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बेसरम बीबी

बहुत प्रयासों के बाद मेरी जिंदगी में अंजलि का प्रवेश हुवा। मैं अंजलि को तब से जनता हु जब मैं अपने कॉलेज की नयी जंदगी की सुरुआत कर रहा था। तभी अंजलि का परिवार मेरे ही कॉलोनी में आकर रहने लगा। मुझे पहले ही दिन से अंजलि बेहद पसंद थी।

मेरे मन में उसी दिन से ये बात बैठ गयी की कास अंजलि मेरी ख़ूबसूरत बीवी बनकर मेरे साथ जिंदगी भर रहे। हालांकि उसी कॉलोनी में मेरे कई ऐसे दोस्त थे जो पहले ही दिन से अंजलि के पीछे पड़े थे। पर मैं उनसे तब जीत गया जब मेरे पापा ने मुझे अंजलि के घर जाकर उनके दोस्त (अंजलि के पापा) से कुछ कागजात लाने को कहा। ठीक उसी दिन से मेरी अंजलि से बात-चित सुरु हुई।

अंजलि मेरे से एक साल छोटी थी पर मुझे तो वो पहले ही दिन से हर उम्र में अपनाये जाने वाली लगी थी। मेरे मन में बेहद चाहत थी उसको लेकर की वो खूबसूरत लड़की कैसे मेरी ख़ूबसूरत बीवी बन सके। मैंने कई बार उससे मिलाने के बहाने बनाये और ज्यादा तर में मुझे सफलता भी मिलती थी।

ये वाकई में काफी रोचक होता था जब कभी भी मैं अंजलि के साथ होता था। सुरुआत में मेरे पास शब्द नहीं होते थे उससे बात करने के क्युकी मेरा दिल ज़ोरो से धड़कने लगता था। पर धीरे-धीरे मैंने अपने दिल पे काबू पाया और अंजलि के साथ थोड़ा खुल कर बात करने लगा। अब हम बड़े भी होते जा रहे थे और तभी फिर अंजलि के परिवार का तबादला होगया।

ये बेहद दुखद था मेरे लिए क्युकी मेरे जिंदगी में अंजलि सिर्फ नौ महीने तक ही रह पायी था। जहा मेरा इरादा उसके साथ जिंदगी बिताने का था। खैर मैंने भी अपनी कोसिस जारी राखी और उसके नए पते का पता हमेशा अपने पास रखा। उसके पिताजी बैंक में थे जिसकी वजह से इतने तबादले होते थे। मैं उससे अब सिर्फ फ़ोन पर ही बात कर पता था और अब तक मैंने अपने दिल की बात भी उसे नहीं बताई थी।

इस वजह से मैं उसे सिर्फ दो या तीन बार ही हफ्ते में फ़ोन कर पता था। बेचैनी मेरे अंदर काफी ज्यादा होने लगी थी और मुझे हमेशा दर सतत था की अंजलि किसी और की न होजाये। मैंने अपने पढ़िए और करियर पर से ध्यान नहीं हटाने दिया जिसकी वजह से मुझे जल्द ही एक अच्छी नौकरी मिल गयी।

दुःख इस बात का था की वो नौकरी अंजलि के शहर से काफी दूर था। अंजलि की कुछ फोटो मेरे साथ थी जो मुझे महसूस करने देती थी की वो मेरे साथ ही है। कुछ ही महीनो बाद मेरे घर वाले मेरे पीछे पद गए की मुझे शादी कर लेनी चाहिए क्यूंकि मेरी दादी ऐसा चाहती थी। मुझे इसके लिए खास तौर पर घर बुलाया गया था।

मेरी परेशानी

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मैं इन दिनों काफी परेशान था क्यूंकि मुझे नहीं पता था की आखिर मेरे घर वालो ने किस से मेरी शादी तय की है। मेरे मन में अब भी अंजलि ही बसी हुई थी और मुझे पूरा यकीन था की मैं अंजलि को शायद जिंदगी भर न भुला सकु। मैं जैसे ही घर पंहुचा मुझे बताया गया की मेरी शादी दस दिन बाद ही तय की गयी है।

अब मेरी परेशानी ये थी की मैं अपनी बात सिर्फ खुद से ही कर सकता था। मेरा मन इतना दुखी था की मुझे खुद की सकल आईने में देखने में भी शर्म आ रही थी। इन्ही दुखो के साथ वो दसवा दिन भी आगया और मैं अपने मन में पुरानी सभ्यताओ को दोष देता रहा की मुझसे मेरे घर में से किसी ने भी एक बार मेरी चाहत तक नहीं पुछि।

मुझे मेरी होने वाली पत्नी का चेहरा भी नहीं देखने दिया गया। सारा शादी का कार्यक्रम घूँघट के अंदर ही हुवा। मैं चुप रहा और शादी से लेकर विदाई तक मेरे मन में काफी रोष था। मैं सोंच में था की अंजलि किसके साथ जाएगी और उसको सही पति मिलेगा भी या नहीं जो मुझसे ज्यादा प्यार करेगा उसे। विदाई के दौरान मेरे बगल में मेरी नयी दुल्हन थी पर मेरी नज़र और दिमाग अंजलि को ही याद कर रहा था।

भूल कर हुई भूल

मुझे केस बार ऐसा आभास हुवा की वो नयी दुल्हन मुझसे बात करना चाहती है पर मेरा मन बहुत ही उदास था। घर पहुचने पर मैं अपनी पत्नी से दूर चला गया और शाम को ही वापस आया। मुझे बहुत बुरा लग रहा था और अब तो ये महसूस हो रहा था की मैंने किसी से शादी करके उसकी ज़िन्दगी ख़राब कर दी।

हर पल मेरी आँखों में बस अंजलि का ही चेहरा आता था और ऐसा लगता था की वो मेरे सामने है पर ये हक़ीक़त नहीं थी। साम को जब मैं घर वापस आया और मेरे रिस्तेदारो ने मुझे मेरे कमरे में जाके सोने को कहा तो मेरा मन जैसे रो ही पड़ा था। मैं अपने उदास मन के साथ अंदर गया और वह पर भी ऐसा लगा की मेरे सामने अंजलि ही थी पर मैंने खुद पर काबू किया और अपनी नयी नवेली दुल्हन के पास जाकर उसे सब कुछ बताने लगा।

मैंने उसे मेरे अंजलि के प्रति एक तरफ़ा प्यार की साड़ी जानकर दी और थोड़े ही देर बाद पाया की मेरी आँखों में आँशु थे पर मेरी नयी नवेली बीवी मेरे पीछे से आकर मुझे बहो में भर लिया। मैं दर गया और दूर जाने लगा पर जब मैंने पलट कर दुल्हन की ओर देखा तो मुझे उसमे भी अंजलि ही नज़र आरही थी।

मैंने अपनी बीवी को ये भी बताया की मुझे उसके चहरे में भी अंजलि का चेहरा नज़र आरहा है तो वो ज़ोर से हँसाने लगी। जब उसकी हसी सुनी तो यकीन नहीं हुवा क्यूंकि वो अंजलि ही थी जो मेरी बीवी बनकर मेरी जिंदगी में आई थी। बस एक ही पल में मेरा सारा दुःख का सागर लुप्त हो गया। मैंने तुरंत अंजलि को अपनी बहो में भर लिया और उसको ज़ोर से चूमने लगा।

अंजलि भी मुझे मन नहीं की और वो अपनी कपड़ो को उत्तर कर मुझे अपने बदन को बेहद प्यार करने का मौका दिया। मेरे लिए तो अंजलि के शरीर के हर हिस्से से अमृत ही निकलता था क्यूंकि मेरी ख़ूबसूरत बीवी ने काफी कुछ मुझे उम्मीद से ज्यादा दे दिया था। अब मुझे किसी भी तरह की शिकायत नहीं थी। अब तो अंजलि मुझे अपना बदन खोल-खोल कर प्यार करने का मौका देती थी। मुझे कुछ बोलना नहीं होता था की वो पहले से ही सारे कपडे उत्तर कर बेशर्म बनकर अपने ख़ूबसूरत बदन को मेरे ऊपर दाल देती थी।

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