मेरी अनछुई चुत

दोस्तों मेरी एक अनछुई चूत के बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे क्योंकि ऐसे एक लड़की ही समझ सकती है। जब लड़की जवानी में कदम रखती है तब उसके साथ कुछ अलग ही होने लगता है। मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। आपको बता दूँ की मैं अपने घर में इकलौती लड़की हूँ, अमीर घर से होने के कारण लाड़ प्यार ने मुझे बचपन से ही जिद्दी बना दिया था, मैं हर काम में अपनी मनमानी करती थी। उन दिनों मैं सेक्स के बारे में कम ही जानती थी पर कॉलेज तक आते आते मुझे चूत और लंड के बारे में थोड़ा बहुत मालूम हो गया था।

मेरी मम्मी की नई नई शादी हुई थी… जी सही सुना आपने!!

पिछले साल मेरे पापा ने शेयर मार्किट में पैसा लगाया था, उनको बहुत नुकसान हुआ तो उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।

कुछ ही महीनों बाद मम्मी ने अपने एक कॉलेज के टाइम के दोस्त से शादी की थी जो पेशे से डॉक्टर है। खैर जो लोग मुझे पहले से नहीं जानते मुझे उनको बात दूं, उन दिनों मैं जवान होती एक कच्ची उम्र की चंचल लड़की थी। एकदम भरपूर हुस्न की मालकिन… मेरा रंग हल्का गुलाबी है।

हमारे कालोनी के लड़के मुझे देखकर गंदे-गंदे इशारे करते और अपने लंड पर हाथ फेरते हुए ‘हेमा रानी… पियोगी पानी?’ बोलते, मैं पलटकर देखती, कोई जवाब नहीं देती, सिर्फ मुस्कुरा देती, जिससे उनकी हिम्मत और बढ़ जाती। चेहरे पर चश्मा चढ़ाए मिनी स्कार्ट में जब मैं अपनी एक्टिवा से कोचिंग के लिए निकलती थी तो कई लड़के बाइक से मेरा पीछा किया करते थे।

उनमें एक लड़का जो मेरे स्कूल का था, पुनीत मुझे बहुत पसंद था, मैं उसको धीरे धीरे लाइन देने लगी, मेरी उससे दोस्ती हो गई।

मैं नासमझ कच्ची उम्र, बचपन की चड्डी से निकलकर जवानी की पैंटी में कदम रख रही थी, थोड़ी दुबली पतली थी, सीने पर उभार भी आना शुरू हुआ था।
हम दोनों चांदनी चौक में पार्क में मिलते, पुनीत झाड़ियों में मुझे ले जाकर मेरी अधपकी चूचियों से खेलता, उनको दबाता, मसलता।

कभी कभी मुँह भी लगा देता था। मैं सीत्कार उठती। वह मेरा सफ़ेद शर्ट खोल देता तो कभी मेरी नीली स्कर्ट को ऊपर करके मेरी चड्डी में हाथ डाल देता था, मैं आँखें बंद किये सिसकारियाँ भरती रहती थी।

फिर एक दिन मैं पुनीत के साथ एक खाली क्लासरूम में थी, पीछे कोने की सीट पर बैठे हम टैब पर ब्लू फिल्म देखते हुए हम दोनों पूरी तरह से प्यार में डूबे हुए थे। फिल्म में एक बेहद कम उम्र भारतीय लड़की को कुतिया बनाकर, एक काला नीग्रो बेहद वाइल्ड होकर चोद रहा था।

मुझे बड़ा अजीब लग रहा था, इतनी छोटी लड़की इतना मोटा हब्शी लंड कैसे अन्दर ले रही है। सिर पर दो चोटी बंधे मेरे जिस्म पर सिर्फ सफ़ेद खुली हुई स्कूल की शर्ट और नीला स्कर्ट था।

पुनीत बारी बारी से मेरे छोटे छोटे अधखिले बूब्स को मसल रहा था। शायद पुनीत भी काफी दिनों से इसी बात को इंतज़ार कर रहा था, उसने अपनी ज़िप खोली और उसका गोरा मोटा लंड किसी साँप की तरह मेरे सामने लहरा रहा था। अब तक मैंने लंड सिर्फ ब्लू फिल्म और किताबों में ही देखा था।

मैंने एक बार पुनीत के लंड को देखा और फिर अपनी गुलाबी चूत को, अब मुझे सच्ची में डर लगने लगा था! पुनीत समझ गया कि मुझे डर लगने लगा है- डरती क्यों है मेरी हेमा बेबी! बड़े प्यार से पुनीत ने मुझे गोदी में ले लिया और मेरी आँखों में देखने लगा, हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे उसकी और साँसें गर्म और तेज हो चुकी थी।
‘क्लास में कोई आ गया तो बहुत मुश्किल हो जाएगी। शायद हम दोनों को स्कूल से निकाल दिया जाये?’

‘ऐसा कुछ नहीं होगा, तुम बस हाथ सीट से नीचे करके पकड़ कर इसको सहलाओ, अच्छा लगेगा।’ उसने मुझे बेंच पर बैठाया और मेरे हाथो में अपने लंड को पकड़ा दिया और बोला- जैसे ब्लू फिल्म में देखा है, बिल्कुल वैसे ही चूसो।

मैंने पुनीत का लंड अपने हाथों में ले लिया और उसको मस्ती में सहलाने लगी।

पुनीत का लंड तुरंत खड़ा हो गया- हेमा! मुँह में ले न यार…

‘पागल हो क्या? क्लास में ऐसे… मुझे डर लगता है पुनीत!’

मैंने मना कर दिया- मुझको ऐसा कुछ नहीं करना है..

लेकिन पुनीत ने मेरा हाथ पकड़ लिया- आई लव यू हेमा! मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ।

मेरे होंठों को चूसने लगा.. तो मैंने कहा- नहीं पुनीत… ये सब ग़लत है… तुम मेरे फ्रेंड हो..

पुनीत ने मेरे कंधे हाथ रख दिया और कहने लगा- देखो हेमा, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ… और जैसे जैसे तुम जवान हो रही हो… मैं तुम्हें और भी प्यार करना चाहता हूँ।

उसने मेरे गाल पर एक चुम्बन कर दिया… मैं शर्मा गई और मैंने कहा- पुनीत प्यार तो मैं भी तुमसे करती हूँ… पर अगर किसी को पता चल गया… तो बहुत बुरा होगा।

पुनीत बोला- अरे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा..

मैं तो वैसे ही पोर्न मूवी में उस भारतीय लड़की की चुदाई देख कर गर्म हो चुकी थी… मैंने ज्यादा नाटक नहीं किया।

‘कुछ नहीं होगा धीरे से चूम कर देख!’ कहते हुए पुनीत ने अपना लंड मेरे होंठों पर रख दिया।

और फिर मैंने यहाँ वहां देख कर डरते हुए पुनीत के गोरे लंड का सुपारा अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो पुनीत ने मेरे बालों को पकड़कर मेरे मुँह को पीछे खींचा और अपने दूसरे हाथ से मेरा मुँह खोलकर अपने लंड को पूरा मेरे मुँह में घुसा दिया।
पुनीत का लंड इतना बड़ा और मोटा था, कि वो मेरे गले तक उतर गया और फिर पुनीत ने मेरे मुँह को पकड़ लिया और अपनी गांड को हिलाकर मेरे मुँह को चोदने लगा। मेरी आँखों से आंसू निकल रहे थे और मेरे मुँह से घुँ घूँ खों खो! करके आवाज़।

मुझे बड़ा दर्द हो रहा था, उसका लम्बा मोटा लंड जड़ तक मेरे मुँह में था, वह अपने दोनों हाथों से मेरी चोटियों को पकड़कर मेरे सिर को दबाये हुए था।

ऐसा लगा मुझे कि कुछ ही देर में मैं मरने वाली हूँ लेकिन पुनीत को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था, वो बस कसम खा के आया था कि स्कूल की इस नन्ही सी मासूम गुलाबी लड़की को आज चुदना सिखाकर ही मानेगा। मैं समझ चुकी थी कि आज यहाँ क्लासरूम में मेरी सील टूटने वाली है।

अब मुझसे से और ज्यादा सहन नहीं हो रहा था और मेरी गुलाबी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी।

फिर उसने धीरे से अपने हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया और कहा- हेमा मैं इनका रस पीना चाहता हूँ!

उसने मेरे शर्ट को ऊपर कर दिया, उसके बाद पुनीत ने मेरी कमर में अपना हाथ डाल दिया, अब मैं भी गर्म हो गई थी, पुनीत मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर दबाने लगा… वो बेरहमी से मम्मों को मसल रहा था।

एक साथ दोनों मम्मों को बुरी तरह मसलने से मैं एकदम से चुदासी हो उठी, पुनीत ने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठों को रख दिए और उन्हें बुरी तरह चूसने लगे।

वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगा था।

फिर पुनीत ने मुझे बेंच से उठाया, डेस्क पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आकर मेरे शर्ट के बटन खोल कर मेरे चूचों को पकड़ लिया।

अब उसने मेरे कपड़े उतारना शुरू किए… पहले मेरी कमीज़ निकाली… फिर मेरी स्कर्ट खींच दी, फिर पुनीत ने मेरी ब्रा भी निकाल दी और वो मेरे तने हुए मम्मों को चूमने-चाटने लगा।
पुनीत बड़ी ही बेहरमी से मेरे चूचों को दबा रहा था और मेरे गुलाबी निप्पलों को मसल रहा था। उसने अब मुँह को मेरे निप्पलों पर लगा लिया और उसको तेजी से चूसने लगा और उनको किसी जानवर की तरह काटने लगा।

पुनीत के साथ ये करते हुए बहुत सेक्सी लग रहा था..

मैं अपने दोस्त के साथ नंगी थी, पुनीत मेरे मम्मों को मुँह में पूरा भर के चूस रहा था और अपने एक हाथ से मेरी चूत को भी सहला रहा था।

थोड़ी देर बाद पुनीत ने मेरी अनछुई चिकनी-चिकनी जाँघें चूम लीं… मैं सिहर उठी! पुनीत पागलों की तरह मेरी जाँघों को अपने मुँह से सहला रहा था और चूम रहा था।

फ़िर उसने मेरी लाल पैंटी भी उतार दी मेरी बिना बालों वाली अधखिली गोरी गुलाबी चूत को देखते ही वो एकदम से चकित रह गया और बोला- वाह अभी तो ज्यादा बाल भी नहीं आये हैं, एकदम गोरी मासूम छोटी सी पुसी है तुम्हारी!

मैं हँस दी..

मेरे पूरी चूत पुनीत ने हाथ में थाम ली और मेरी पूरी चूत को दबा दिया, चूत को सहलाता हुआ पुनीत बोला- हाय हेमा… मेरी जान… क्या चीज़ है तू… क्या मस्त माल है… हहमम्म ससस्स हहा..

पुनीत ने अन्दर तक मुँह डाल कर मेरी जाँघें बड़े प्यार से चूमी और सहलाते हुए मेरी जाँघों को फैला दिया।

वो मेरी चूत को बुरी तरह मसलने लगा, मुझे बहुत मज़ा आने लगा… मैं सिसकारी भरने लगी..

पुनीत और जोश में चूत को मसलने लगा… उसने मसल-मसल कर मेरी चूत लाल कर दी थी।

उसके इस तरह से रगड़ने से मेरी मुन्नी 2-3 बार झड़ चुकी थी, बहुत गीला हो गया था, पुनीत के हाथ भी गीले हो गए थे… सारा पानी निकल बाहर रहा था, मैं निढाल हो रही थी।

फिर पुनीत ने मेरी चूत की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और मेरी कसी हुई चूत के होंठों को अपने होंठों से दबा कर बुरी तरह चूसने लगा।

मैं तो बस कसमसाती रह गई… मैं तड़पती मचलती हुई ‘आआहह… आअहह… पुनीत.. पुनीत… हाय… उईई… आहह..’ कहती रही और पुनीत चूस चूस कर मेरी अधपकी जवान चूत का रस पीता गया।

बड़ी देर तक मेरी चूत की चुसाई की, मैं पागल हो गई थी।
तभी पुनीत ने अपने कपड़े उतारे और खुद नंगे हो गया और उसका लंड फड़फड़ा उठा… करीब 7 या 8 इंच का लोहे जैसा सरिया था। मैंने कहा- पुनीत… यह तो बहुत बड़ा और मोटा है… ये मेरी चूत में नहीं जा पाएगा!

‘यार दर्द होता होगा बहुत?’ मैंने डरते हुए कहा।

पुनीत ने कहा- हेमा तू फिकर मत कर… फिर मैं तेरे से प्यार करता हूँ… तुझे कुछ नहीं होने दूँगा!

उसने अपना लंड मेरी फुद्दी की तरफ बढ़ाया… मैं सोच रही थी जो हालत अभी उस मूवी वाली लड़की की थी… अब मेरी होने वाली है!

पुनीत के लंड के टच करते ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, मैं बुरी तरह तड़प रही थी।

5 मिनट तक पुनीत मेरी चूत को अपने लंड से सहलाता रहा… फिर उसने मेरी फुद्दी पर हल्का सा ज़ोर लगाया… तो मेरी चीख निकल गई, उसका लंड अन्दर नहीं जा रहा था।

पुनीत ने कहा- थोड़ा दर्द होगा… लेकिन फिर ठीक हो जाएगा।

मैंने मंत्रमुग्ध कहा- ओके… लेकिन पुनीत प्लीज़ आराम से करना!

पुनीत ने ज़ोर से अन्दर डाला… तो उसका आधा लंड मेरे अन्दर कोई चीज़ तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया!

मेरी आँखों में आँसू आ गए- आह… मैं मर जाऊँगी पुनीत … प्लीज़ निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… आह ओफ… ममाआ..

यह कहते हुए मैं गिड़गिड़ाने लगी… पर वो नहीं माना और उसने मेरे होंठों पर अपने होंठों लगा दिए।

वो मेरे होंठों को चूसने लगा और अपने लौड़े को मेरी चूत में ऐसे ही डाले रखा। मेरी चूत से खून निकल रहा था और मैं बुरी तरह तड़प रही थी।

वह कहने लगा- हेमा, तू मेरे लिए थोड़ा सहन कर ले प्लीज़!

मैंने हल्के स्वर में कहा- पुनीत आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ!

फिर पुनीत ने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक घुस गया।

मैं तड़प उठी और ‘आह… ओह्ह… पुनीत मैं मर गई..’ कहने लगी।

पुनीत मुझे तसल्ली देता रहा और 5 मिनट तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा, वो मेरे दूध चूसता रहा।

लगभग 5 मिनट बाद उसने धीरे धीरे झटके मारना शुरू किए।

मैं- आह्ह… पुनीत… मज़ा आ रहा है!
इस बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी और वो यूँ ही मेरे होंठों को चूसता हुआ मुझे चोदता रहा।

लगभग 10 मिनट बाद पुनीत ने अपना सारा माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया।

मेरी चूत पानी और खून छोड़ती हुई बुरी तरह फड़फड़ा रही थी, मेरी चूत का हाल-बेहाल हो चुका था।

इस तरह से मैं पहली बार अपने बॉयफ्रेंड पुनीत से चुदवाई थी।

एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था, मैंने कॉल करके पुनीत को बुलाया हुआ था, हम दोनों पूरी तरह से प्यार भरी चुदाई के खेल में डूबे हुए थे।

तभी दरवाज़ा खोलकर किसी के दबे पाँव अन्दर आने की आवाज़ हुई।

इससे पहले कि हम दोनों अपने आप को सम्भालते, मम्मी ने घर में घुसते ही हम दोनों को देख लिया। मैं तुरंत बेड से उतर कर वाशरूम की तरफ भाग गई। मेरे जिस्म पर मोज़े और खुली हुई सफ़ेद शर्ट थी।

मम्मी ने पुनीत को बहुत बुरा भला कहा, उसको मम्मी ने थप्पड़ भी लगा दिए थे।

शाम को बात पापा तक पहुँच गई, उन्होंने ‘अभी बच्ची है!’ कहकर मुझे सीने से लगा लिया।

इस घटना के बाद पुनीत अचानक कहीं चला गया, फिर नहीं आया।

मम्मी की वजह से मैंने अपने बॉयफ्रेंड को खो दिया था लेकिन पुनीत की मुहब्बत मेरे जिस्म पर साफ दिख रही थी, कच्ची उम्र में भी मेरा फिगर 36-27-38 हो गया था।

पापा की मौत के बाद मेरा घर में रहना मम्मी को पसंद नहीं था, बात बात पर मेरी उनसे लड़ाई होती थी, शायद मैं उनके वैवाहिक या सेक्स जीवन में कवाब में हड्डी की तरह हो गई थी।

अभी मेरे नए पापा में और मम्मी में नया-नया जोश भी था।

मम्मी पापा का कमरा ऊपर था, नीचे सिर्फ़ एक कमरा और बैठक थी, मैं बैठक में ही सोती थी।

मेरे चूतड़ थोड़े से भारी हैं और कुछ पीछे उभरे हुए भी हैं… मेरे ब्लू टाईट शॉर्ट्स में चूतड़ बड़े ही सेक्सी लगते हैं। मेरे चूतड़ों की दरार में घुसी पैन्ट देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता था…

फिर पापा की नजर तो मेरे पर ही रहती थी, वह जवान ही थे और कभी-कभी मेरे चूतड़ों पर हाथ मार कर अपनी भड़ास भी निकाल लेते थे।
उनकी यह हरकत मेरी शरीर को कम्पकपा देती थी।

‘मेरी सेलेना गोम्स…’ कहकर वह हँस देते।

मैं भी उनको कामुक मुस्कान दे देती थी जिससे मम्मी चिढ़ जाती थीं, उनको मेरा पापा के साथ हंसी मज़ाक पसंद नहीं था।

मुझे मम्मी से बदला लेना था, मैं अन्दर ही अन्दर जल रही थी, कैसे बदला लूं इस बात को लेकर सोचती रहती थी।

मम्मी की अनुपस्थिति में पापा मुझसे छेड़छाड़ भी कर लिया करते थे और मैं भी पापा को आँखों में इशारा करके मज़ा लेती थी। मैं उन्हें जान-बूझ कर के और छेड़ देती थी।

रात को हम डिनर करते थे, फिर पापा और मम्मी जल्दी ही अपने कमरे में चले जाते थे।

लगभग दस बजे मैं अकेली हो जाती थी… और कम्प्यूटर पर कुछ-कुछ खेलती रहती थी।

ऐसे ही एक रात को मैं अकेली रूम में बोर हो रही थी… नींद भी नहीं आ रही थी… तो मैं घर की छत पर चली आई।

ठण्डी हवा में कुछ देर घूमती रही, फिर सोने के लिये नीचे आई।

जैसे ही मम्मी के कमरे के पास से निकली मुझे ससकारियों की आवाज आई। ऐसी सिसकारियाँ मैं पहचानती थी… जाहिर था कि मम्मी चुद रही थी… मेरी नज़र अचानक ही खिड़की पर पड़ी… वो थोड़ी सी खुली थी।

मेरी जिज्ञासा जागने लगी, दबे कदमों से मैं खिड़की की ओर बढ़ गई… मेरा दिल धक से रह गया…

मम्मी बिस्तर पर सलवार खोले घोड़ी बनी हुई थी और पापा पीछे से उसकी गोरी गांड चोद रहे थे।

मुझे सिरहन सी उठने लगी।

पापा ने अब मम्मी के बोबे मसलने चालू कर दिये थे… मेरे हाथ स्वत: ही मेरे स्तनों पर आ गये… मेरे चेहरे पर पसीना आने लगा… पापा को मम्मी की चुदाई करते पहली बार देखा तो मेरी चूत भी गीली होने लगी थी।

इतने में पापा झड़ने लगे… उसके वीर्य की पिचकारी मम्मी के सुन्दर गोल गोल चूतड़ों पर पड़ रही थी।

मैं दबे पाँव वहाँ से हट गई और नीचे की सीढ़ियां उतर गई।

मेरी साँसें चढ़ी हुई थीं, धड़कनें भी बढ़ी हुई थीं। दिल के धड़कन की आवाज़ कानों तक आ रही थी।
मैं बिस्तर पर आकर लेट गई… पर नींद ही नहीं आ रही थी, मुझे रह रह कर मम्मी पापा की चुदाई के सीन याद आ रहे थे।

मैं बेचैन हो उठी और अपनी चूत में उंगली घुसा दी… और ज़ोर-ज़ोर से अन्दर घुमाने लगी, कुछ ही देर में मैं झड़ गई।

मुझे मम्मी से बदला लेने के लिए युक्ति मिल गई थी, दिल कुछ शान्त हुआ।

सुबह मैं उठी तो पापा दरवाजा खटखटा रहे थे।

मैं तुरन्त उठी और कहा- दरवाजा खुला है… पापा!

पापा चाय ले कर अन्दर आ गये, उनके हाथ में दो प्याले थे, वो वहीं कुर्सी खींच कर बैठ गये- गुड मोर्निंग मेरी बेबी, मजा आया क्या?

मैं उछल पड़ी… क्या पापा ने कल रात को देख लिया था?

‘जी क्या… किसमें… मैं समझी नहीं…?’ मैं घबरा गई।

‘वो बाद में… आज तुम्हारी मम्मी को दो दिन के लिए नानी के घर जाना है… अब आपको घर संभालना है।’

‘हम लड़कियाँ यही तो करती हैं ना… फिर और क्या क्या संभालना पड़ेगा?’ मैंने पापा पर कटाक्ष किया।

‘बस यही है और मैं हूँ… संभाल लेगी क्या?’ पापा भी दुहरी मार वाला मज़ाक कर रहे थे।

‘पापा… मजाक अच्छा करते हो!’ मैंने अपनी चाय पी कर प्याला मेज़ पर रख दिया।

मैंने उठने के लिए बिस्तर पर से जैसे ही पाँव उठाए, मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी नन्ही सी नंगी चूत पापा को नज़र आ गई।

मैंने जानबूझ कर पापा को एक झटका दे दिया, मुझे लगा कि आज ही इसकी ज़रूरत है।

पापा एकटक मुझे देखने लगे… मुझे एक नज़र में पता चल गया कि मेरा जादू चल गया।

मैंने कहा- पापा… मुझे ऐसे क्या देख रहे हो?

‘कुछ नहीं… सवेरे-सवेरे अच्छी चीजों के दर्शन करना शुभ होता है!’

मैं तुरंत पापा का इशारा समझ गई… और मन ही मन मुस्कुरा उठी।

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