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मेरी सावली खूबसूरत बीवी 

मेरी शादी ठीक और भारतीय शादियों की तरह हुई जिसमे सारा निर्णय घर के बुजुर्ग लेते है। मुझे बस लड़की की एक तस्वीर भेज दी की देखलो किससे तुम्हे जुड़ना है। मैंने तस्वीर देखि और देख कर निराशा सी हुई . शायद मैं कुछ गलत सोंच रहा था पर हकीकत ये थी की मैंने किसी ऐसी घरेलु और सीधी सधी लड़की की कभी भी जिंदगी में कल्पना नहीं की थी।

घर से जब मुझे फ़ोन आया तो भैय्या ने पूछा की लड़की कैसी लगी। मैंने साफ़-साफ़ दिल की बात उन्हें बतादी। उन्होंने फिर मुझे बताया की पिताजी और माताजी पहले ही उनको हाँ बोल चुके है और अब शादी की तारीख देखि जा रही है। ये सुनकर मुझे बड़ा अजीब सा लगा पर मैं कुछ कर भी नहीं सकता था।

मैंने फिर उस लड़की की तस्वीर को बार बार देख कर अपना मन बनाने की कोसिस करने लगा। पर कुछ दिनों के प्रयास में वो लड़की मुझे कही से भी पसंद नहीं आ रही थी। खुद को मानाने के लिए मैंने उसकी एक बड़ी तस्वीर प्रिंटर से निकली और अपने बिस्तर के ठीक सामने टांग दी की शायद कुछ तो मैं उसमे पसंद कर लू।

एक दिन जब मैं काम से घर पर लौटा तो खाने के बाद मुझे बड़ी थकावट सी लगी और मैं जाके बिस्तर पर लेट गया। अचानक ही मुझे नींद आगई और मैं सो गया। मध्य रात में मुझे कुछ बहार से आवाज़ आई और मेरी नींद टूट गई। फिर मैंने सोने की कोसिस की पर सो नहीं पा रहा था।

कमरे में माध्यम रौशनी थी और उस माध्यम रौशनी में मुझे मेरे बिस्तर के सामने मेरी होने वाली बीवी की तस्वीर नज़र आरही थी। उसकी आँखे कुछ मुझसे जैसे कह रही थी और मैं उसकी ओर ध्यान से देख रहा था। मैंने उसकी आँखों के बाद उसके होंठो को देखा और फिर मोबाइल फ़ोन उठा कर मैंने इंटरनेट चला कर पोर्न वीडियो देखना शुरू कर दिया।

नई सोच

मैंने पोर्न वीडियो में उन लड़कियों को देखा जो मुझे अच्छी नहीं लग रही थी। उसमे मैंने ये पाया की जब तक उन लड़कियों का चेहरा मेरे सामने था तब तक मैं उन्हें शायद पसंद नहीं कर रहा था पर जैसे ही मैं उनके नंगे बदन को देखता वैसे ही मेरे मन परिवर्तन हो जाता। मैंने इस तरह के काफी सारे विडिओ बचे हुवे समय में देखे और सुबह उठ कर एक नए जोश के साथ मैं ऑफिस चला गया।

ऑफिस में अब मुझे मेरी होने वाली बीवी का चेहरा नजर आने लगा। अब तो आलम यह था की मेरा आधा मन शादी के लिए तैयार था पर अब भी मुझे मेरा कुछ हिस्सा मन का बोलता था की जब दुनिया में और भी अच्छी खूबसूरत लड़कियां है तो फिर ये ही क्यों। मैंने इस सवाल को भी दूर करना चाहा और भैय्या को फ़ोन कर के बोल दिया की मैं मेरी होने वाली बीवी से एक बार कही मिलाना चाहता हु।

भैय्या ने वादा किया की वो ऐसा करदेंगे शादी से कुछ दिन पहले पर मैं तो शायद कुछ ही दिनों में मिलाना चाहता था। जब ये बात भैय्या को मैंने बताई तो उन्होंने मुझे उसके घर का पता दे दिया जो की मेरे घर से लगभग तीन घंटे की दुरी पर था। भैय्या ने लगे हाथो किसी तरह उस लड़की का फ़ोन नंबर भी दिलवाडिया और मैंने सही समय देख कर उसे फ़ोन भी किया।

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फिर एक दिन उससे बात करके उससे मिलाने के लिए निकल पड़ा। इस बीच मेरे मन में उसको लेकर कुछ तो अच्छा महसूस हो रहा था क्यूंकि उसकी बाते मुझे बहुत अच्छी लगी और वो मुझसे अच्छे से बात भी करती थी। हालांकि मैं पहले किसी मॉडर्न काम कपड़ो वाली की उम्मीद करता था पर अब पता नहीं क्यों ये श्रिस्टी से श्रेस्ट कोई नहीं लग रहा था।

जब मैं उसके सहर पंहुचा तो उसने मेरे स्वागत बड़े ही अच्छे तरीके से किया। उसने मुझे अपनी कुछ सहेलियों से मिलवाया और फिर मुझे वक़्त भी दिया की मैं उसके साथ अकेले में कुछ बात भी कर सकु। उसकी बात बड़ी ही अच्छी थी। वो मुझसे बेहद खुल करके बोल रही थी और मैं बस सुन ही रहा था।

खूबसूरत बीवी

हाँ, इतना जरूर कहूँगा की वो मुझे तस्वीर के मुकाबले काफी सुन्दर लगी। उसका सवाल रंग ही शयद मुझे बहुत आकर्षित किया जिसके बाद मैं खुद को रोक नहीं पाया ये कहने में की मुझे उससे प्यार हो ही गया है। मैंने फिर उसे मेरे सोंच की पूरी कहानी सुनाई और जब उसने पोर्न वाला किस्सा सुना तो श्रिस्टी ने कहा की उसके वक़्त आने दो वो मुझे सोने ही नहीं देगी।

ये वाकया मेरे अंदर कुछ ऐसा असर कर गया की मैं लौटते वक़्त सिर्फ उसके बारे में ही सोचता रहा। रात भर सो नहीं पाया और बस अब ऐसा लगाने लगा की शादी जल्दी हो जाये। उससे फ़ोन पर अब लगातार बात होने लगी थी और मुझे बेहद ख़ुशी भी मिलती थी उससे बाते करके।

कुछ ऐसे ही वक़्त कटा और मेरी शादी उससे हो गई। सुहाग रात वो बहुत दुखी दिख रही थी इस लिए मैंने अपने अंदर के शैतान को शांत रख कर उसे बस बही में भर कर उसका मन बहलाया। फिर हम साथ में ही सो गए। अगले दिन उसने फिर मुझे अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया।

उसने एक लाल रंग की साड़ी पहनी जिसमे उसका अंग मुझे किसी चुम्बक की तरह अपनी ओर खीच रहा था। साम होते ही मैं अपने आप पर काबू खोया और फिर उसे बाहो में भरने लगा। पर वो मुझे दूर कराती रही ये कहकर की उसे बहुत काम है। पर मैं नहीं समझ पा रहा था की क्या काम करने वाली है वो।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे देखा की उसने ब्लाउज और ब्रा उत्तर दिए है और घर में वो कुछ मटक के चल रही है। इस बार मुझे बिलकुल भी काबू नहीं हो पाया और मैंने उसके साड़ी का पल्लू उत्तर कर उसके खूबसूरत अंगो से खेलते हुवे जवानी के अद्भुत मजे लिए।

अब ये प्रेम हमारे बीच किसी रंग के कारण नहीं बलकि हमारी सोंच के कारण आगे बढ़ा और हम खुसी से एक दूसरे की जरुरतो को बेहद खूबसूरत तरीके से पूरा करते है। वो किसी गोर रंग की लड़की से काफी ज्यादा थी जो मुझे बेहद प्यार करती है। मैंने अब अपनी उस पहली सोंच पर शर्मिंदगी महसूस करता हु की मैं कभी ऐसा भी सोंचता था।

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