शादी का सीजन aur आंटी की सहेली

Hindi porn story, आपको तो पता ही है की शादी के सीजन में घर पूरा भर ही जाता है। शादी में आंटी की सहेली को चोदा। मेरी इस आंटी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैंने पड़ोसन आंटी की सहेली को चोदा जब वो मुझे एक शादी में ले गई.
प्रिय पाठको, मैं साहिल मालेगाँव से हूँ। मेरी हाइट 5 फुट 8 इंच है और मैं 25 साल का हूँ। मेरा लंड 6.5 इंच का है और मैं चुदाई करने में बहुत माहिर हूँ।

बात आज से कुछ महीने पहले की है। एक दिन मेरी आंटी ने मुझे शाम को कॉल किया और बोला कि उनकी बेस्ट फ्रेंड की बेटी की शादी है, आज मेहंदी की रस्म है और तुम्हारे अंकल आज बाहर जा रहे हैं। क्या तुम मेरे साथ चलोगे प्लीज़ क्योंकि मुझे शादी में ले जाने के लिए कोई और नहीं है?

मैं रेडी हो गया और शाम को अपनी बाइक पर आंटी के घर पहुँच गया और आंटी को लेकर निकल पड़ा। कुछ देर बाद हम शादी वाली जगह पर पहुँच गए। वहाँ पहुँचने पर आंटी की बेस्ट फ्रेंड ने हमारा वेलकम किया.. उस वक्त उनके साथ एक आंटी और थीं.. जो बहुत टाइट कपड़ों में अपने मम्मों को जकड़े हुए थीं। वे आंटी अपने मम्मों को और ज्यादा टाइट करके हम दोनों से मिलीं।

सच में उनके बहुत बड़े-बड़े चूचे थे। जब वो पलटीं तो उनकी गांड.. बाप रे बाप बहुत ही मस्त थी.. साली बहुत ही ज़्यादा बाहर निकली हुई थी।

मैंने आंटी से पूछा- ये कौन हैं?
तो वो बोलीं- ये सपना है।

मैं बार-बार उनको ही देख रहा था। वो भी मुझे नोटिस कर चुकी थीं। फिर वो मेरे पास आईं और हम दोनों बात करने लगे। जब मैं उनसे बात कर रहा था, तब भी मैं उनके बड़े-बड़े मम्मों को ही देख रहा था।

फिर हमें आंटी ने आवाज़ देकर बुलाया क्योंकि दुल्हन की मेहंदी दिखाई जा रही थी और सब एक के पीछे एक खड़े होकर देख रहे थे। मैं सपना आंटी के पीछे खड़ा था। उनकी बाहर निकली हुई गांड देख कर मेरा दिल मचलने लगा। मैंने सोचा क्यों ना चान्स मारा जाए।

मैंने अपना लंड जो कि आधा खड़ा था, को आंटी के गांड पर टच कर दिया। वो झट से पीछे पलट कर देखने लगीं, तो मैं डर गया। लेकिन आंटी एक नॉटी स्माइल देकर फिर आगे देखने लगीं.. इससे मुझे ग्रीन सिग्नल मिल चुका था। अब मैं और आगे होकर आंटी की गांड पर लंड को फील करने लगा और वे भी गांड पीछे करके लंड को प्रेस करने लगीं।
मैंने इधर-उधर देखा हमें कोई नहीं देख रहा था। मैंने अब अपना एक हाथ आंटी की गांड पर रख दिया और आगे झुक कर देखने लगा। फिर धीरे-धीरे गांड सहलाने लगा। फिर सब वहाँ से हटने लगे और मैं थोड़ा दूर हट कर खड़ा हो गया।

आंटी मेरे पास आईं और मुस्कुराते हुए बोलीं- मज़ा आया?
मैं बोला- अभी कहाँ मज़ा आया!
वो बोलीं- जब रात में सब सो जाएँगे तो पीछे स्टोर रूम में आ जाना।

मैं तो बहुत खुश हो गया और सबके सोने का वेट करने लगा। फिर रात के 2 बजे मैं छुपते हुए स्टोर रूम में गया और कोई आधे घंटे बाद सपना आंटी अन्दर आ गईं।

वाऊ आंटी रेड नाईटी में थीं.. बहुत सेक्सी लग रही थीं। मैंने झट से आंटी को हग कर लिया और अपने होंठों उनके होंठों पर रख कर किस करने लगा। मैं एक हाथ से चूचे और दूसरे हाथ से उनकी गांड दबाने लगा। आंटी मादक सिसकारी निकालने लगीं- ऊओह साहिल कम ऑन..
मैं भी जोश में आ गया। अब मैंने आंटी के मुँह में अपनी जीभ डाल दी और आंटी मेरी जीभ को आइसक्रीम की तरह चूसने लगीं।

सच में बहुत मज़ा आ रहा था।

मैंने उनकी नाईटी उतार दी। अन्दर वो ब्लैक ब्रा और ब्लैक पेंटी में थीं। मैं ब्रा के ऊपर से ही उनके बड़े-बड़े मम्मों को दबाने लगा। वो मेरा लंड पेंट से निकाल कर सहलाने लगीं। फिर मैंने उनकी ब्रा भी उतार दी और ज़मीन पर लिटा कर उनके एक चूचे के निप्पल को मुँह में भर लिया, वो मेरा सर अपने चूचे पर दबाने लगीं। मैंने आंटी के दोनों मम्मों को चूस-चूस कर निचोड़ डाला। फिर मैं किस करते हुए नीचे सरकने लगा। वो लगातार मोन कर रही थीं।

फिर मैंने पेंटी के ऊपर से ही आंटी की चुत को किस करने लगा.. अब वो बहुत गरम हो चुकी थीं। अब उन्होंने मुझे उठा कर एक जोरदार किस करते हुए मेरे पूरे कपड़े निकाल दिए और नीचे बैठ कर मेरा लंड बड़ी कामुकता से चूसने लगीं।

अब मेरे मुँह से सिसकारी निकल रही थी। आंटी बहुत ही अच्छा ब्लोजॉब दे रही थीं।

मेरा लंड एकदम कड़क हो चुका था। वो मेरे लंड के आगे वाले हिस्से पर अपनी जीभ बहुत मस्त तरह से घुमा रही थीं। मैंने खूब मजे से आंटी के मुख को चोदा!

फिर आंटी बोलीं- अब मुझे चोदो प्लीज़। मैंने उन्हें डॉगी पोज़ में किया और पीछे से लंड एक बार ही में पूरा डाल दिया।
वो कराह कर बोलीं- आराम से..
मैं तेज़-तेज़ चोदने लगा और दोनों हाथों से आंटी के मम्मों को भी दबा रहा था। वो भी गांड आगे-पीछे करके चुदवा रही थीं। वो चुत में लंड लेने में बहुत ही अनुभव वाली लग रही थीं, क्योंकि वो लंड को बहुत अन्दर तक ले रही थीं।

अब उन्होंने मुझे नीचे लेटा कर मेरा लंड चुत में ले लिया और दोनों हाथ मेरे पैरों पर रख कर बहुत स्पीड से गांड उछाल-उछाल कर चुदने लगी थीं। मैं बहुत मज़ा ले रहा था।

फिर मैंने उन्हें दीवार के सहारे खड़ा करके उनकी एक टांग हाथ में पकड़ कर लंड चुत में डाल दिया और चोदने लगा।

वो बस ‘याहह यस्स यस्स.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ बोले जा रही थीं।

अब तक हम दोनों पसीना-पसीना हो चुके थे। आंटी बार-बार मेरे लंड को चुत से बाहर तक निकालतीं.. फिर दोबारा झटके से चुत में डाल लेतीं, जिससे और भी मज़ा आ रहा था।

अब मैंने आंटी को ज़मीन पर लिटा दिया, उनकी दोनों टांगें अपने कंधे पर रख कर आंटी को धकापेल चोदा। साथ ही मैं अपने हाथ से आंटी के मम्मों को निचोड़ भी रहा था।

आंटी की चुत पूरी गीली हो कर बहने लगी थी। शायद आंटी दो बार झड़ चुकी थीं.. मगर अभी भी मज़े से चुदवा रही थीं। मेरा लंड भी हार नहीं मान रहा था, बस जोर-जोर से धक्के मारे जा रहा था। आंटी ने फिर मुझे नीचे कर दिया और मेरे लंड पर सवार हो गईं।

मैं उनके एक चूचे को अपने मुँह ले कर चूस भी रहा था और वो ऊपर से मुझे अपने मम्मे दबा-दबा कर दूध पिला रही थीं। मैंने नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर आंटी को चोदा. आंटी की चुत में धक्के लगाए।

फिर आंटी की चुत में ही मेरा पानी निकल गया.. और भी साथ में आंटी भी झड़ गई। आंटी ने झट से उठ कर मेरा लंड मुँह ले लिया और चाटने लगीं। वो मेरा पानी ऐसे चाट रही थीं.. जैसे उनको शहद का मज़ा मिल रहा हो।

आंटी ने लंड को चाट-चाट कर पूरा चिकना कर दिया और मुझे किस करके बोलीं- तूने तो आज बहुत मज़ा दिया साहिल!
मैं बोला- मज़ा तो आपने मुझे दिया थैंक्स आंटी।
उसके बाद हम अपनी-अपनी जगह पर जाकर सो गए।

तब से दोबारा कोई और आंटी नहीं मिलीं.. जो चुदाई का मज़ा दे सके।

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