मालिश तो एक बहाना है, असल में चूत चुदवाना है।

Hindi sex story, chudai ki kahani, indian sex stories. मालिस तो एक बहाना है, असल में चूत चुदवाना है। मेरे घर में हम 3 लोग हैं। मेरे पापा माँ और मैं,, वैसे तो मैं बिजनेस करता हूँ,, लेकिन मैं बचपन से ही बहुत अच्छी मालिश करता था। हमारे रिश्तेदारों में सबको पता है कि मेरे मालिश करने से दर्द आदि सब खत्म हो जाया करता है।

कुछ दिन पहले की ही बात है,, हमारे घर के सामने वाला घर खाली था और उसमें 2 महीने पहले ही नए किरायेदार आए थे। उनके घर में 3 सदस्य थे,, पति पत्नी और एक लड़का। कुछ एकाध महीने में ही हमारे घर के साथ उनका रिलेशन अच्छा हो गया था,, हम लोगों में काफ़ी आना:-जाना होने लगा था।

एक दिन की बात है माँ को टाँगों में दर्द हो रहा था और मैं ऑफिस में था,, तो बगल वाली आंटी हमारे घर आईं,, तो देखा कि माँ को बहुत दर्द हो रहा है,, तो उन्होंने माँ को आयोडेक्स लगा कर थोड़ी मालिश की,, इससे थोड़ी देर के लिए माँ को आराम मिला,, और आंटी वहीं उनके पास बैठी रहीं।

मेरा भी उस दिन कोई ज्यादा काम नहीं था,, तो मैं भी जल्दी घर चला आया था।
घर आया तो माजरा देखा,, तो आंटी बोलीं:- माँ को पैर में दर्द हो रहा है,,
मैंने माँ से कहा:- लाओ, मैं मालिश कर देता हूँ।
और मैंने मालिश कर दी और उनको थोड़ी ही देरी में आराम मिल गया।

आंटी ने कहा:- वाह,, आर्यन क्या मालिश करते हो,, इतना जल्दी आराम मिल गया।
तो माँ बोली:- हाँ आर्यन हम लोगों के परिवारों में इसी किस्म की मालिश के लिए फेमस है,, इसका हाथ में जादू है।
तब आंटी ने कहा:- चलो,, कभी मेरे को दर्द हुआ तो तुम मालिश कर देना।

मैंने उनकी हाँ में हाँ मिला दी।

आप लोगों को आंटी के बारे में बताना तो भूल ही गया हूँ। वो क्या मस्त माल किस्म की औरत हैं,, उनको कोई देखे तो कोई नहीं बोल सकता कि उनकी उम्र 30 साल से ऊपर है,, क्या फिगर को मेनटेन करके रखा है,, उनका फिगर है 36:-32:-38,, माशाअल्लाह,, देखते ही लंड खड़ा हो जाता है। कई बार तो मैंने उनकी नाम की मुठ्ठ मारी है।

फिर कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा।

एक दिन घर के सब सदस्य शादी में गाँव गए हुए थे,, तो माँ उन्हें ही मेरा ध्यान रखने को कह गई थीं। माँ:-पापा तो 15 दिन के लिए गए थे,, तो सुबह आंटी ही चाय लेकर देती और रात को वहाँ उनके घर पर जाकर खाना खा लिया करता।

एक दिन मैं ऑफिस नहीं गया,, मेरी तबियत थोड़ी खराब थी।
करीब 11 बजे आंटी आईं और बोलीं:- क्या हुआ तुमको,, आज ऑफिस नहीं गए?
तो मैंने कहा:- नहीं,, अच्छा फील नहीं हो रहा है।

आंटी ने कहा:- मुझे भी बदन में दर्द हो रहा है,, मौसम भी कुछ ठीक नहीं है।
मैंने आंटी से कहा:- आप पेन किलर ले लो।
आंटी ने कहा:- लिया,, पर रिलीफ नहीं मिल रहा है,, कल रात से दर्द हो रहा है।

तभी अचानक से आंटी बोलीं:- मैं तो भूल ही गई कि तुम तो इतना अच्छा मालिश करते हो,, मैं बेकार में दर्द में मर रही हूँ।
मैं भी यही चाहता था, मैंने कहा:- हाँ तो ठीक है,, मैं मालिश कर देता हूँ।
‘हाँ कर दे,,’
‘आंटी दर्द कहाँ हो रहा है?’
तो आंटी अदा से बोलीं:- पूरे जिस्म में,,

आंटी ने उस समय साड़ी पहन रखी थी तो मैंने कहा:- इधर ही मालिश करूँ या आप के यहाँ चल कर करूँ।
आंटी ने कहा:- तुम्हारे यहाँ ही ठीक रहेगा।
मैंने कहा:- ठीक है,, आप कपड़े बदल कर आओ।

फिर आंटी अपने घर गईं और नाईटी पहन कर आ गईं।
मैं तो निक्कर में ही था और ऊपर से टी:-शर्ट पहन रखी थी।
मैंने नीचे चटाई बिछाई और आंटी को कहा:- लेट जाओ,,

फिर मैंने तेल की बोतल निकाली और उनके पैरों से स्टार्ट हो गया।

उनकी नाईटी को मैंने घुटनों तक कर दिया। क्या मस्त टाँगें थीं उनकी,, चिकनी टाँगें देखते ही मेरा लंड एकदम टाइट हो गया। जैसे अभी ही पैन्ट से बाहर निकल आएगा।
तभी मैंने आंटी से कहा:- आप पेटीकोट खोल दो,, नहीं तो तेल लग जाएगा।

आंटी ने नाईटी उठा कर पेटीकोट खोल दिया। फिर मैं मालिश करते:-करते उनकी जाँघों तक पहुँच गया।
तब वो सिसकारी भरने लगीं,, तो मैंने पूछा:- क्या हुआ?

आंटी ने कुछ नहीं कहा। फिर मैंने आंटी की नाईटी को ऊपर ब्रा तक उठा दिया नीचे उन्होंने ब्लैक कलर की पैन्टी पहनी हुई थी और उनकी पैन्टी भी गीली हो चुकी थी। मेरा हाल तो बहाल हो गया था। जब मैं पेट की मालिश कर रहा था तब कई बार उनकी पैन्टी के अन्दर भी हाथ डाल दिया। तब वो और सिसकारी भरने लगीं।

मैं तो पागल हो गया था,, पर मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैं इन्तजार कर रहा था कि पहले वो कुछ करें। मुझे डर भी लग रहा था।

जब मैं गले वहाँ तक पहुँचने वाला था,, तब मैंने आंटी से कहा:- आंटी नाईटी उतार दो।
तब आंटी ने मादकता से कहा:- तुम खुद ही उतार दो,,

फिर मैंने उनकी नाईटी को उतार दिया। अब आंटी मेरे सामने खाली ब्लैक कलर की ब्रा:-पैन्टी में थीं और सिसकारी भर रही थीं।

मैंने पूछा:- कुछ रिलीफ मिल रहा है या नहीं?
तो आंटी ने कहा:- हाँ बहुत मिल रहा है,, और अच्छा भी लग रहा है,,

मैं फिर शुरू हो गया। मैंने आंटी के क्लीवेज के बीच में 20 मिनट मसाज किया और जो उनके मम्मे थे,, वो तो ऐसे लग रहे थे,, कि मानो ब्रा फाड़ कर निकल जाएंगे,, और बहुत सारा दूध भी पीने को मिलेगा।

तभी आंटी उल्टी हो गईं और बोलीं:- बेटा क्यों तकलीफ़ झेल रहे हो,, लो मेरी ब्रा खोल दो,, नहीं तो ब्रा में भी तेल लग जाएगा और तुम्हें भी परेशानी नहीं होगी।

मैं भी यही चाहता था,, जैसे ही मैंने ब्रा को खोला तो आंटी की चूचियां आज़ाद हो गईं और उनके चूचुक भी ऐसे कड़क हो गए कि जैसे कोई एक साल के बच्चे की नुन्नी खड़ी हो जाती है।

मैंने 20 मिनट तक आंटी के मम्मों की मालिश की,, आंटी तो मानो पागल सी हो गई थीं। मेरे लंड का तो बुरा हाल हो चुका था। उनकी नज़र भी बार:-बार मेरे लण्ड की तरफ ही जा रही थी।

फिर मैंने आंटी से कहा:- आप उल्टा हो जाओ,,

वे औंधी हो गईं,, मैंने पीठ की मालिश की,, तब आंटी ने खुलते हुए कहा:- मेरे कूल्हों की भी मालिश कर दो।
मैं भी यही चाहता था,, तब मैंने कहा:- कूल्हों की मालिश करवाने के लिए आपको अपनी पैन्टी भी उतारनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा:- तो उतार दो न,, अब बचा ही क्या तुमसे छुपाने के लिए।

फिर मैंने उनका नीचे का ढक्कन भी उतार दिया। मैंने उनके चूतड़ों की मालिश चालू की और बार:-बार मेरा हाथ उनकी चूत में जाने लगा। कई बार तो उनकी गाण्ड के छेद में उंगली डाल दी और कई बार उनकी चूत में भी उंगली कर देता था तो वो एकदम से चीख उठतीं।
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फिर जब आंटी को मैंने चित्त किया,, तो में देखता ही रह गया। उनकी चूत तो पूरी गीली हो चुकी थी और पूरी क्लीन शेव्ड चूत थी।
अब मैं आंटी की चूत के अगल:-बगल की मालिश कर रहा था,, आंटी की चूत रो रही थी और उसी के चलते अचानक उन्होंने मेरे लंड को कोई पकड़ लिया।

पहले तो मैं एकदम से घबरा गया,, पर देखा तो आंटी मेरी चैन खोल कर लंड को सहलाने लगी थीं।
अब मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने तुरंत अपना निक्कर खोल दिया और टी:- शर्ट को भी उतार दिया। मैं भी पूरा नंगा हो चुका था।
फिर आंटी मेरी लंड को मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं।
मैं तो पागल हो गया था,, क्योंकि पहली बार कोई मेरे लंड को चूस रहा था।

फिर हम लोग 69 की अवस्था में आ गए और 15 मिनट ऐसे ही एक:-दूसरे की चूस रहे थे। वो एक बार झड़ चुकी थीं और मैं भी,, हम दोनों ने एक:-दूसरे के माल को पिया और एक:-दूसरे के बाहों में लिपट कर लेट गए। फिर हमने होंठों से होंठों को मिला कर जबरदस्त किस किया।

काफ़ी देर तक चूमा:-चाटी हुई और मैंने उनके मम्मों को भी बहुत मसला। फिर मेरा लंड दुबारा से खड़ा हो गया था।
अब आंटी ने कहा:- आरव,, अब और नहीं रहा जाता,, मेरी जान, अब चोद डालो… बना दो आज इसे भोसड़ा,,

मैं उनकी जाँघों के बीच आकर बैठ गया और एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया। वो एकदम से इस हमले से चीख उठीं।
तभी मैंने उनको चूम कर दम से चोदना चालू कर दिया, वो दर्द से तड़फते हुए कहने लगीं:- ओह्ह,, निकाल लो,, अपना लंड,, बहुत दर्द हो रहा है,,
वो पिछले एक साल से नहीं चुदी थीं,, यह बात उसने बाद में बताई थी।

फिर मैं उनकी चूत में अपना लौड़ा डाले वैसे ही कुछ देर पड़ा रहा। फिर जब उनका दर्द कुछ कम हुआ,, तो मैंने झटके मारना शुरू किए। वो अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर मेरे लण्ड पर ठोकर देने लगीं,,
हम दोनों ने काफ़ी देर तक धकापेल चुदाई का मजा लिया, उसी चुदाई के दौरान वो 3 बार झड़ चुकी थीं,,
उसके बाद मैं भी उनकी चूत में ही झड़ गया मैंने उनकी सहमति से ही उनकी चूत में पानी छोड़ दिया था।

इसके बाद तो आंटी मेरे लौड़े की पक्की जुगाड़ बन गई थीं।

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