिंग टाँग” “टिंग टाँग टिंग टाँग!”.

“अरे आ रही हूँ… उफफफ्फ़ बेल रिंग ना हुआ कॉलिंग बेल हो गया!” दौरती हुई आ गयी मेघाली दरवाजे के पास और दरवाजा खोलते ही अपनी चेहरे पर एक तेज और खिला हुआ मुस्कुराहट लाने लगी. सामने खड़ी थी उसकी बेटी नेहा “हीईिइ आंटीआ कैसी हूओ???” पर सामने खड़ी लड़की उसकी बेटी नहीं थी,

वो तो कोई जवान मदमस्त जवानी भादी लड़की थी, आज करीब 3 साल के बाद नेहा से मिली थी और 3 सालों में नेहा के जवानी भादी रूप देखकर मेघाली दंग रही गयी. लाल रंग की टी-शर्ट के ऊपर एक नीले डेनिम की जॅकेट पहनी हुई और नीचे उसकी जीन्स कुछ ऐसी टाइट थी के जैसे आंटी उसकी जांघों और पिंडलियो से चिपक गयी हो. 
चेहरे में रौनक और गुलाबी रसीली होठों पर एक मुस्कान. अपनी मदमस्त जवानी को घर के अंदर लाती हुई सीधे अपनी आंटीक ए गले मिल गयी “आस आंटीआ ई मिशसेद्डद उूुुुउउ!!!” कहती हुई अपनी आंटी के गाल पर एक काश के चुंबन थाम लेती हैं |

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *