चाची भतीजे की चुदाई की कहानी

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दोस्तो. आज मै आपके समक्ष एक ऐसी कहानी लाई हु. जिसे पढ़कर आप लोग अपने हाथों को अपने कंट्रोल में नहीं रख पाएंगे.

मेरा नाम मोना है. मेरी उम्र 40 साल है. मेरी शादी मेरे घर वालों ने 20 की उम्र में ही करा दी थी. मेरे पति का नाम रवि है. रवि एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और हर महीने टूर के लिए 7:-8 दिन घर से बाहर रहते हैं.

मेरे दो बच्चे हैं. एक बड़ा लड़का गोलू 18 साल का है. और मेरी एक बेटी उससे दो साल छोटी है.

यह कहानी मेरे और मेरे पति के बड़े भाई के लड़के यानि कि मेरे भतीजे के साथ हुई घटना पर आधारित है. मै आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है. और मेरा 36:-28:-36 का फिगर बहुत ही कातिलाना है. ऐसा मेरा नहीं मेरे पति का मानना है.
हमारी शादी को 20 साल हो गए. पर मेरे पति मुझे ऐसे रखते हैं कि जैसे अभी कल ही हमारी शादी हुई हो.
मेरे स्तन अभी तक कसे हुए हैं और उन पर मेरे लाल निप्पल ऐसे लगते हैं जैसे कि रसगुल्ले पर गुलाब की पत्ती चिपकी हो. मेरे नितम्ब भी बहुत कसे हुए और गोल हैं. जो भी उन्हें देखता है. उनके लंड उनकी पैंट में ही कस जाते हैं.

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  • बात कुछ ही दिन पहले की है. 
  • मेरा भतीजा अंकित. जिसकी उम्र 20 है. 
  • अपनी कॉलेज की छुट्टियों के चलते हमारे घर कुछ दिन रहने के लिए आया था.
  • वो स्वभाव का बहुत ही अच्छा था.
  •  और उसकी मेरे बेटे के साथ बहुत बनती थी. 
  • वो भाई कम दोस्त ज्यादा लगते थे.

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मेरे बेटे और बेटी सुबह 11:30 पर स्कूल के लिए जाते थे और फिर स्कूल छूटते ही कोचिंग के लिए चले जाते थे. उन्हें वहाँ से आने में 7 बज जाते थे.

अंकित को आए अभी दो ही दिन हुए थे वो दोपहर में अकेला हो जाता था. तो टाइम पास के लिए मेरे साथ कुछ देर के लिए बैठ जाता था.

मेरे पति सुबह 9 बजे ऑफिस चले जाते थे और फिर 8 बजे ही आते थे.

एक दिन खाना बनाने के बाद मैने अपने बच्चों को स्कूल भेजा और फिर अंकित को खाना खिलाकर घर के काम करने में लग गई. सब काम निपटाने के बाद में थक गई थी. तो सोचा नहा लेती हु. क्योंकि गर्मी बहुत पड़ रही थी.

मै नहाने के लिए तौलिया लेकर बाथरूम की तरफ चल पड़ी और नहाने लगी. नहाने के बाद मैने तौलिये से अपने शरीर को पौंछा और फिर उसे अपने चूचियों के ऊपर से बांध लिया. जिससे मेरा शरीर चूचियों से लेकर जांघों तक पूरा ढक गया.

जब मै नहाकर बाथरूम से बाहर निकल रही थी. तभी अचानक मेरा पैर फिसल गया और मै गिर पड़ी. मेरी कमर और पीठ में बहुत चोट लगी थी और दर्द के मारे मै रोने लगी.

मेरे गिरने और रोने की आवाज़ सुनकर अंकित भागकर बाथरूम की तरफ आया और मुझे गिरा हुआ देखकर अचानक से डर गया.
मै खड़ी नहीं हो पा रही थी तो वो मुझे सहारा देने लगा. पर मै खड़ी होते:-होते फिर से गिरने लगी. तो उसने मुझे पकड़ लिया.

उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मेरे रूम की तरफ जाने लगा.

इसी बीच न जाने कब मेरा तौलिया खुल गया और मेरे आगे का बदन बिल्कुल नंगा हो गया. जैसे ही मुझे इस बात का अनुभव हुआ. मैने तुरंत खुद को फिर से ढक लिया.

फिर अंकित ने ले जाकर मुझे मेरे बिस्तर पर लिटा दिया. जब मैने उसकी तरफ देखा तो वो आँखे झुकाए खड़ा था. पर उसका लंड तना हुआ था.

मै समझ गई कि इसने मेरे नंगे बदन को देख लिया है. और मेरे बदन के स्पर्श से इसका लंड खड़ा हो गया है.
पर उस वक्त में कुछ कह पाने वाली हालत में नहीं थी और मेरे अन्दर इतनी भी ताकत नहीं थी कि मै उठकर अपने कपड़े पहन सकूँ.

  • तब अंकित ने मुझसे पूछा:- चाची आप ठीक तो हैं.
  • मैने अंकित से कहा:- अंकित मेरी कमर और पीठ में बहुत दर्द हो रहा है.
  • वो बोला:- चाची मै अभी बाजार से आपके लिए दवा लाता हु.
  • मैने उससे मना किया:- मेडिकल यहाँ से बहुत दूर है. और बाइक भी नहीं है.
  • पर वो बोला:- चाची मै आपको ऐसी हालत में नहीं देख सकता.
  • मैने उससे बोला:- मेरी कमर की मालिश कर दे.
  • वो तैयार हो गया.

मैने उसे ड्रावर से तेल की बोतल लाने को कहा और फिर वो बोतल लेकर आ गया और फिर मुझसे बोला:- चाची मै बोतल ले आया हु.

मै:- मेरी कमर और पीठ पर मालिश कर दे.
अंकित:- पर चाची आप तो सीधी लेटी हो और तौलिया भी लगा हुआ है.

फिर मैने उसे पीछे पलटने को कहा. तो वो पलट गया और मैने तौलिया खोलकर उसे अपनी कमर से नीचे बाँध लिया. अब मेरा कमर तक आधा शरीर पूरा नंगा था. फिर मै बिस्तर पर उलटी लेट गई. जिससे मेरे मम्मे बिस्तर में छुप गए और मेरी पीठ और कमर बिल्कुल नंगी अंकित से सामने थी.

मैने उसे पलटने को कहा तो वो सीधा हो गया और मुझे देखकर मुझे निहारने लगा और फिर मेरी मालिश करने लगा.
अब मुझे थोड़ा आराम मिलने लगा था.

वो मेरी कमर पर बहुत ही प्यार से अपने हाथों को फेर रहा था. पीठ पर मालिश करते:-करते उसके हाथ मेरे चूचों पर भी टच हो रहे थे. पर मैने उसे कुछ नहीं कहा. क्योंकि मालिश करते टाइम अक्सर यहाँ:-वहाँ हाथ लग जाते हैं.

अब वो मेरी कमर की मालिश करने लगा. उसने कहा:- चाची जी आपके तौलिये के कारण कमर की ठीक से मालिश नहीं हो पा रही है.

मै उस वक्त दर्द के कारण कुछ कर भी नहीं पा रही थी. मैने उससे बोल दिया:- तौलिया थोड़ा नीचे सरका दो.

उसने तौलिया को थोड़ा नीचे खिसका दिया. जिससे मेरी गाण्ड की दरार उसे साफ नज़र आने लगी और फिर वो मेरी मालिश करने लगा.

फिर मालिश करते टाइम उसका हाथ कभी:-कभी मेरी गाण्ड को भी छू लेता. तो मै एकदम से सिहर जाती. अब तो वो मेरी गाण्ड की दरार में भी तेल की मालिश करने लगा. पर मै उसे कुछ बोल नहीं सकी.

करीबन आधे घंटे मालिश करने के बाद मैने उसको बोला:- अंकित अब रहने दो. अब मुझे पहले से ठीक लग रहा है. बाकी अब कल कर देना.

वो ‘जी चाचीजी’ बोलकर वहाँ से दूसरे कमरे में चला गया.
मै भी वैसे ही पड़े:-पड़े सो गई.

जब मेरी नींद खुली तो मै बिल्कुल नंगी बिस्तर पर पड़ी हुई थी और उस वक्त पाँच बजने वाले थे.

मै उठी और उठकर कपड़े पहनने लगी. मैने एक टाइट गाउन पहन लिया था और अन्दर केवल पैंटी ही पहनी थी.
फिर मैने चाय बनाई और अंकित के पास जाने लगी.

अंकित मोबाइल में कुछ देख रहा था और जैसे ही मै कमरे में पहुँची. उसने मोबाइल रख दिया.

मुझे देखते ही बोला:- अरे चाची अब आपका दर्द कैसा है. और आपने चाय बनाने की तकलीफ क्यों की. मुझसे बोल देती. मै ही बना देता.
मैने बोला:- आज तुमने मेरी बहुत मदद की. अगर तुम ना होते तो आज मै दर्द से तड़प कर मर जाती.
अंकित बोला:- चाची फालतू बातें मत करो आप.

मैने अंकित को मालिश के लिए धन्यवाद बोला और उसे पीने के लिए चाय का कप दिया. चाय पीने के बाद हम वहीं बैठकर बात करने लगे.

थोड़ी देर बात करने के बाद मैने उससे बोला:- अंकित जरा मेरे लिए एक गिलास पानी ले आओ.

वो पानी लेने चला गया.
मैने उसका मोबाइल उठाया. उसमें कोई लॉक नहीं था और जब मैने देखा तो वो उसमे पोर्न देख रहा था.
उसके आने की आहट सुनकर मैने उसका मोबाइल वैसा ही रख दिया.

पानी पीने के बाद मैने उसे बोला:- अंकित आज तुमने मुझे जिस अवस्था में देखा. प्लीज उसके बारे में किसी से मत कहना.
वो बोला:- अरे चाची आप पागल हो क्या. मै किसी से क्यों बोलूँगा. आपको मुझ पर भरोसा नहीं है. क्या?
मैने कहा:- ऐसी बात नहीं है. बस मै तो तुझे बोल रही थी.

फिर मैने उससे पूछा:- तू मोबाइल में क्या देख रहा था?
तो वो घबरा गया और बोला:- बस ऐसे ही टाइमपास के लिए मूवी देख रहा था.

मैने बोला:- मुझे भी दिखा कौन सी मूवी देख रहा था.
वो बोला:- अच्छी मूवी नहीं है. आपके देखने लायक नहीं है.
फिर मैने कहा:- ठीक है.

फिर वो बात को पलटते हुए बोला:- चाची जी वैसे आप इस गाउन में बहुत ही सेक्सी दिख रही हो.
मैने बोला:- तूने तो मुझे बिना गाउन के भी देख लिया है. तब सेक्सी नहीं दिखी तुझे.

वो हँसने लगा और मैने अपने गाउन का ऊपर का बटन खोल दिया. जिससे मेरे आधे चूचे बाहर निकलने लगे.

अब मै भी उसके मजे लेने लगी. मै बोली:- जब तूने मुझे उठाया था. तब तेरा भी कुछ उठ गया था.
वो हँसने लगा बोला:- चाची आप भी.

मैने उससे पूछा:- मेरा नंगा बदन देख कर कैसा लगा तुझे?
वो बोला:- चाची आप का फिगर बहुत शानदार है. अगर आपके जैसी वाइफ मुझे मिल जाए तो उसे रोज प्यार करूँगा.

मैने कहा:- मुझ जैसी ही क्यों?
तो बोला:- आप जैसा फिगर होना चाहिए बस.
मैने चुदास भरे स्वर में कहा:- तुझे मेरे फिगर में क्या अच्छा लगा?
वो कुछ मुस्कुराते हुए बोला:- बताऊँ?
‘बता.’

फिर वो उठकर मेरे बगल में आ गया और बोला:- चाची आपकी बॉल्स बाहर आ रही हैं.
मै:- तो तू अन्दर कर दे इन्हें.

फिर उसने मेरे चूचों को छुआ और उन्हें सहलाने लगा. मै भी गर्म हो गई थी. फिर उसने मेरी गाउन का दूसरा बटन भी खोल दिया. जिससे मेरे दोनों ख़रबूज़ बाहर आ गए और वो उन्हें किस करने लगा.

मेरे मुँह से ‘आहहहहह. उहहहह.’ की सिसकारियाँ निकलने लगीं.

फिर वो मेरे चूचियों को मसलने लगा और अपने होंठों को मेरे होंठों के ऊपर रख कर उन्हें चूमने लगा. मै भी उसका भरपूर साथ दे रही थी.

करीब दस मिनट के बाद उसने मेरे होंठों को छोड़ा और मेरे चूचियों को चूसना और दबाना शुरू कर दिया. इस सब में मुझे बहुत मजा आ रहा था और मै भी खुलकर उसका साथ दे रही थी.
मेरे मुँह से निकलती सिसकारियाँ उसे बहुत ही उत्तेजित कर रही थीं.

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अब उसने मेरा गाउन उतार दिया और मै उसके सामने बस पैंटी में थी. उसने मुझे बिस्तर पर लेटाया और ऊपर से लेकर नीचे तक मेरे पूरे बदन को चाटने लगा.
मेरे गोरे बदन पर काली पैंटी को देखकर उसकी आँखें कामुकता से भर आई थीं.

अब वो बेहिचक मेरे पूरे बदन के साथ खेल रहा था. कभी मेरे चूचियों को चूसता. कभी मेरी नाभि को अपनी जीभ से कुरेदता. कभी मेरे पेट को अपनी आरी जैसी जीभ से चाटता.

फिर उसने अपने कपड़े उतार दिए. अब वो मेरे सामने केवल अपनी फ्रेन्ची में था. जिसमें से उसका लंड किसी मिसाइल की तरह दिखाई दे रहा था.

वो मेरे मुँह के पास आकर खड़ा हो गया और बोला:- चाची जी. मेरा मुन्ना आपको देखना चाहता है.

उसके इतना बोलते ही मैने उसके लौड़ा को उसकी चड्डी से बाहर निकाल दिया और उसे अपने हाथों से सहलाने लगी.

अंकित:- चाची अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा. आप इसे अब इसकी मंजिल तक पहुँचा दो.

मैने उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी.

थोड़ी देर चूसने के बाद उसने अपने लंड को बाहर निकाला और बोला:- चाची ये तो अब बस आपकी चुत में जाना चाहता है.
मैने उससे बोला:- अभी नहीं. अभी बच्चों के आने का टाइम हो गया है. और फिर तेरे चाचा भी आने वाले हैं.
अंकित:- तो ठीक है. अभी तो इसे शांत कर दो.

वो नीचे आया और मेरी पैंटी उतार दी. उत्तेजना के कारण मेरी चुत से पानी आने लगा था और पैंटी पूरी गीली हो गई थी.
हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए. वो मेरे नीचे था और मै उसके ऊपर थी.

अब वो मेरी चुत चाट रहा था और अपनी जीभ से उसे कुरेद रहा था. मै किसी आइसक्रीम की तरह उसके लंड को चूस रही थी.
थोड़ी देर बाद जैसे ही उसे लगा कि मै झड़ने वाली हु. तो वो और जोर:-जोर से मेरी चुत को चाटने लगा और तुरंत मै झड़ गई.

इतनी उत्तेजना मैने जिंदगी में पहली बार महसूस की थी.
अंकित मेरे पानी को चाटने लगा और पी गया.

अब अंकित खड़ा हुआ और मुझे घुटनों के बल बिठा दिया. फिर उसने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया और मेरे बालों को पकड़कर मेरे सर को आगे:-पीछे करने लगा.

कुछ ही देर बाद वीर्य की तेज धार उसके लौड़ा से निकलने लगी और वो पूरा पानी मेरे मुँह में भर गया और मै उसे निगल गई.
उसके वीर्य का बहुत ही मस्त स्वाद था. काश ऐसा पानी रोज मेरी प्यास बुझाता.

फिर हम दोनों उठे और एक:-दूसरे को फिर से एक प्यार भरी चुम्मी दी. फिर हमने अपने कपड़े पहने और खुद को साफ किया.
इसके बाद अंकित पीछे से आकर मुझसे लिपट गया और अपना लंड मेरी गाण्ड में सटा दिया. जिसका साफ अनुभव में कर सकती थी.

फिर वो मुझसे बोला:- चाची आप बहुत क़यामत हो. मेरा लंड आपकी मोटी गाण्ड में घुसने के लिए बेक़रार हो रहा है.
मैने बोला:- सब्र कर. तू भी यहीं है. और मै भी.

उसके बाद उसने मेरी गाण्ड पर एक चपत मारी तो मेरे मुँह से ‘उई माँ.’ निकल गया और फिर वो मेरे होंठों पर किस करने लगा.

इतने में ही डोरबेल बजी और हम अलग हो गए.

मैने कहा:- बच्चे आ गए हैं.
मैने बाहर जाकर गेट खोला तो बच्चे अन्दर आए.

गोलू मुझसे बोला:- माँ आज आप बहुत खुश लग रही हो और सुन्दर भी.

मैने अपने बेटे को अपनी बाँहों में भर लिया और फिर हम लोग अन्दर आ गए. थोड़ी देर बाद मेरे पति रवि भी आ गए. फिर हम सब लोगों ने मिलकर खाना खाया और फिर सब सोने चले गए.

रात को मै और मेरे पति बेडरूम में थे तब रवि बोला:- आज तुम इस गाउन में बहुत सेक्सी लग रही हो.

वो मुझे किस करने लगे और फिर उन्होंने मुझे नंगी कर दिया और मुझे चोदने लगे. कुछ देर बाद मै झड़ गई और फिर वो भी झड़ गए और हम दोनों वैसे ही एक:-दूसरे के ऊपर सो गए.

मुझे ऐसा लग रहा था कि सेक्स करते वक्त खिड़की से हमें कोई देख रहा था. अँधेरा होने के कारण मुझे दिख नहीं रहा था… पर मुझे पता था कि अंकित ही होगा. तो मैने कुछ नहीं किया.

दूसरे दिन सुबह मै उठी और रोज की तरह रवि को ऑफिस के लिए तैयार होना था. मैने उनके लिए लंच पैक किया और फिर वो ऑफिस चले गए. साढ़े नौ बजे तक मैने अपने बच्चों को स्कूल के लिए तैयार कर उन्हें स्कूल भेज दिया.

अंकित अभी तक सो कर नहीं उठा था. तो मैने उसके और अपने लिए चाय बनाई और चाय लेकर उसके कमरे में गई.

मै उसके पास जाकर बैठ गई. मैने धीरे से आवाज देकर उसे उठाया. वो उठ गया और उठकर सबसे पहले उसने मुझे मेरे होंठों पर एक प्यारा सा चुम्बन किया.

मैने उससे कहा:- पहले चाय पीले और फिर ब्रश वगैरह कर ले. फिर मै तेरे लिए नाश्ता बना दूँगी.

हम लोग चाय पीने लगे.
चाय पीते वक़्त मैने उससे पूछा:- कल रात को तू मुझे खिड़की से क्यूँ देख रहा था?
तो उसने साफ:-साफ मना कर दिया और बोला:- अब मुझे आपको देखने के लिए खिड़की से झांकने की क्या जरूरत है?

पर मैने उसकी बातों पर कोई गौर नहीं किया.

वो बोला:- चाची आज तो अपने पास बहुत टाइम है. आज तो जी भरके आपकी चुदाई करूँगा.
मैने हँसते हुए उसे अपने पास खींचा और उसके होंठों पर एक जोरदार चुम्मी दी. फिर मैने उससे बोला:- तू अभी तैयार हो जा. तब तक मै घर के काम निपटाती हु.
वो फ्रेश होने गया और मै घर के काम निपटाने में लग गई.

करीब साढ़े दस बजे वो मेरे पास मेरे कमरे में आया उस वक्त मै अलमारी में कपड़ों को ठीक कर रही थी. वो मुझसे आकर चिपक गया. मै वहीं अलमारी से चिपककर खड़ी हुई थी.

उसने अपने दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ लिया. कमर पकड़ते ही उसने मुझे चूमना चालू कर दिया और अब वो एक हाथ से मेरे चूचियों को दबा रहा था.
फिर उसने मेरे गाउन का बटन खोल दिया और मेरे चूचों को नंगा करके उन्हें चूसने लगा.

मै भी जोश में आ गई थी. मै उसके बालों को पकड़ कर उसे अपने सीने में दबा रही थी.
मुझे उसका खड़ा हुआ लंड अपनी चुत पर साफ:-साफ महसूस हो रहा था.

फिर उसने एक ही झटके में मेरे गाउन को मेरे शरीर से अलग कर दिया. मैने अन्दर केवल पैंटी ही पहनी हुई थी.
उसने भी अपने कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा हो गया. उसका लम्बा तना हुआ लौड़ा किसी बेलन से कम नहीं लग रहा था.

वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चुत को चाटने लगा. उसने धीरे से मेरी पैंटी को मेरी टांगों के बीच से निकाल दिया.

अब मै पूरी तरह से नंगी थी और अलमारी से सटकर खड़ी हुई थी. खड़े हुए मेरा नंगा बदन. किसी गोरी अप्सरा की मूर्ती सा चमक रहा था.

मेरी चुत पर हल्के:-हल्के बाल थे. जो मेरी फूली हुई गुलाबी चुत पर चार चाँद लगा रहे थे.
अंकित अब मेरी टाँगों के बीच आया और मेरी चुत को चाटने और चूसने लगा. फिर उसने ज्यादा देर न करते हुए अपनी दो उंगलियाँ मेरी चुत में डाल दीं.

उसकी तरफ से हुए इस अनजान हमले से मै एकदम सिहर गई और जमीन से अपने पैरों के अंगूठों के बल खड़ी हो गई.

अंकित जल्दी:-जल्दी अपनी उंगलियों को मेरी चुत में अन्दर बाहर कर रहा था. उसकी इस हरकत से मुझे इतनी मस्ती चढ़ रही थी कि मै उछल:-उछल कर उसको और उकसा रही थी.
मेरे मुँह से जोर:-जोर से ‘आआहहहह. ऊऊहहह.’ की आवाजें निकल रही थीं. मेरी सिसकारियों से पूरा रूम गूँज रहा था.

तभी अंकित ने मेरी चुत को अपनी उंगलियों से और तेजी से चोदना शुरू कर दिया.
अब मै आनन्द के चरम पर थी और जोर:-जोर से सीत्कार रही थी. एकदम से मेरा बदन अकड़ने लगा और मै बहुत तेजी से चिल्लाते हुए झड़ने लगी.

अंकित ने तेजी से अपनी उंगलियों को बाहर निकाला और अपने मुँह को तेजी से मेरी चुत पर लगा दिया और जोर:-जोर से मेरी चुत को चाटने लगा.
मेरी चुत से निकले हुए सारे रस को अंकित ने किसी क्रीम की तरह चाट लिया.

अब अंकित खड़ा हुआ. मेरा रस अभी भी उसके मुँह के चारों तरफ लगा हुआ था और उसने उसी तरह से मेरे होंठों पर चुम्बन करना शुरू कर दिया. उसके होंठों पर लगे हुए मेरे रस को मैने अपनी जीभ पर महसूस किया. उसका स्वाद मुझे बहुत ही नमकीन लग रहा था.

अंकित ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मै पूरे मजे के साथ उसकी जीभ को चूस रही थी.
अंकित ने अपनी जीभ को बाहर निकाला और मुझसे बोला:- चाची अब मेरा भी लौड़ा गीला कर दो.

मै बिना कुछ बोले अपने घुटनों पर बैठ गई और उसके लौड़ा को चूसने लगी.
अंकित बहुत ही उत्तेजित था. वो मेरे मुँह को तेजी से चोद रहा था.

मै भी बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और मै अब चुदने के लिए बेक़रार हुए जा रही थी.
मुझे लगा कि अंकित जल्दी झड़ जाएगा. तो मैने उसके लौड़ा को बाहर निकाला और उससे बोला:- मुँह में ही निकालने का इरादा है. या कुछ आगे भी करना है?

मेरा इतना बोलते ही अंकित ने मुझे उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया और बोला:- चाची आप किसी रांड से कम नहीं लग रही हो. आज तो आपको रंडी की तरह ही चोदूँगा.
मै भी मजे में बोली:- बोलेगा या कुछ करके भी दिखाएगा.

उसने बिना देर किए मेरी चुत के छेद पर अपना लौड़ा रखा और धक्के मारने लगा.
दो:-तीन जोरदार धक्कों में उसने अपना लौड़ा मेरी चुत में उतार दिया.
मेरी चुत पहले से ही बहुत गीली थी. तो मुझे उसका लौड़ा लेने में ज्यादा दर्द नहीं हुआ.

अब हम दोनों मस्ती में एक:-दूसरे को चोद रहे थे और बीच:-बीच में एक:-दूसरे को चूम चाट रहे थे.

चुदाई करते हुए अंकित मेरी चूचियों को भी दबा देता था और मेरे निप्पल को हल्के से काट भी लेता था. जिससे हमारी मस्ती और बढ़ जाती थी.

मेरे मुँह से जोरों से ‘आआहहह. आआऊऊहहह. ओह अंकित. और जोर से चोदो मुझे. फ़क मी हार्डर.’ की आवाजें निकल रही थीं. जिससे अंकित अपनी चोदने की रफ़्तार और बढ़ा देता था.

करीब दस मिनट बाद मेरा बदन फिर से अकड़ने लगा और मै कमर उठा:-उठा कर झड़ने लगी.
मेरे बदन को अकड़ता देख अंकित और तेजी से मुझे चोदने लगा.

मै बहुत जोर से झड़ गई थी. तो अब अंकित के झटके मुझे दर्द देने लगे थे. कुछ ही पलों के बाद अंकित भी झड़ने वाला था.
उसने बोला:- चाची मै झड़ने वाला हु. अन्दर ही झड़ जाऊँ क्या?

मैने उसे मना किया और उससे मुँह में झड़ने के लिए बोला. पर वो कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो चुका था. जैसे ही उसने लौड़ा को चुत से बाहर निकाला. उसके लौड़ा से एक जोरदार वीर्य की धार निकली. जो मेरी चुत पर किसी बारिश की तरह बरसने लगी.
फिर वो लगातार मेरी चुत और पेट पर झड़ गया.

अंकित वहीं मेरे बगल में लेट गया.
मैने वहीं बिस्तर के नीचे पड़ी हुई पैंटी से अपनी चुत और पेट पर गिरे वीर्य को साफ किया और फिर उस पैंटी को मैने बिस्तर और बिस्तर के बगल में लगे हुए ड्रावर के बीच में डाल दिया. जो सिर्फ बिस्तर पर बैठने वाले को ही दिख सकती थी. वो भी तब जब कोई बहुत ही गहराई से कमरे को चेक करे.

अब मै नंगी ही अपने बिस्तर से उठी और अलमारी से तौलिया निकाल कर नहाने के लिए बाथरूम जाने लगी.
अंकित भी मेरे साथ उठा और बोला:- चाची क्या आपके साथ मै भी चलूँ नहाने?

ऐसा कहते ही वो मुझे अपनी गोद में उठा कर बाथरूम में ले गया.
मै बहुत थक गई थी. तो मुझे अंकित की बांहों में बहुत अच्छा लग रहा था.

अंकित ने लाकर मुझे बाथरूम में खड़ा कर दिया और फिर वो मेरे चूचियों से खेलने लगा.

इतने में ही बाहर से डोरबेल की आवाज़ आई और हम दोनों डरकर एक:-दूसरे से अलग हो गए.

मैने अंकित को कमरे में जाने के लिए बोला और फिर मै भी बाथरूम से बाहर आकर अपने कमरे में आ गई. वहाँ मैने घड़ी की तरफ देखा. तो एक बज रहा था.
‘इस वक्त कौन हो सकता है.’ यही सोचते हुए मै वहाँ से गाउन पहनकर गेट खोलने के लिए जाने लगी.

मैने दरवाजा खोला तो सामने गोलू था और उसका चेहरा उतरा हुआ लग रहा था.

दरवाज़ा खोलते ही वो मुझसे आकर लिपट गया. मैने भी उसके बालों में हाथ फेरा और उससे पूछा:- क्या हुआ?
तो वो बोला:- आज मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा था. तो मै स्कूल से वापस आ गया.

मैने उसके माथे पर एक चुम्बन किया और उसे अपने कमरे में लेकर आ गई.
मैने उसके माथे पर बाम लगाया और उसे वहीं लेटा दिया.

तक तक अंकित अपने रूम से नहाकर बाहर आ गया और गोलू को देखते ही बोला:- तुझे क्या हो गया?
मैने उसे सब बता दिया.

मैने गोलू से बोला:- तू अब आराम कर थोड़ी देर.
और फिर मै नहाने चली गई. अंकित भी अपने कमरे में चला गया.

थोड़ी देर बाद मै जब नहा कर बैडरूम में आई. तब तक गोलू सो चुका था.
मै केवल तौलिया लपेटकर कमरे में आई थी. तो मैने बिना किसी डर के अपना तौलिया निकाल दिया और फिर ब्रा और पैंटी पहन कर उसके बाद सूट पहन लिया.

वो सूट मेरे जिस्म पर एकदम फिट था उसमें से मेरा एक:-एक उभार और अंग साफ समझ आता था.

अब मै किचन में गई और वहाँ से खाना लेकर अंकित के कमरे में आ गई.
मैने गोलू को भी खाना खाने के लिए उठा दिया. हम सबने खाना खाया और फिर अंकित सो गया.

मै और गोलू टीवी देखने लगे. थकान के कारण थोड़ी देर बाद मै भी सो गई.

शाम को जब मै उठी. तो चार बज रहे थे. मैने देखा कि गोलू अंकित के साथ सोया हुआ था.

थोड़ी देर बाद मेरी बेटी अन्नू भी स्कूल से आ गई. मैने सबके लिए चाय बनाई और हम सबने चाय पी.
अन्नू उठकर अपने रूम में चली गई.

मुझे ऐसा लग रहा था कि आज इस सूट के कारण अंकित के साथ गोलू भी मुझे ताड़ रहा था. पर ये मेरा वहम भी हो सकता था.

थोड़ी देर बाद रवि भी ऑफिस से वापस आ गए. रात को हम सब लोगों ने मिलकर खाना खाया और सब सोने चले गए.

फिर मै भी बैडरूम में आई. वहाँ रवि लैपटॉप पर कुछ कर रहे थे.
मै अपने कपड़े उन्हीं के सामने बदलने लगी. मैने ब्रा उतार दी और गाउन पहन लिया. फिर मै जाकर बिस्तर पर लेट गई और रवि ने भी लैपटॉप रखा और आकर मुझसे लिपट गए.

रवि ने मुझसे बोला:- कल मै 3:-4 दिन के लिए ऑफिस के काम से होमटाउन जा रहा हु.

मै उनसे नाराज़ हो गई और फिर वो मुझे मनाने के लिए मुझे किस करने लगे और फिर हम सो गए.

सुबह जब मै उठी तो मुझे कल वाली पैंटी के बारे में याद आया. जिससे मैने अपनी चुत को साफ किया था.
मैने उठकर देखा तो वो पैंटी वहाँ नहीं थी. मै उसे इधर:-उधर ढूंढने लगी. पर वो नहीं मिली.

 

थोड़ी देर बाद रवि उठ गए. आज उन्हें बाहर जाना था. थोड़ी देर बाद बच्चे भी उठ गए. जैसे ही अन्नू को पता लगा कि उसके पापा उसकी नानी के शहर में जा रहे हैं. तो वो भी उनके साथ जाने की जिद पर अड़ गई.

मैने भी उसकी बात को मान लिया और थोड़ी देर बाद वो दोनों चले गए.
अंकित और गोलू दोनों उन्हें बस स्टैंड तक छोड़ने गए थे.

उनके जाते ही मै फिर से अपनी पैंटी को ढूंढने लगी. मैने सोचा शायद अंकित ने मेरी पैंटी ली हो. मैने आपको शायद पहले ही बता दिया था कि अंकित गोलू के रूम में ही रहता था. तो मै उसके कमरे में जाकर वहाँ अपनी पैंटी देखने लगी.

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आश्चर्य कि मुझे अपनी पैंटी वही बिस्तर के नीचे पड़ी मिली. मैने उसे उठा लिया. देखा तो उस पर पहले से कुछ ज्यादा ही दाग़ लगे हुए थे और वो अभी तक गीली लग रही थी.

तभी डोरबेल बजी और मै उस पैंटी को वहीं डालकर दरवाज़े की तरफ जाने लगी.

अंकित और गोलू बस स्टैंड से वापस आ गए थे. मैने दरवाज़ा खोलकर उन्हें अन्दर बुला लिया.

गोलू के स्कूल का वक्त हो रहा था. मैने गोलू का लंच पैक किया और फिर वो स्कूल चला गया.

उसके जाते ही मैने अंकित से पूछा:- तुमने मेरी पैंटी कमरे से क्यों उठाई?
वो किसी अंजान की तरह बोला:- चाची आप ये क्या बोल रही हो. भला मै आपकी पैंटी क्यों उठाने लगा?

मेरा दिमाग खराब होने लगा आखिर ये चल क्या रहा था. पहले मुझे खिड़की से किसी के झांकने का एहसास और फिर एकदम से पैंटी का गायब हो जाना. अगर ये सब अंकित नहीं कर रहा था तो कौन कर रहा था. इन्हीं सबको याद करते हुए मैने सोचा कि कल अंकित के बाद मेरे कमरे में सिर्फ गोलू ही आया था तो क्या गोलू ने ही.!?

Chachi ko choda, meri chudai bhatize ne ki.

मै यह सब सोच ही रही थी कि तब तक अंकित मुझसे बोला:- चाची जी. अभी पापा का कॉल आया था. मुझसे आने के लिए बोल रहे थे. तो मैने कल आने का बोल दिया है.

मै उसके मुँह से यह सुनते ही उदास हो गई.
वो मेरे पास आया और मेरे चेहरे को अपने हाथ में लेते हुए मेरी आँखों पर किस करने लगा. मुझसे बोला:- मेरी प्यारी चाची तो उदास हो गईं. आज का दिन मै अपनी चाची के लिए यादगार बना दूँगा.

फिर उसने वहीं खड़े:-खड़े गाउन के ऊपर से ही मेरी चुत को मसलना शुरू कर दिया.
मै भी उत्तेजना में आकर उसके होंठों को चूमने लगी. आज मै बहुत ही जोर से उसके होंठों को चूम रही थी. एक पल के लिए तो वो भी सिहर गया.
हम दोनों एक:-दूसरे की जीभों को भी चूम रहे थे.

अगले ही पल उसने अपने हाथों को मेरी चुत से हटाकर मेरी गाण्ड पर रख दिए और मेरे गोल मोटे चुतड़ों को जोर:-जोर से दबाने लगा. मुझे अब और भी मस्ती चढ़ने लगी थी.

फिर उसने बिना मेरी गाण्ड से हाथ उठाए मेरे गाउन को मेरे चुतड़ों के ऊपर कर दिया और फिर उसने मेरी काली पैंटी को मेरी जांघों तक उतार दी.

मै कपड़े पहने हुए भी नंगी हो चुकी थी. मेरी कमर के नीचे का पूरा हिस्सा अब नंगा था. अब अंकित मेरी नंगी गाण्ड को जोर:-जोर से मसल रहा था. जिससे मुझे मीठा:-मीठा सा दर्द हो रहा था.

फिर वो मुझे उठाकर मेरे बेडरूम में ले आया और बेड पर मुझे उल्टा लेटा दिया. मै समझ गई थी कि ये आज मेरी गाण्ड मारने के मूड में है. पर मै इतनी उत्तेजित थी कि उससे कुछ बोल नहीं पा रही थी.

मेरी चुत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.

अब अंकित उठा. उसने मुझे सीधा किया और मेरा गाउन उतार कर साइड में रख दिया.
मैने अंकित से बोला:- अंकित प्लीज अब ज्यादा देर मत करो.

वो उठा और उसने अपनी पैंट की जेब से एक कन्डोम का पैकेट निकाला और मुझे देते हुए बोला:- चाची पहले मुझे ये तो पहना दो.
मैने अंकित से कहा:- आज तो पूरी तैयारी से आए हो.
तो वो हँस दिया. फिर वो मेरे पास आकर लेट गया.

मैने उसका तना हुआ लौड़ा अपने हाथों में लिया और उस पर एक जोरदार चुम्मी दी. फिर मैने एक हाथ से उसके लौड़ा को पकड़ा और दूसरे हाथ से उस पर कंडोम लगाने लगी.

वो उठा और उसने मुझे सीधा लेटाकर मेरी टांगों के बीच आ गया. उसने मेरी दाईं टांग को उठाया और अपने कंधे पर रख लिया.

मैने मस्ती में उससे बोला:- आज कल पोर्न देखकर बहुत नए:-नए पोज़ सीख गए हो.
तो वो हँसकर बोला:- आपको भी देखना है. क्या?

मैने हँसकर उसकी बात को टाल दिया. फिर उसने मेरी चुत पर अपने लौड़ा को लगाया और बिलकुल धीरे:-धीरे उसे मेरी चुत के अन्दर धकेलने लगा जिससे मुझे हल्का:-हल्का दर्द होने लगा. पर वो दर्द मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

वो लगातार मेरी चुत में धीरे:-धीरे अपने लौड़ा को अन्दर:-बाहर करता जा रहा था और मेरे चूचियों को दबाए जा रहा था. मुझसे बोला:- चाची. आपके मम्मे अभी तक इतने टाइट हैं कि इन्हें मसलने में अलग ही मजा है.
इतना बोलते ही वह मेरे चूचियों को चाटने लगा. मेरे मम्मे उसके मसले के कारण एकदम लाल पड़ गए थे.

अब वो उठा और अपनी स्पीड तेज कर दी. मै भी अपनी कमर उचका उचका कर उसका साथ दे रही थी. उसके हर एक दमदार झटके से मेरी पतली कमर में एक लहर सी दौड़ने लगती थी.

उसने अब मुझे घोड़ी बन जाने को कहा. मै बिना देरी के बिस्तर पर अपने घुटनों और हाथों के बल खड़े होकर घोड़ी बन गई.

अंकित मेरे पीछे से आया और एक ही झटके में उसने अपना पूरा लौड़ा मेरी चुत की दरार में उतार दिया. मै दर्द से सिहर उठी. पर वो लगातार मेरी चुत पर धक्के मारे जा रहा था.

अब मै पूरी मस्ती के साथ गाण्ड उठा कर उसके हर धक्कों का जबाव दे रही थी.
थोड़ी ही देर बाद मेरा बदन अकड़ने लगा और मै ‘ओईई.ई. माआआ. मर गगई.’ करते हुए झड़ने लगी.

झड़ते वक्त अंकित ने अपने लौड़ा को मेरी चुत में रोककर रखा था. जिससे मेरी चुत का पानी मेरी चुत में ही बना रहा और अंकित के लौड़ा को कन्डोम के अन्दर तक भिगो दिया.

अंकित ने एकदम से अपने लौड़ा को मेरी चुत से निकाला और मेरी गाण्ड के छेद पर रख कर जोरदार धक्का मारा. जिससे उसका दो इंच लौड़ा मेरी गाण्ड में घुस गया.

मै दर्द के मारे उछल पड़ी. मेरी आँखों के आगे एकदम से अँधेरा छा गया.
मै जोरों से रोने लगी. तो अंकित रुक गया. पर उसने अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में ही रहने दिया और वेसे ही अपने पेट के बल मेरी कमर से लिपट गया.

मैने अपने सीने को बिस्तर पर टिका दिया. पर मै अभी भी अपने घुटनों पर खड़ी हुई थी और अंकित मुझसे किसी सांप की तरह लिपटा हुआ था.

मैने रोते हुए अंकित से बोला:- तूने तो मुझे मार ही डाला.
पर मेरे इतना बोलते ही उसने एक बहुत जोरदार धक्के के साथ अपने पूरे लौड़ा को मेरी गाण्ड में उतार दिया. मै उससे भागने के लिए इधर:-उधर हाथ:-पैर मारने लगी. पर उसकी मजबूत पकड़ के कारण मै कुछ नहीं कर पाई.

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मै रोते हुए उससे बोली:- अंकित तूने तो आज मार ही दिया मुझे.
मुझे इतना असहनीय दर्द हो रहा था कि मेरे आँसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे. आज मेरी गाण्ड की सील भी टूट चुकी थी. जिसे मैने आज तक रवि को भी नहीं छूने दिया था.

थोड़ी देर बाद मै नार्मल हुई तो अंकित ने अपने लौड़ा को अन्दर:-बाहर करना शुरू कर दिया. अब वो लगातार अपने धक्कों से मेरी गाण्ड को चोद रहा था. पर मै अभी भी अपनी कसी हुई गाण्ड की सील टूटने का शोक मना रही थी.

अंकित ने अब धक्के मारते हुए एक हाथ से मेरी चुत को सहलाना शुरू कर दिया जिससे मुझे भी अब मस्ती आने लगी थी. फिर उसने अपनी दो उंगलियों को मेरी चुत में डालकर मेरी चुत को भी चोदना शुरू कर दिया.

उसने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी. वो बहुत ही तेजी से मेरी गाण्ड में धक्के दे रहा था.
मै भी अब अपनी कमर उठा उठा कर उसके धक्कों का जवाब दे रही थी.

मेरी चुत दोबारा अपना पानी छोड़ने लगी. जो कि मेरे झुके होने की वजह से मेरी चुत से होते हुए मेरे पेट और फिर मेरे चूचियों पर आने लगा.

मेरी चुत से निकली हुई धार का कुछ पानी सीधा बिस्तर पर जाकर गिरने लगा. फिर रवि भी जोरदार धक्कों के साथ मेरी गाण्ड में झड़ने लगा.

एक के बाद एक उसके गर्म वीर्य की धार मेरी गाण्ड को भिगोने लगी. मै उसके लौड़ा से निकला हुआ गर्म वीर्य मेरी गाण्ड के अन्दर साफ:-साफ महसूस कर पा रही थी.

मैने अंकित से पूछा:- तूने कन्डोम निकाल दिया था क्या?
उसने बोला:- नहीं तो.

फिर जब उसने अपने लौड़ा को मेरी गाण्ड से बाहर निकाला. तो मैने देखा कि कॉन्डोम का आगे का हिस्सा पूरा फट चुका था. जिसमें से उसका लौड़ा बाहर निकला हुआ था.

शायद जब वो अपना लौड़ा मेरी कसी हुई गाण्ड में डाल रहा था. तभी कन्डोम का ये हाल हो गया था.

अंकित उठकर वहीं मेरे पास लेट गया. उसने अपना कन्डोम उतारकर वहीं बिस्तर के नीचे डाल दिया.

अब मै भी उठकर बैठ गई. उठते ही मैने अपने हाथ को अपनी गाण्ड के छेद पर लगाया. मेरी गाण्ड का छेद सूज गया था और उसमें से अंकित का सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैने अंकित को बोला:- ये तूने क्या कर दिया. मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
तो वो मुझे ‘सॉरी’ बोलने लगा.

मै उठकर बाथरूम जाने लगी. पर ठीक से चल नहीं पा रही थी. मै लड़खड़ाती हुई बाथरूम तक पहुँची. मैने वहाँ खुद को अच्छे से साफ किया. अपनी चुत और गाण्ड को भी साबुन से अच्छे से साफ किया. फिर मै वहाँ से नहाकर बाहर आई.

मै वहाँ से नंगी ही बाहर आई और अपने कमरे में पहुँची. अंकित वहीं बिस्तर पर ही सो गया था.

मैने अलमारी खोली और उसमें से तौलिया निकालकर अपने नंगे गीले बदन को पोंछा और फिर ब्रा और पैंटी पहनने लगी. पैंटी पहनते टाइम मुझे खोई हुई पैंटी का ख्याल आया जो कि मुझे गोलू के कमरे में उसके बिस्तर के नीचे मिली थी.

अब मेरा पूरा ध्यान उस पैंटी पर गया. तो मैने सोचा कि अगर ये सब गोलू कर रहा है. तो कल अंकित के जाने के बाद से मुझे उस पर नज़र रखनी होगी.

फिर मैने अंकित को उठाया और उससे नहा कर आने का बोला.
वो उठकर अपने कमरे में चला गया.

मेरी नज़र बिस्तर पर पड़ी. जिसकी चादर मेरी चुत के पानी से गीली पड़ी हुई थी और उस पर धब्बे भी पड़ गए थे.

मैने जल्दी से उस चादर को बदल दिया और उस चादर को उठाकर बाथरूम में धोने के लिए डाल दिया. मैने उस कन्डोम को भी उठाकर डस्टबिन में डाल दिया. पर मैने अपनी पैंटी वही पड़ी रहने दी. जो कि अंकित ने मुझे चोदते समय उतारकर वहीं डाल दी थी. वो वही अलमारी के पास पड़ी हुई थी.

अब एक बजने वाला था. मै खाना बनाने के लिए रसोई में गई. मैने खाना बनाया.

आज गोलू भी स्कूल से जल्दी आने का बोल कर गया था तो थोड़ी देर बाद गोलू भी स्कूल से आ गया.

जब मै दरवाज़ा खोलने गई तो रोज की तरह वो आते ही मेरे सीने से लग गया. मैने भी उसको अपनी बांहों में भर लिया. जिससे उसका सिर मेरे चूचियों में दबने लगा. पर इस बात का मुझे कोई एहसास नहीं था.

फिर वो मुझसे अलग हुआ और हम दोनों अन्दर आने लगे. उसने मेरी लड़खड़ाती चाल देखकर पूछा:- माँ आप ऐसे क्यों चल रही हो?
तो मैने बोला:- अभी नहाते समय बाथरूम में फिसल गई थी.

फिर हम सब लोगों ने मिलकर खाना खाया.
उसके बाद अंकित और गोलू वहीं सो गए और मै अपने कमरे में आ गई.

कुछ देर बाद मुझे मेरे कमरे में किसी की आहट हुई. तो मैने वैसे ही लेटे हुए अपनी आँखों को हल्का सा खोलकर इधर:-उधर देखा. तो मुझे अलमारी के पास गोलू खड़ा हुआ दिखा.
शायद वो मुझे सोता हुआ समझ कर कमरे के अन्दर आ गया था.

मैने देखा कि मेरी पैंटी गोलू के हाथ में थी और वो बार:-बार उसे अपने मुँह की तरफ ले जाकर उसे सूंघ और चाट रहा था.

Chachi Ki chudai, chachi bhatize ki chudai

इससे आगे क्या हुआ. वो सब अगले भाग में लिखूंगी.

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