अनजान भाभी ने चूत चुदवाई और पैसे भी दिए

Chudai ki kahani, desi kahani, अनजान भाभी ने चूत चुदवाई और साथ ही पैसे भी दिए। मैं मिडल क्लास फैमिली से हु। और चंडीगढ़ में जॉब करता हूँ। मैं आज आपको रियल लाइफ की एक रियल सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मैं बाकी लोगों की तरह यह नहीं कहूँगा कि मेरे लंड का साइज 9 इंच या उससे ज़्यादा है। मैं बस इतना बताना चाहता हूँ कि यह मेरी सच्ची सेक्स स्टोरी है। बात उस टाइम की है जब मेरा फ्रेंड भी चंडीगढ़ में रहता था, वो लड़कियों के मामले में कुछ ज़्यादा ही चालू था, वो मुझे अपनी बातें बताता तो मेरा लंड भी खड़ा हो जाता। एक दिन मैंने उससे मज़ाक में ही बोल दिया- यार मुझे भी किसी का मोबाइल नम्बर दो.. या मेरी भी किसी के साथ सैटिंग करवा दो। तो उसने मुझे एक भाभी का नम्बर दे दिया। पहले तो मुझे उसको कॉल करने में डर लग रहा था.

पर मैंने हिम्मत करके कॉल की। उस तरफ से उस भाभी ने मुझे कॉल करने से मना कर दिया और बोली- मैं जब आपको जानती ही नहीं हूँ तो मैं आपसे बात क्यूँ करूँ? इस पर मैंने कहा- आप बात तो करो.. हमारी दोस्ती भी हो जाएगी। ऐसे ही धीरे-धीरे हम दोनों बात करते रहे। बातचीत से मालूम हुआ कि उसके दो बच्चे हैं और पति बंगलोर में जॉब करते हैं। भाभी के साथ कोई 10-15 दिन फोन पर बात करने के बाद हम दोनों धीरे-धीरे सेक्स के टॉपिक पर आ ही गए, भाभी ने बताया- मेरा भी सेक्स करने को बहुत दिल करता है.. क्योंकि मेरे पति 5-6 महीने बाद घर आते हैं। मैंने भाभी से कहा- मैं तैयार हूँ। पर भाभी ने मना कर दिया। मैंने भाभी से फिर 4-5 दिन तक कोई बात नहीं की। उसके बाद भाभी की कॉल आई और वो बोली- आप तो मुझे भूल ही गए। तो मैंने भाभी से कहा- जब आपको कुछ करना ही नहीं है.. तो फोन पे बात करके क्यूँ ऐसे ही टाइम वेस्ट करें? भाभी ने कहा- मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ। मैंने भी ‘ओके..’ कह दिया। फिर भाभी ने मुझसे पूछा- कहाँ पर मिलना है? मैंने भाभी से कहा- कहीं पर भी मिल लेंगे। भाभी ने कहा- मेरे पास अपनी कार है, मैं कार में ही तुमसे मिलने आऊँगी। मैंने भाभी को सेक्टर 29 में मिलने को कहा। भाभी ने कहा- ठीक है मैं शाम को 6.30 तक आऊँगी। मैं शाम का इंतज़ार करने लगा, मैं 6 बजे से पहले ही सेक्टर 29 में पहुँच गया। करीब 6.35 पर भाभी की कॉल आई, भाभी बोली- तुम कहाँ पर हो? मैंने भाभी को बताया कि मैं कहाँ पर खड़ा हूँ। थोड़ी देर के बाद भाभी कार लेकर मेरे करीब आ गई और मुझे अन्दर बैठने को कहा। मैं कार के अन्दर बैठ गया। मैं भाभी को देखता ही रह गया।

वो कोई 35 या 36 साल की माल किस्म की भाभी थी। भाभी ने वाइट कलर की ड्रेस पहन रखी थी। मैंने उसको वहाँ से चलने को कहा.. क्योंकि मैं भी खुद सेक्टर 29 में ही रह चुका था और मुझे वहाँ काफ़ी लोग जानते थे। फिर भाभी ने कार को घुमाया और सेक्टर 26 की तरफ हम निकल गए। मैं भाभी को टच करने की कोशिश करने लगा.. पर उसने मना कर दिया। कुछ देर बाद भाभी ने कार साइड में लगा दी और हम दोनों ने थोड़ी देर बात की.. पर भाभी ने मुझे टच तक नहीं करने दिया। करीब 15-20 मिनट तक बात करने के बाद भाभी ने कहा- अब मैं जाना चाहती हूँ.. बच्चे घर पे अकेले हैं। मैं उनको यह कह कर आई हूँ कि मैं मार्केट से सब्जी लेने जा रही हूँ। मैंने भाभी से ‘ओके..’ कहा और उसने मुझे वापिस वहीं पर ड्रॉप कर दिया। रात को मैंने भाभी को कॉल की और उससे नाराज होकर बोला- तुमने तो मुझे टच तक नहीं करने दिया। भाभी ने कहा- चुदवाना तो मैं भी बहुत चाहती हूँ पर मुझको डर लगता है। फिर मैंने भाभी को जैसे-तैसे समझाते हुए घर पर मिलने को कहा पर उसने कहा- मेरे बच्चे भी साथ होते हैं.. उनका क्या करेंगे?

मैंने कहा- आजकल तो स्कूल में छुट्टियाँ हैं.. और तुम अपने बच्चों को उनके मामा जी के घर क्यूँ नहीं छोड़ देती? इस पर भाभी ने कहा- आईडिया तो अच्छा है। भाभी का मायका अम्बाला में ही था.. वो अगले ही दिन बच्चों को मायके छोड़ आई। अब मैंने भाभी से कहा- तुम मुझे भी साथ में ही पिक कर लेना। भाभी ने कहा- ठीक है। भाभी अम्बाला से आई और रास्ते में मुझे भी पिक कर लिया। उसका घर सेक्टर 33 में था। करीब 9.30 तक हम दोनों भाभी के घर पर पहुँच गए। भाभी ने कहा- मैं खाना बना लेती हूँ, फिर खाना खाकर हम आराम से मजे करेंगे। वो खाना बनाने लगी और मैं उसके बेडरूम में टीवी ऑन करके देखने लगा। करीब 30 मिनट बाद वो खाना बना कर लाई.. हम दोनों ने साथ में खाना खाया। भाभी ने कहा- यार, मुझको डर लग रहा है कि कहीं किसी को पता लग गया तो बड़ी बदनामी हो जाएगी। इस पर मैंने भाभी को बांहों में भर लिया और कहा- आज की रात डर को भगा दो और बस हम दोनों यहाँ पर हैं.

बस यही सोचो। उसने मुझे ज़ोर से कस कर पकड़ लिया और मेरे होंठों पर एक किस कर दी। मैंने भी भाभी का साथ दिया और हम दोनों करीब 5 मिनट ऐसे ही एक-दूसरे के होंठों को चूसते रहे। फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसकी कमीज में डाल दिया और उसकी कमीज को ऊपर उठा दिया। अब मैं भाभी के मम्मों को धीरे-धीरे सहलाने लगा। फिर मैंने भाभी की कमीज उतार दी, भाभी ने भी मेरी कमीज उतार दी। भाभी मुझे दोबारा पागलों की तरह किस करने लगी। मैंने धीरे से हाथ भाभी की पीठ की तरफ किया और भाभी की ब्रा भी उतार दी। अगले ही पल भाभी के मम्मे मेरे सामने थे। मैंने उस को नीचे लिटाया और उसके निप्पलों को चूसने लगा। वो आँखें बंद करके मेरे सिर को दबाने लगी। मैं धीरे-धीरे से भाभी के पेट की तरफ बढ़ा और उसकी सलवार को खोल दिया। भाभी ने अन्दर ब्लैक कलर की पेंटी पहन रखी थी। भाभी की पेंटी गीली हो गई थी। मैं उसके पेट पर अपनी जीभ घुमा रहा था और उसके मम्मों को धीरे से दबा रहा था, भाभी मादक सीत्कार करते हुए ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… इसस्सश.. की आवाज निकाल रही थी। भाभी की पेंटी आगे से पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने धीरे से उसकी पेंटी उतार दी, भाभी की चूत पर एक भी बाल नहीं था, चिकनी चूत थी। जब मैंने उससे इस बारे में पूछा तो उसने कहा- अभी कल ही चूत साफ की है। मैंने भाभी की चूत पर धीरे से हाथ रखा और चूत को सहलाने लगा। वो और गर्म हो गई और उसकी चूत से पानी निकल गया। मैंने भाभी से कहा- मैं चूत को चाटना चाहता हूँ।

भाभी मुझे मना करने लगी और बोली- मेरे पति ने भी कभी ऐसा नहीं किया है। मैंने भाभी से कहा- आप एक बार ट्राई करके तो देखो। भाभी मान गई.. मैंने उसकी टाँगों को धीरे से खोला और अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी। जैसे ही मैंने ऐसा किया.. भाभी के मुँह से आवाज निकल गई। अब मैं उसकी चूत को धीरे से चाट रहा था, वो आँखें बंद करके चूत चुसाई के मज़े ले रही थी, भाभी मस्ती में कह रही थी- आह्ह.. अब डाल भी दो ना.. मैं करीब 5 मिनट तक भाभी की चूत चाटने के बाद अब उसकी टाँगों के बीच में आ गया। भाभी की चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा। भाभी कह रही थी- प्लीज.. अब डाल भी दो.. और मत तड़फाओ। मैंने धीरे से अपने लंड को अन्दर धक्का दिया।

भाभी की चूत पहले से ही गीली थी.. इसलिए मेर लंड बड़े आराम से चूत के अन्दर चला गया। अब मैं धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाने लगा और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, भाभी कह रही थी- प्लीज.. ज़ोर से चोदो.. आह्ह.. मजा आ रहा है। पूरा कमरा भाभी की कामुक सिसकारियों से भरा हुआ था। कुछ ही देर बाद भाभी की चूत से पानी निकलने लगा था, मैं अब भी धक्का मार रहा था, अब चूत चुदाई में ‘फॅक.. फॅक..’ की आवाज आ रही थी। मैंने ऐसे ही करीब उसको कई मिनट तक हचक कर चोदा, उसके बाद जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने भाभी से पूछा- कहाँ पर निकालूँ?

भाभी ने कहा- अन्दर ही डाल देना.. क्योंकि मेरा ऑपरेशन हो चुका है और कोई परेशानी की बात नहीं है। तब मैं बिना किसी टेन्शन के भाभी की चूत में ही झड़ गया और भाभी के ऊपर ही लेट गया। इसी तरह मैंने उस रात उस भाभी को 3 बार चोदा। जब मैं सुबह के टाइम घर आने के लिए निकला.. तो भाभी ने 2000 रुपये निकाले और मुझे देते हुए कहा- यह लो अपनी फीस.. ये बात किसी को मालूम नहीं पड़ना चाहिए और जब भी मैं आप को बुलाऊँगी.. तब आपको मुझे खुश करने के लिए आना पड़ेगा। मैंने पैसे जेब में डाल लिए और अपने रूम पर आ गया। अब जब भी भाभी को टाइम मिलता है.. हम दोनों खूब चुदाई करते हैं ओर वो मुझे इसके लिए पैसे भी देती हैं। तो दोस्तो, कैसी लगी भाभी की चूत चुदाई की मेरी सच्ची चुदाई की सेक्स कहानी..

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