मेरी चूत में केले जैसा टेड़ा लण्ड

Antarvasna hindi, दोस्तों और प्यारी सहेलियों मेरी चिकनी चूत में एक केले जैसा मोटा और टेड़ा लण्ड। एक मस्त सेक्सी कहानी जिसका वहला पार्ट अगर अपने नहीं पढ़ा तो होमपेज पे जाके और पहला पार्ट सेलेक्ट करके पढ़ लीजिये। अब उसके आगे। उसपर मेरी डांट का और मेरी प्रार्थना का कोई असर नहीं हो रहा था.. बल्कि मेरी हर डांट पर वो और ज्यादा चुदासा होता ज़ा रहा था,वो बोले ज़ा रहा था- मैम आप मुझे पागल कर देती हो.. मैं आपका दीवाना हूँ… मैम प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता.. यह बात सिर्फ़ हम दोनों में ही सीक्रेट रहेगी.. उसके लगातार चूमने और मेरे मम्मों को सहलाने से मुझे चुदास तो उठने लगी थी.. पर क्या एक स्टूडेंट से चुदाई करना ठीक रहेगा..

मैं अभी यही सोच रही थी। मैं तब 3 साल पहले तक अपने कॉलेज के दोस्त से खूब चुदती थी और इसके स्पर्श ने मेरे जिस्म में एक नया करेंट सा जगा दिया था.. मेरे सारे जिस्म में एक नई लहर सी दौड़ने लग गई थी, मैं अब सिर्फ़ दिखावे के लिए उसका विरोध कर रही थी.. अब मेरे अन्दर बैठा हुआ कामदेव भी जाग रहा था और मैं उसके इस कामाक्रमण का मन ही मन स्वागत कर रही थी और चाह रही थी कि वो मुझे और अधिक ताक़त से कुचले.. व मसले.. मुझे थोड़ी देर में ही असीम आनन्द की अनुभूति हो रही थी.. मैंने अपने आँखें बंद कर ली थीं। वो मेरे सम्पूर्ण शरीर को बेतहाशा चूमे ज़ा रहा था.. उसने अपनी दो ऊँगलियों को मेरी गाण्ड के छेद के पास फिराना शुरू कर दिया और उसकी ऊँगलियाँ मेरी चूत के छेद के ऊपर से होती हुए मेरी झांटों को सहलाते हुए ऊपर की ओर ले जा रहा था। मैं अमन की इस तरह मुझे गरम करने के तरीके से बहुत खुश हो रही थी और चाह रही थी कि वो मुझे और जोर से मसले-कुचले.. मुझे एक फूल की तरह रौंद दे…

अचानक मुझे उसके हाथ फिरना बन्द से लगे.. तो मैंने जरा आँख खोल कर देखा.. वो भी खुद को नंगा कर रहा था और उसका 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा टेड़ा केलानुमा लवड़ा ऊपर छत की तरफ मुँह उठाए हुए था। उसका भीमकाय केलानुमा लण्ड देखकर मैं हैरान रह गई। मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि 18 साल के लड़के का लौड़ा इतना मज़बूत किस्म का भी हो सकता है.. और फिर टेड़ा.. केलानुमा लण्ड तो मेरी कमज़ोरी था। इस प्रकार के लण्ड से चुदने का स्वर्गिक आनन्द जैसा स्वाद सिर्फ़ वो ही बता सकता है.. जिसकी चूत और गाण्ड ऐसे मस्त लौड़े से खूब चुदी हो। मेरे कॉलेज के ब्वॉय-फ्रेंड का लौड़ा भी ऐसा ही था.. पर ये तो उससे कहीं अधिक लंबा और मोटा लण्ड था… अब मैं अब मन ही मन चाह रही थी कि जल्दी से ये लौड़ा मेरी चूत में चला ज़ाए। मैं उसकी बाँहों में पूरी तरह से समर्पण कर चुकी थी.. मुझे उसका हर स्पर्श अब आनन्द दे रहा था.. वो मेरे पाँव की तरफ गया और अपने मुँह से पहले मेरे दोनों पाँवों को चूमा.. फिर और ऊपर आया और मेरे टखनों को चूमा.. उसने ज्यूँ ही मेरी दोनों.. केले के तने के समान.. सफेद.. गोरी.. मुलायम जाँघों को बहुत ही प्यार से चूमा.. तो मेरे अन्दर एक कामुक सी सिहरन हुई.. वो चूमने में तो मेरे पहले ब्वॉय-फ्रेंड का भी बाप लग रहा था। अब मैं होश खो चुकी थी.. मैंने उसके सर को बालों से खींच कर.. उसका मुँह मेरे टपकती हुई गरम चूत पर लगा दिया। अब वो सटासट मेरी चूत चूस रहा था.. ‘आह्ह.. अह…’ मेरे मुँह से सीत्कारें निकल रही थीं और मैं उसका मुँह और जीभ अपनी चूत के अन्दर अपनी हाथों से दबा रही थी। तभी मैंने खुद बिस्तर से तकिया उठाया और अपनी गाण्ड के नीचे लगा कर अपने पैरों को फैला लिया।

अब मेरी चूत का मुँह अच्छी तरह खुल गया था और मैं उसकी जीभ को अब ठीक अपनी चूत के अन्दर आता-जाता हुआ महसूस कर रही थी। कमरे में उसकी जीभ की ‘चप..चप..’ की आवाज़ आ रही थी.. मेरे आनन्द का तो तो अब कोई ठिकाना ही न रहा था। ‘आह्ह.. आआह्ह.. मेरे राजा और जोर से चूसो मेरी चूत को.. आआअहह…’ इस 5-7 मिनट की ओरल चुदाई के बाद मैं बहुत जोर से चीख मार कर झड़ गई, हम दोनों हाँफ रहे थे और वहाँ की ठंडक में भी हम दोनों पसीने से सराबोर थे.. अमन मेरे बगल में आकर लेट गया और उसने मुझको अपनी तरफ घुमा लिया। उसने मेरे दोनों मोटे और नुकीले मम्मों को अपने मुँह में भर लिया और बार-बार अदल-बदल कर मेरे मम्मों को चूस रहा था, उसका 8 इंच लम्बा और 3 का खड़ा लौड़ा मेरी टाँगों के बीच में फंसा हुआ रगड़ मार रहा था। मैं भी अब बेतहाशा उसको चूम रही थी उसकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी और कह रही थी- मेरे राजा.. तुम इतना अच्छा चूसते हो.. मुझे सपने में भी गुमान नहीं था.. इस फोरप्ले को हमने कोई 20-25 मिनट तक खेला.. अब मैं उसके लण्ड को अपने हाथों से सहला रही थी। कुछ ही देर में हम दोनों फिर से पूरी तरह से गरम हो गए थे। अब अमन उठा.. और उसने मुझे अपनी मजबूत बाँहों में ले लिया और बिस्तर के पास खड़ा करके.. मुझे घोड़ी बना दिया, उसने पहले मेरी गाण्ड और चूत को 2-3 मिनट तक चूसा.. फिर अपने हाथ पर थूक लिया और वो थूक उसने मेरी चूत पर और अपने लण्ड पर लगा लिया।

फिर उसने अपने लण्ड को एक तेज झटका दिया.. उसका केले जैसा औजार मेरी चूत और गाण्ड के बीच के स्थान पर टकराया और फिर लण्ड मुड़ कर ऊपर की तरफ चला गया। उसने फिर से लण्ड को चूत के छेद पर सैट किया और फिर दूसरा धक्का जोर से मारा.. इस बार लण्ड फिर से फिसल कर गाण्ड के आस-पास फिसल कर रुक गया… तब उसको गुस्सा आ गया.. वो बोला- अब देखता हूँ.. साली कुतिया मैम.. तेरी चूत को इस बार फाड़ दूँगा। मैं भी अब जल्दी से उसका खम्बे जैसे हथियार को अपनी लपलपाती चूत में लेना चाहती थी.. इसलिए मैंने उसको हाथों में अपनी एक चूची पकड़ा दी और पैरो को थोड़ा और फैला कर.. अपने एक हाथ से उसके गरम हथियार को अपनी टपकती हुई चूत पर सैट किया और अमन को निशाना लगाने के लिए उत्साहित किया- ..अब डाल भोसड़ी के.. वो थोड़ा पीछे हटा और उसने गुस्से में आते हुए तेजी से एक झटका दिया और उसका हलब्बी लण्ड मेरी चूत में सरसराता हुआ आधे से अधिक चला गया.. मैं उसके लवड़े के इस प्रहार से हुए दर्द से बिलबिला उठी.. तभी उसने लण्ड को कोई 3 इंच बाहर खींचा और एक तेज झटके से पूरा लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया.. मैं दर्द से चिल्ला रही थी.. पर वो तो साला मुझे एक कुतिया की तरह चोदे ज़ा रहा था, अब मुझे भी उसके लण्ड का अपनी चूत के अन्दर-बाहर आने-जाने में मज़ा आने लगा था।

वो बोले ज़ा रहा था- तू मैम नहीं.. कुतिया है बहन की लौड़ी.. हरामजादी… तू तो पहले से ही चुदी हुई है.. आह्ह.. मेरी राण्ड मैम… आज़ तू भी याद करेगी की दार्जिलिंग में अमन का लंबा मोटा और सख्त लौड़ा मिला था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! मैं भी मस्ती में बोल रही थी- तेरे जैसे कुत्तों ने ही तो मेरी चूत चोद-चोद कर फाड़ दी है.. आह.. तू तो बस चोद दे मुझे राजा.. उसकी हर गाली मुझे ज्यादा मदहोश किए ज़ा रही थी… मैं भी उसके हर झटके के जबाव में अपनी गाण्ड को पीछे कर देती थी.. ताकि उसका लोहे जैसा गरम हथियार मेरी चूत में ज्यादा से ज्यादा मज़ा दे सके। मैं बोले ज़ा रही थी- चोद अमन.. चोद अपनी गुरू मैम को.. अपनी बहन की लौड़ी मैम को.. इसस्स तरह चोद.. अपना लण्ड इतने जोर के झटके से पेल कि लण्ड चूत में से जाए और गाण्ड में से बाहर निकल आए.. आह्ह.. वो बोले ज़ा रहा था- तू कुतिया.. मैम कहाँ छुपी हुई थी.. साली छिनाल.. इतना सेक्सी बदन लेकर.. आह्ह.. तू मैम नहीं है.. तू तो मुझे चुदाई करने की मशीन है हरामिन..

मैं जब भी क्लास में तुझे देखता हूँ.. मैं अपनी पढ़ाई भूल जाता हूँ और मुझे यूँ लगता है कि तुझे वहीं पटक कर चोद दूँ.. आह.. साली ले ले.. मेरा पूरा लवड़ा खा.. मादरचोदी.. आह्ह.. उसकी इस धकापेल चुदाई से मैं दो बार झड़ चुकी थी, वो गालियाँ बकता हुआ.. कोई 20 मिनट की चुदाई के बाद बोला- मैं अब झड़ने वाला हूँ.. आअहहुउ.. मेरी चूत की दीवारों से जैसे पानी की धार से बहने लग गई थी और मैं अपने सुख को ‘अईई.. आआह.. अहह..’ के शब्दों से बयान कर रही थी.. ‘तो..’ मैंने उसे उकसाया। अमन फिर बोला- मैं झड़ने वाला हूँ.. मेरी कुतिया मैम क्या… तेरी चूत में ही झड़ ज़ाऊँ.. जल्दी बोल..? मैं बोली- नहीं.. मेरे मुँह में अपना हथियार डाल दे.. अपने लण्ड की रबड़ी खिला दे मेरे राजा.. तभी मैं चीख मार कर फिर से झड़ गई.. अमन ने अपना खड़ा लौड़ा.. ज़ो मेरी चूत के जूस से पूरा सना और भीगा हुआ था.. तुरंत मेरी चूत से निकाला.. मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरे मुँह में ठूंस दिया। उसके लण्ड से कोई 6-7 पिचकारियाँ निकलीं.. जो कि मैं सारा अपने मुँह में लेकर पी गई। थोड़ी सी रबड़ी.. मेरे मुँह से बाहर आ गई..

तो वो लपक कर अमन ने अपने हाथ से साफ कर ली और चाट गया.. मैं निढाल सी होकर बोले ज़ा रही थी- आह्ह. क्या स्वर्गिक अमृत जैसा स्वाद है तेरी रबड़ी का.. मेरे प्यासे कुत्ते.. फिर अमन मुझे अपने बाँहों में उठा कर बाथरूम ले गया और फिर वहाँ हमने एक-दूसरे के जिस्मों को साफ किया.. ऊपर वाला ही जाने कि न जाने कैसे अब मेरे पाँव में कोई दर्द नहीं बचा था। इस चुदाई के बाद कोई एक घंटा हम लोगों ने आराम किया और फिर अमन ने मुझे मिशनरी अवस्था में दुबारा चोदा। तब तक 3 बज़ने वाले थे और हमारे ट्रिप के लोगों के वापिस पहुँचने का वक्त हो गया था.. इसलिए अमन ने मुझे चूमने के बाद अपने कपड़े पहने और अपने कमरे में चला गया। मैं अब बहुत थक गई थी.. इसलिए मैंने भी गाउन पहना और तुरंत सो गई.. उसके बाद वो ट्रिप 6 दिन तक और चला.. पर अमन को मैं देखकर मुस्करा देती थी.. पर वो नीचे नजरें किए हुए मुझे देखता रहता था। मैं कोलकाता वापिस आकर उससे कई बार चुदी.. कभी स्कूल लाइब्रेरी की छत पर.. कभी केमिस्ट्री लैब के स्टोर-रूम में… चूंकि मैं केमिस्ट्री टीचर हूँ.. इसलिए स्टोर-रूम की चाभी मेरी पास ही रहती थी। कभी अमन के एक फ्रेंड के फार्म हाउस पर भी चुदी। अमन ने अपना वायदा निभाया और किसी को कानों-कान हमारी चुदाई के बारे में नहीं बोला.. ये शायद उसकी मेरे लिए इज्जत या प्यार ही कहा जाएगा.. हाँ.. एक बार स्कूल चौकीदार ने हम दोनों को चुदाई के बाद स्कूल लैब के स्टोर-रूम से निकलते हुए देख लिया था.. बस तो उसने हम दोनों को संदेह की निगाह से देखा था..

पर किसी तरह हमने मामले को पढ़ाई से जोड़ कर सुलटा लिया था। अमन आगे की पढ़ाई के लिए राउरकेला चला गया। वो अब वहाँ बी.टेक फाइनल इयर में है। अभी कुछ दिन पहले वो कोलकाता आया था.. तो उसने मुझे फोन किया और मुझे अपने पास बुलाया था और मैं फिर से अभी हाल ही में उससे जबरदस्त तरीके से चुदी हूँ तो मुझे लगा कि आप सभी को अपनी इस दास्तान को लिखूँ.. तो दोस्तो, अब इस कहानी को समाप्त करती हूँ.. मैं इस कहानी लिखते हुए 3 बार झड़ चुकी हूँ.. आप सभी भी मुझको ईमेल करना कि कहानी पढ़ते हुए कितनी बार झड़े.. मैं पाठकों से एक और निवेदन है कि कहानी के ऊपर गंदे से गंदे कमेंट्स लिखिए.. ताकि मैं उनको पढ़कर अपनी अगली चुदाई की और ज्यादा गरम कहानी लिख सकूँ.. इतनी देर तक अपनी चूत में ऊँगली रखने के लिए लड़कियों का.. और अपना लण्ड पकड़े रखने के लिए लड़कों का बहुत धन्यवाद।

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