बहन की सौतन

बहन की सौतन की चुदाई hindi sex story and desi kahani in hindi. मेरी सगी बहन आउर उसकी सौतन। यह भी मेरी रखैल मोना रानी ने लिखी है. मेरी साली रेखा रानी जिसके साथ मेरे बाईस वर्षों से शारीरिक सम्बन्ध हैं ने एक ऐसा कारनामा किया जिसे पाठकों को विस्तार से बताकर मज़ा देना मुझे आवश्यक लगा.

जब यह किस्सा मैंने मोनारानी को सुनाया तो वो बड़ी उत्साहित हुई और उसने तुरंत रेखा रानी को फोन पर कहा- तू दो चार दिन मेरे घर पे ही आ जा, तू कहानी सुनाती जाना और मैं कंप्यूटर पर टाइप करती जाऊँगी.
रेखा रानी की भी चूत में सुरसुरी हुई कि उसकी हरामज़दगी की कहानी छपेगी तो वो फ़ौरन मान गई.

शनिवार इतवार की छुट्टी में दोनों रखैलों का कहानी लिखने का तय हुआ और शुक्रवार को रेखा रानी तीन दिन के कपड़े लेकर मोना रानी के घर चली गई. बच्चों को रीना रानी के साथ मेरे घर भेज दिया.
आगे क्या क्या और कैसे हुआ यह पूरा किस्सा आप मोनारानी के शब्दों में ही सुनिए. मोना रानी के शब्द आरम्भ:

पाठकों की सेवा में मोना का नमस्कार! यह कहानी रेखा की है इसलिए वही इसकी हेरोइन है. मैंने तो केवल कंप्यूटर पर टाइप करके संपादन किया है. इसलिए जो आप पढ़ने जा रहे हैं वे रेखा की भाषा है मेरी नहीं.

जो रेखा ने सुनाया:
पढ़ने वालों को याद होगा कि मोना ने होली वाले दिन अपने पति को पटा लिया था कि वो मोना को किसी ग़ैर मर्द से चुदाई करते हुए देखे.
जब से मुझे इस घटना का मालूम हुआ तब से मैं सोचने लगी कि मोना कितनी साहसी लड़की है. हरामज़ादी ने पहले तो अपने पति को किसी दूसरी लड़की को चोदने के लिए उकसाया, फिर उसके दिल में ख्वाहिश जगाई कि वो भी मोना को ग़ैर मर्द से चुदवाते हुए देखे.

और एक बहनचोद मैं हूँ. बाईस साल से राजे से चुद रही हूँ मगर अब भी उस पर मेरा कोई हक़ नहीं, जब मैं उसके घर जाती हूँ तो पहले मेरी सगी बहन जूसी की चुदाई होती है, फिर मैं जूसी के सो जाने का इंतज़ार करती हूँ. उसकी नींद गहरी होने तक चूत को रगड़ रगड़ के ही तसल्ली करती हूँ. क्यों न मैं भी कुछ ऐसा करूँ कि जूसी और मैं आमने सामने चुद सकें!

इस ख्याल ने मेरे दिल ओ दिमाग को ऐसा जकड़ लिया था कि चौबीसों घंटे मुझे कुछ और नहीं सूझता था. बस इसी जोड़ तोड़ में लगी रहती थी कि कैसे अपने मनमुराद पूरी करूँ!
दिक्कत यह थी कि जूसी सती सावित्री टाइप की थी और राजे से बेपनाह प्यार करती थी. क्यों न करे, जिसका आदमी रोज़ दो तीन बार चोदे, दबा के चूत चूसे, गांड चाटे और इसके साथ साथ जूसी रानी जूसी रानी करता हुआ उसका कुत्ता बन के उसके आगे पीछे दुम हिलाता घूमता फ़िरे, ऐसी लड़की को सती सावित्री बनी रहने में क्या प्रॉब्लम है. न ही ऐसे आदमी से बेपनाह मुहब्बत करने में कोई प्रॉब्लम है जो हैंडसम हो, हट्टा कट्टा हो, अच्छे खासे पैसे कमाता हो और उसके चुदक्कड़पन को चोद चोद के शांत रखता हो.

एक मैं हूँ बदकिस्मत… जिसके नसीब में मेरे स्वर्गीय पति सरीखा चूतिया लिखा था. राजे उसको छिपकला कहा करता था और सही भी था. उसे देख के मुझे घिन आने लगती थी, जैसे छिपकली को देख के आती है. हरामज़ादे ने मुझ से शादी करके मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी थी. भला तीन इंच के पतले से लौड़े से मुझे जैसे महा चुदक्कड़ लौंडिया की तसल्ली हो सकती थी?
अच्छा ही हुआ कम्बख्त जल्दी ही चल बसा वर्ना किसी दिन मेरा गुस्सा फूट पड़ता और मैं ही उसका क़त्ल कर देती.

हम दोनों बहनें बला की गर्म हैं. दिन में दस बार चुद जाएँ तो भी ग्यारहवीं चुदाई को आनाकानी न करें.
दोनों बहुत खूबसूरत भी हैं, खूब बड़े बड़े, मर्दों को पागल कर देने वाले चूचों की मालकिन हैं, शक्ल भी काफी मिलती है, एक बड़ा फर्क है और वो है हमारी चूत से निकलने वाले रस… दोनों चूतें बेहिसाब रस निकालती हैं, परन्तु मेरा रस बहुत गाढ़ा है. पहली बार देखने में ऐसा लगेगा जैसे किसी मर्द के लौड़े का लावा हो.
राजे ही नहीं, सब रानियाँ इस स्पेशल रस की दीवानी हैं और इसे मधु कहती हैं.

देखिये न अब ये कम्बख्त मोना कहानी टाइप करना रोक के मेरी चूत चूसने लगी है. कहानी सुनते हुए मैं उत्तेजित हो गई तो जूस फफक फफक के आने लगा. फिर ये मोना कहाँ रुक सकती थी. आधा घंटे तक मधु का लुत्फ़ लेकर बड़ी मुश्किल से दुबारा बैठी है.
हम दोनों नंगी हैं…. यार मोना ऐसे तो हो गई कहानी पूरी!

खैर इस मादरचोद मोना ने बेमन से कहानी लिखनी शुरू तो की. चिंता न कर मोना, शाम को दो घंटे चूसियो मेरी चूत का मधु!
मेरे दिमाग में आखिरकार एक विचार आया कि क्यों न मैं जूसी को भावनात्मक ब्लैकमेल करूँ… शायद बात बन जाए. पूरे हफ्ते तक मैं जूसी से क्या बोलूंगी उसका अभ्यास करती रही. जो जो उसके जवाब हो सकते थे उन सबकी काट के भी डायलॉग सोच लिए!

शुक्रवार को जब मैं राजे के घर रीना के साथ गई तो समय मिलते ही मैंने अपना इरादा राजे को बता दिया.
राजे ने साफ बोल दिया- रंडी तू ये असंभव सा आईडिया को दिमाग से निकाल दे, कहीं ऐसा न हो तेरे जूसी रानी से सम्बन्ध ही टूट जाएँ, तेरा यहाँ आना जाना ही बंद हो जाए और जितनी चुदाई मिल रही है, तू उसे भी खो बैठे.
मैंने कहा- एक बार कोशिश तो मैं ज़रूर करुँगी, नहीं तो मुझे चैन नहीं मिलेगा. अगर जूसी भड़की तो मैं माफ़ी मांग के उसे मना लूंगी.

इस पर राजे ने चिढ़ के कहा- ठीक है रंडी, तू माँ चुदा अपनी, मेरी बला से!

शुक्रवार रात को तो हमेशा कि तरह मैंने और रीना ने जूसी की चुदाई का दृश्य बाहर बालकनी में बैठ कर देखा. उसके बाद जूसी की नींद गहरी हो जाने की प्रतीक्षा की. फिर रीना पहले चुदी और आखिर में रात के डेढ़ बजे मेरी चुदाई की बारी आई.

महारानी अंजलि जी का हुक्म है कि रीना की चुदाई पहले होनी चाहिए तो महारानी साहिबा के गुलाम राजे ने उनके आदेश का पालन करते हुए उसे ही मुझसे पहले चोदा.

शनिवार को दोपहर में राजे तो अपने काम से कहीं चला गया और रीना मेरे बच्चों के साथ राजे की कार और ड्राइवर को लेकर अम्बिएंस मॉल में घूमने चली गई. जूसी और मैं आराम करने के लिए लेट गए.

तब मैंने जूसी से कहा- किरण, सुन, मुझ तेरे से एक ज़रूरी बात करनी है… तुझे अच्छी नहीं लगेगी इसलिए पहले से ही माफ़ी मांग रही हूँ… अगर तुझे मेरी बात सही न लगे तो दिल पर न लगाइयो… हम दोनों भूल जायेंगे कि वो बात कभी हुई भी थी… बहुत परेशानी में हूँ इसलिए बोल रही हूँ.
जूसी- बोल न रेखा क्या हुआ? रूपए पैसे की ज़रूरत हो तो बोल न?
मैं- नहीं किरण… पैसों की ज़रूरत नहीं है… देख तू तो जानती ही है मेरा पति को गुज़रे दस साल हो गए… इस भरपूर जवानी में मैं अकेली पड़ गई… जैसे सब लड़कियों की शारीरिक ज़रूरतें होती हैं मेरी भी हैं… लेकिन वो ज़रूरतें पूरी नहीं हो सकतीं… सेक्स के बिना इतने सालों में मेरी हालत बिगड़ गई है… अब ये हाल है कि हर समय मुझे सेक्स ही सूझता है… कहीं मेरे कदम बहक के गलत रास्ते पे न चले जाएँ… इस बात से डरती हूँ.
जूसी- हाँ मैं समझती हूँ रेखा कि तू कैसे समय गुज़ार रही है यह देख के मुझे भी दुःख होता है… परन्तु मैं क्या कर सकती हूँ.

मैं- किरण, अगर तू थोड़ा सा अपना दिल बड़ा कर ले तो मेरी समस्या का समाधान हो सकता है.
जूसी- मैं समझी नहीं तू क्या कहना चाहती है?
मैंने डरते डरते बोल ही दिया- देख मैं फिर से बोल रही हूँ कि अगर मेरी बात तुझे ख़राब लगे तो हम दोनों इसको हमेशा के लिए भूल जायेंगे.
जूसी- कुछ कहेगी भी या भूमिका ही बांधे जाएगी?

मैं- मैं यह सोच रही थी कि क्यों न राज जी मेरे साथ सेक्स कर लिया करें. मेरी प्यास भी शांत रहेगी और घर घर में बात भी छुपी रहेगी. अगर तेरी इजाज़त हो तो ही. तू नहीं चाहेगी तो कुछ नहीं.
जूसी भड़क के उठ पड़ी और तमतमाते हुए मेरे कंधे ज़ोरों से हिलाते हिलाते चिल्लाई- तू मेरी बहन है या दुश्मन? हैं? मेरे ही पति पास डाका डालने का मुझी से पूछ रही है… बेशर्म कहीं की! मेरी सगी बहन होकर मेरी ही सौतन बनेगी दुष्टा!
मैंने उसको शांत करने का प्रयास करने की कोशिश की- नहीं किरण, न मैं तेरे पति डाका डालना चाहती न तेरी सौत बनना चाहती… मैं तो सिर्फ कभी कभी तेरे पति से सेक्स करना चाहती… इतना गुस्सा न खा… मैंने तो शुरू से ही बोला था कि तेरी इजाज़त होगी तभी आगे बढ़ेंगे… तू नहीं चाहती न सही… मैं ढूंढ लूंगी कोई और सेक्स पार्टनर!

जूसी- फिर तूने ये बात छेड़ी ही क्यों? कोई मानेगी क्या अपने पति को किसी से बाँटने के लिए… हाँ, ठीक है तू ढूंढ ले कोई और सेक्स पार्टनर… मुझे और मेरी गृहस्थी पर ग्रहण मत लगा!
मैं- ओके किरण तू चिंता न कर… मेरा क्या है मेरे स्कूल में पचासों नौजवान लड़के पढ़ते हैं मेरी क्लास में… उनमें से किसी को फंसा लूंगी… मैंने तुझ से यह बात सिर्फ इसलिए छेड़ी थी कि यूँही किसी को पटा के पार्टनर बनाने में कुछ खतरे हैं… कोई बदमाश फितरत का मिल गया तो… मेरी नंगी या सेक्स करते हुए फोटो या वीडियो ले लिए तो बात जग ज़ाहिर हो सकती है… हमारी तरफ के खानदान की बड़ी बदनामी हो सकती है… यहाँ तक कि मुझे ख़ुदकुशी करने तक की नौबत आ सकती है… बच्चे अब छोटे नहीं रहे… उनको मालूम होगा तो क्या सोचेंगे अपनी माँ के बारे में? राज जी के साथ यह सब रिस्क नहीं थे… बस यही कारण था जो मैंने राज जी के लिए सोचा… सिर्फ और सिर्फ अपने खानदान की इज़्ज़त में कोई दाग़ न आये… देखा जायगा… मैं अब अपनी सेक्स की भूख बर्दाश्त नहीं कर सकती.

जूसी- क्यों वेश्याओं जैसी बातें करती है रेखा… क्या और हज़ारों लड़कियाँ जिनके पति नहीं होते वो यूँ इधर उधर मुंह मारती फिरती हैं? हर किसी के भाग्य में जो लिखा होता वो तो झेलना ही पड़ता. चाहे तू हो चाहे कोई और.
मैंने तिलमिलाते हुए सख्त लहज़े में कहा- बात ख़त्म हो गई न… अब फालतू बातें क्यों कर रही है… मैं कर लूंगी किसी न किसी से सेक्स… जो होगा देखा जायगा… परिवार की इज़्ज़त जाए भाड़ में मेरी बला से… अगर मुझे आत्महत्या भी करनी पड़ी तो भी मुझे कोई ग़म नहीं… अच्छे से जीवन का आनन्द उठाकर तो मरूंगी… जो चल रहा है उसमें तो प्यासी की प्यासी ही बुढ़िया होकर मर जाऊंगी… क्या फायदा ऐसे जीवन का? मुझे तो चार दिन भी सेक्स मिल जाए तो मैं पांचवे दिन अपनी जान दे दूंगी… लेकिन तुझे क्या… ये सब डायलॉग तू इसलिए मार रही है कि तुझे तो कोई दिक्कत है नहीं… तेरे पास तो पति है जो तुझ पर लट्टू है… तू अपनी खैर कर मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर!
मैं उठ के दूसरे कमरे में जाकर लेट गई.

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